17 करोड़ सर्पदंश मुआवजा घोटाला: 3 क्लर्क सस्पेंड, 8 कर्मचारियों के बयान बाकी; गिरफ्तारी के विरोध में लिपिक संघ की सामूहिक अवकाश की चेतावनी

बिलासपुर के चर्चित 17 करोड़ रुपए के फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले में जांच तेज होने के साथ विवाद भी गहराता जा रहा है। तहसील कार्यालय के तीन राजस्व लिपिकों की गिरफ्तारी के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है, जबकि आठ अन्य कर्मचारियों के बयान अभी दर्ज किए जाने बाकी हैं। इस कार्रवाई के विरोध में छत्तीसगढ़ प्रदेश राजस्व लिपिक संघ और छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं रोकी गई तो सभी राजस्व लिपिक सामूहिक अवकाश पर जा सकते हैं।

हड़ताल के चलते तहसील कार्यालय का कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा। सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे जैसे मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी, जिससे दूर-दराज से आए लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। दूसरी ओर, जांच के दायरे में आए कई कर्मचारी अब तबादले की कोशिश में जुट गए हैं। इस मामले में सात तहसीलदारों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

जांच में खुलासा हुआ है कि फर्जी दस्तावेज, नकली हस्ताक्षर और झूठे शपथ पत्रों के जरिए सामान्य मौतों को सर्पदंश से हुई मौत बताकर करोड़ों रुपए का मुआवजा निकाला गया। अब तक डॉक्टर, पुलिसकर्मी और राजस्व कर्मचारियों समेत 17 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।

Comments (0)

    Pls Add Data.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *