छत्तीसगढ़ में पिछले दो दिनों से हुई लगातार बारिश के बाद अब कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बारिश की रफ्तार भले ही कम हुई है, लेकिन रायपुर से लेकर बस्तर और रायगढ़ तक नदी-नाले उफान पर हैं। कई सड़कें और पुल पानी में डूब गए हैं, जबकि निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है। प्रदेश में अलग-अलग घटनाओं में 12 लोगों के बहने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 3 लोगों की मौत हुई है। वहीं कई जगहों पर प्रशासन और राहत-बचाव दल ने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।रायपुर की बात करें तो यहां खारुन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से रायपुर-दुर्ग को जोड़ने वाला पुराना पुल डूब गया है। अमलेश्वर जाने वाला रास्ता भी दूसरे दिन ब्लॉक रहा। नदी और नालों में पानी का बहाव तेज होने के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।महादेव घाट में भी गणेश विसर्जन को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। यहां विसर्जन के लिए केवल समितियों के सदस्यों को प्रवेश दिया जा रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण लोगों को सावधानी बरतने की अपील की गई है।इधर रविवार सुबह जगदलपुर के पास डोंगा घाट में फंसे करीब 10 लोगों को वायुसेना के हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। लगातार बारिश के कारण इलाके में पानी का स्तर बढ़ गया था, जिसके बाद लोग वहां फंस गए थे। राहत और बचाव टीमों की मदद से सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया।गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोले जाने के बाद महानदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। इसके चलते महानदी के आसपास के निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है।सबसे ज्यादा असर रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लॉक में देखने को मिल रहा है। यहां महानदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। सूरजगढ़ गांव में इसका असर सबसे ज्यादा बताया जा रहा है। इसके अलावा खफरापाली, फरसापाली, नवापाली, चांघोरी, सिंघपुरी, काकई मोहान, बाराडोली, नवापारा-ब और रायपाली में भी पानी पहुंच गया है।बाढ़ के कारण करीब 10 परिवारों के घर खाली कराए गए हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं।बलौदाबाजार जिले के गिधौरी में भी बस्तियों में पानी घुस आया। यहां जलभराव के बीच लोग नहाते हुए नजर आए। वहीं शिवरीनारायण में शबरी सेतु पूरी तरह पानी में डूब गया है। बताया जा रहा है कि पुल के करीब 7 फीट ऊपर से पानी बह रहा है। ऐसे में पुल से आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई है।गरियाबंद जिले के राजापड़ाव क्षेत्र से भी हादसे की खबर सामने आई है। यहां रात में एक कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के वक्त परिवार के लोग घर के अंदर सो रहे थे। मकान गिरने से चार लोग घायल हुए हैं। घायलों में खामसिंग विश्वकर्मा, उनकी पत्नी मैनाबाई और 7 वर्षीय सुशांक विश्वकर्मा सहित अन्य लोग शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।रायगढ़ के पुसौर ब्लॉक के नंदेली गांव में भी देर रात करीब 3 बजे कच्चा मकान गिर गया। इस हादसे में रोहणी महंत, रतन महंत और उनका 13 वर्षीय बेटा शिवम घायल हो गए। सभी का इलाज जारी है। वहीं बलरामपुर जिले के ग्राम कोटपाली-खजुरी में कन्हर नदी के तेज बहाव के बीच तीन ग्रामीण फंस गए थे। सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस की टीम ने देर रात रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और तीनों ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इनमें सरजू पिता लंगड़ा चेरवा, राजकुमारी पति सरजू और फूलमनिया पति बेसर शामिल हैं। तीनों ग्राम परसाटोली के रहने वाले बताए गए हैं।बस्तर संभाग में भी बारिश थमने के बाद खतरा पूरी तरह टला नहीं है। पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के बाद इंद्रावती समेत कई नदी-नाले उफा
छत्तीसगढ़ में पिछले दो दिनों से हुई लगातार बारिश के बाद अब कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बारिश की रफ्तार भले ही कम हुई है, लेकिन रायपुर से लेकर बस्तर और रायगढ़ तक नदी-नाले उफान पर हैं। कई सड़कें और पुल पानी में डूब गए हैं, जबकि निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है। प्रदेश में अलग-अलग घटनाओं में 12 लोगों के बहने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 3 लोगों की मौत हुई है। वहीं कई जगहों पर प्रशासन और राहत-बचाव दल ने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
रायपुर की बात करें तो यहां खारुन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से रायपुर-दुर्ग को जोड़ने वाला पुराना पुल डूब गया है। अमलेश्वर जाने वाला रास्ता भी दूसरे दिन ब्लॉक रहा। नदी और नालों में पानी का बहाव तेज होने के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महादेव घाट में भी गणेश विसर्जन को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। यहां विसर्जन के लिए केवल समितियों के सदस्यों को प्रवेश दिया जा रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण लोगों को सावधानी बरतने की अपील की गई है।
इधर रविवार सुबह जगदलपुर के पास डोंगा घाट में फंसे करीब 10 लोगों को वायुसेना के हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। लगातार बारिश के कारण इलाके में पानी का स्तर बढ़ गया था, जिसके बाद लोग वहां फंस गए थे। राहत और बचाव टीमों की मदद से सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोले जाने के बाद महानदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। इसके चलते महानदी के आसपास के निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है।
सबसे ज्यादा असर रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लॉक में देखने को मिल रहा है। यहां महानदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। सूरजगढ़ गांव में इसका असर सबसे ज्यादा बताया जा रहा है। इसके अलावा खफरापाली, फरसापाली, नवापाली, चांघोरी, सिंघपुरी, काकई मोहान, बाराडोली, नवापारा-ब और रायपाली में भी पानी पहुंच गया है।
बाढ़ के कारण करीब 10 परिवारों के घर खाली कराए गए हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं।
बलौदाबाजार जिले के गिधौरी में भी बस्तियों में पानी घुस आया। यहां जलभराव के बीच लोग नहाते हुए नजर आए। वहीं शिवरीनारायण में शबरी सेतु पूरी तरह पानी में डूब गया है। बताया जा रहा है कि पुल के करीब 7 फीट ऊपर से पानी बह रहा है। ऐसे में पुल से आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई है।
गरियाबंद जिले के राजापड़ाव क्षेत्र से भी हादसे की खबर सामने आई है। यहां रात में एक कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के वक्त परिवार के लोग घर के अंदर सो रहे थे। मकान गिरने से चार लोग घायल हुए हैं। घायलों में खामसिंग विश्वकर्मा, उनकी पत्नी मैनाबाई और 7 वर्षीय सुशांक विश्वकर्मा सहित अन्य लोग शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।
रायगढ़ के पुसौर ब्लॉक के नंदेली गांव में भी देर रात करीब 3 बजे कच्चा मकान गिर गया। इस हादसे में रोहणी महंत, रतन महंत और उनका 13 वर्षीय बेटा शिवम घायल हो गए। सभी का इलाज जारी है। वहीं बलरामपुर जिले के ग्राम कोटपाली-खजुरी में कन्हर नदी के तेज बहाव के बीच तीन ग्रामीण फंस गए थे। सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस की टीम ने देर रात रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और तीनों ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इनमें सरजू पिता लंगड़ा चेरवा, राजकुमारी पति सरजू और फूलमनिया पति बेसर शामिल हैं। तीनों ग्राम परसाटोली के रहने वाले बताए गए हैं।
बस्तर संभाग में भी बारिश थमने के बाद खतरा पूरी तरह टला नहीं है। पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के बाद इंद्रावती समेत कई नदी-नाले उफा
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