दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को उच्च शिक्षा संचालनालय ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उन्हें सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने और लगाए गए आरोपों पर विस्तृत जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई सरकारी वाहन के कथित दुरुपयोग, दुर्घटनाग्रस्त वाहन की मरम्मत में नियमों की अनदेखी तथा शासकीय राशि के उपयोग में अनियमितताओं की जांच के बाद की गई है।जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया और मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर पूरे मामले की जांच क्षेत्रीय कार्यालय, उच्च शिक्षा दुर्ग से कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में कई वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद उच्च शिक्षा संचालनालय ने कुलसचिव को नोटिस जारी किया।नोटिस में सरकारी वाहन क्रमांक CG-02-6681 के कथित निजी उपयोग, दुर्घटनाग्रस्त वाहन की मरम्मत में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने, बीमा क्लेम नहीं लेने, वाहन के रखरखाव पर आवश्यकता से अधिक खर्च करने तथा भुगतान प्रक्रिया में संभावित वित्तीय गड़बड़ी जैसे पांच प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है।अब कुलसचिव को सात दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा। संचालनालय जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करेगा। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को उच्च शिक्षा संचालनालय ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उन्हें सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने और लगाए गए आरोपों पर विस्तृत जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई सरकारी वाहन के कथित दुरुपयोग, दुर्घटनाग्रस्त वाहन की मरम्मत में नियमों की अनदेखी तथा शासकीय राशि के उपयोग में अनियमितताओं की जांच के बाद की गई है।
जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया और मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर पूरे मामले की जांच क्षेत्रीय कार्यालय, उच्च शिक्षा दुर्ग से कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में कई वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद उच्च शिक्षा संचालनालय ने कुलसचिव को नोटिस जारी किया।
नोटिस में सरकारी वाहन क्रमांक CG-02-6681 के कथित निजी उपयोग, दुर्घटनाग्रस्त वाहन की मरम्मत में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने, बीमा क्लेम नहीं लेने, वाहन के रखरखाव पर आवश्यकता से अधिक खर्च करने तथा भुगतान प्रक्रिया में संभावित वित्तीय गड़बड़ी जैसे पांच प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है।
अब कुलसचिव को सात दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा। संचालनालय जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करेगा। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
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