सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का गुरुवार को 19वां दिन है। उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि जरूरत पड़ने पर वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय उपचार तथा फोर्स-फीडिंग (जबरन पोषण) की अनुमति दी जाए।वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल हैं। उनका कहना है कि वे देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार और NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा है कि लगातार अनशन के कारण वांगचुक की जान को गंभीर खतरा हो सकता है, इसलिए उन्हें तत्काल जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।आंदोलन का समर्थन कर रहे संगठन का दावा है कि 18 दिनों के अनशन में वांगचुक का वजन 8.9 किलोग्राम घटकर 57.15 किलोग्राम रह गया है। संगठन के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर 105/76, ब्लड शुगर 80 mg/dL और ऑक्सीजन लेवल 97 प्रतिशत दर्ज किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि वह फिलहाल पूरी तरह होश में हैं, लेकिन लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।उधर, आंदोलन से जुड़े लोगों ने सरकार पर संवाद से बचने का आरोप लगाया है और परीक्षा प्रणाली में सुधार सहित विभिन्न मांगों पर जल्द बातचीत शुरू करने की अपील की है। अब सभी की नजर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, जहां इस मामले में सरकार का पक्ष और आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकती है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का गुरुवार को 19वां दिन है। उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि जरूरत पड़ने पर वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय उपचार तथा फोर्स-फीडिंग (जबरन पोषण) की अनुमति दी जाए।
वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल हैं। उनका कहना है कि वे देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार और NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा है कि लगातार अनशन के कारण वांगचुक की जान को गंभीर खतरा हो सकता है, इसलिए उन्हें तत्काल जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
आंदोलन का समर्थन कर रहे संगठन का दावा है कि 18 दिनों के अनशन में वांगचुक का वजन 8.9 किलोग्राम घटकर 57.15 किलोग्राम रह गया है। संगठन के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर 105/76, ब्लड शुगर 80 mg/dL और ऑक्सीजन लेवल 97 प्रतिशत दर्ज किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि वह फिलहाल पूरी तरह होश में हैं, लेकिन लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
उधर, आंदोलन से जुड़े लोगों ने सरकार पर संवाद से बचने का आरोप लगाया है और परीक्षा प्रणाली में सुधार सहित विभिन्न मांगों पर जल्द बातचीत शुरू करने की अपील की है। अब सभी की नजर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, जहां इस मामले में सरकार का पक्ष और आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकती है।
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