भिलाई इस्पात संयंत्र यानी BSP के निजीकरण और अडानी समूह द्वारा इसे खरीदे जाने की चर्चाओं के बीच प्लांट प्रबंधन ने बड़ा बयान जारी किया है। प्रबंधन ने निजीकरण से जुड़ी खबरों को झूठा और भ्रामक बताया है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे, वहीं भाजपा विधायक रिकेश सेन ने कांग्रेस नेताओं को अपने आरोपों के सबूत सार्वजनिक करने की चुनौती दी थी। अब प्रबंधन के बयान के बाद BSP के निजीकरण को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में है।दरअसल, 14 अक्टूबर को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया था कि अडानी समूह के प्रतिनिधि भिलाई स्टील प्लांट का दौरा करने आ रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई थी कि केंद्र सरकार की नजर अब BSP पर है। भूपेश बघेल ने कहा था कि भिलाई इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ की पहचान और आत्मा है, इसे किसी भी कीमत पर बिकने नहीं दिया जाएगा।वहीं, भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने भी BSP के निजीकरण की आशंकाओं पर विरोध जताया था। उन्होंने कहा था कि अंबानी-अडानी को भिलाई इस्पात संयंत्र खरीदने नहीं देंगे। उनके मुताबिक, BSP केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि भिलाई की पहचान और लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ा संस्थान है। उन्होंने संयंत्र को बचाने के लिए आखिरी दम तक लड़ाई लड़ने की बात कही थी।दूसरी ओर, वैशाली नगर से भाजपा विधायक रिकेश सेन ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव से निजीकरण से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की चुनौती दी। रिकेश सेन ने कहा कि अगर BSP को बेचने की कोशिश हुई, तो वे खुद विरोध में धरने पर बैठेंगे। उन्होंने दोनों कांग्रेस नेताओं के घर के बाहर भी धरना देने की बात कही थी।अब इस पूरे विवाद पर BSP प्रबंधन ने बयान जारी कर निजीकरण की खबरों को झूठा और भ्रामक बताया है। प्रबंधन के मुताबिक, इस्पात मंत्रालय ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इन दावों का खंडन किया है। वहीं, प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो यानी PIB की फैक्ट चेक टीम ने भी इन खबरों को गलत बताया है।बताया जा रहा है कि BSP और अडानी टोटल गैस लिमिटेड के बीच 16 जुलाई 2026 को पाइप के जरिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए समझौता ज्ञापन हुआ था। इसका उद्देश्य प्लांट और टाउनशिप में गैस की आपूर्ति करना है। इसी समझौते के सिलसिले में अधिकारियों के दौरे की चर्चा को निजीकरण से जोड़कर देखा जाने लगा।इस मामले में भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि रिकेश सेन को नेताओं के घर के सामने धरना देने के बजाय प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने नगरनार और भिलाई स्टील प्लांट को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को बचाने के लिए लोगों से तैयार रहने की अपील की।फिलहाल, BSP प्रबंधन ने निजीकरण की खबरों को भ्रामक बताया है। ऐसे में अब इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आधिकारिक तथ्यों और केंद्र सरकार के रुख पर सबकी नजर रहेगी।
भिलाई इस्पात संयंत्र यानी BSP के निजीकरण और अडानी समूह द्वारा इसे खरीदे जाने की चर्चाओं के बीच प्लांट प्रबंधन ने बड़ा बयान जारी किया है। प्रबंधन ने निजीकरण से जुड़ी खबरों को झूठा और भ्रामक बताया है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे, वहीं भाजपा विधायक रिकेश सेन ने कांग्रेस नेताओं को अपने आरोपों के सबूत सार्वजनिक करने की चुनौती दी थी। अब प्रबंधन के बयान के बाद BSP के निजीकरण को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में है।
दरअसल, 14 अक्टूबर को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया था कि अडानी समूह के प्रतिनिधि भिलाई स्टील प्लांट का दौरा करने आ रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई थी कि केंद्र सरकार की नजर अब BSP पर है। भूपेश बघेल ने कहा था कि भिलाई इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ की पहचान और आत्मा है, इसे किसी भी कीमत पर बिकने नहीं दिया जाएगा।
वहीं, भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने भी BSP के निजीकरण की आशंकाओं पर विरोध जताया था। उन्होंने कहा था कि अंबानी-अडानी को भिलाई इस्पात संयंत्र खरीदने नहीं देंगे। उनके मुताबिक, BSP केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि भिलाई की पहचान और लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ा संस्थान है। उन्होंने संयंत्र को बचाने के लिए आखिरी दम तक लड़ाई लड़ने की बात कही थी।
दूसरी ओर, वैशाली नगर से भाजपा विधायक रिकेश सेन ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव से निजीकरण से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की चुनौती दी। रिकेश सेन ने कहा कि अगर BSP को बेचने की कोशिश हुई, तो वे खुद विरोध में धरने पर बैठेंगे। उन्होंने दोनों कांग्रेस नेताओं के घर के बाहर भी धरना देने की बात कही थी।
अब इस पूरे विवाद पर BSP प्रबंधन ने बयान जारी कर निजीकरण की खबरों को झूठा और भ्रामक बताया है। प्रबंधन के मुताबिक, इस्पात मंत्रालय ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इन दावों का खंडन किया है। वहीं, प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो यानी PIB की फैक्ट चेक टीम ने भी इन खबरों को गलत बताया है।
बताया जा रहा है कि BSP और अडानी टोटल गैस लिमिटेड के बीच 16 जुलाई 2026 को पाइप के जरिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए समझौता ज्ञापन हुआ था। इसका उद्देश्य प्लांट और टाउनशिप में गैस की आपूर्ति करना है। इसी समझौते के सिलसिले में अधिकारियों के दौरे की चर्चा को निजीकरण से जोड़कर देखा जाने लगा।
इस मामले में भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि रिकेश सेन को नेताओं के घर के सामने धरना देने के बजाय प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने नगरनार और भिलाई स्टील प्लांट को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को बचाने के लिए लोगों से तैयार रहने की अपील की।
फिलहाल, BSP प्रबंधन ने निजीकरण की खबरों को भ्रामक बताया है। ऐसे में अब इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आधिकारिक तथ्यों और केंद्र सरकार के रुख पर सबकी नजर रहेगी।
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