बिलासपुर। बिलासपुर पुलिस की डिजिटल पहल 'सशक्त' मोबाइल ऐप एक बार फिर अपराधियों तक पहुंचने में कारगर साबित हुई है। सरकंडा थाना पुलिस ने इस ऐप की मदद से दो शातिर वाहन चोरों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी की पांच दोपहिया वाहन बरामद किए हैं। आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।मामले की शुरुआत 14 जून 2026 को हुई, जब विवेकानंद नगर, मोपका निवासी कमलेश चंद्राकर ने अपनी एक्टिवा स्कूटी (सीजी-10-बीएन-1325) चोरी होने की शिकायत सरकंडा थाने में दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि स्कूटी घर के बाहर खड़ी थी और कुछ ही देर बाद लौटने पर गायब मिली। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।जांच के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि मोपका निवासी सुजल दर्वे उर्फ रिंकू के पास चोरी की मोटरसाइकिल है। सूचना के आधार पर थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार आर्य और मोपका चौकी प्रभारी ओमप्रकाश कुर्रे के नेतृत्व में टीम ने घेराबंदी कर सुजल दर्वे और सुरेन्द्र भुनेश्वर को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान बरामद एक्टिवा को पुलिस ने आईजी रामगोपाल गर्ग द्वारा विकसित 'सशक्त' मोबाइल ऐप में चेक किया, जहां वाहन चोरी का होना तत्काल सत्यापित हो गया।इसके बाद दोनों आरोपियों ने पिछले दो वर्षों में की गई कई वाहन चोरियों का खुलासा किया। आरोपियों ने जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच अलग-अलग स्थानों से एक्टिवा, स्प्लेंडर और यामाहा बाइक चोरी करना स्वीकार किया। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर कुल पांच चोरी के वाहन बरामद किए। पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी चोरी की गाड़ियों को महज दो हजार से दस हजार रुपए तक में बेच देते थे और उससे मिलने वाली रकम अपने शौक पूरे करने में खर्च करते थे।पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी आदतन वाहन चोर हैं। अब चोरी की बाइक खरीदने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि 'सशक्त' ऐप के माध्यम से चोरी के वाहनों और अन्य अपराधों की पहचान तेजी से हो रही है, जिससे अपराधियों तक पहुंचना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है।
बिलासपुर। बिलासपुर पुलिस की डिजिटल पहल 'सशक्त' मोबाइल ऐप एक बार फिर अपराधियों तक पहुंचने में कारगर साबित हुई है। सरकंडा थाना पुलिस ने इस ऐप की मदद से दो शातिर वाहन चोरों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी की पांच दोपहिया वाहन बरामद किए हैं। आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
मामले की शुरुआत 14 जून 2026 को हुई, जब विवेकानंद नगर, मोपका निवासी कमलेश चंद्राकर ने अपनी एक्टिवा स्कूटी (सीजी-10-बीएन-1325) चोरी होने की शिकायत सरकंडा थाने में दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि स्कूटी घर के बाहर खड़ी थी और कुछ ही देर बाद लौटने पर गायब मिली। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
जांच के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि मोपका निवासी सुजल दर्वे उर्फ रिंकू के पास चोरी की मोटरसाइकिल है। सूचना के आधार पर थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार आर्य और मोपका चौकी प्रभारी ओमप्रकाश कुर्रे के नेतृत्व में टीम ने घेराबंदी कर सुजल दर्वे और सुरेन्द्र भुनेश्वर को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान बरामद एक्टिवा को पुलिस ने आईजी रामगोपाल गर्ग द्वारा विकसित 'सशक्त' मोबाइल ऐप में चेक किया, जहां वाहन चोरी का होना तत्काल सत्यापित हो गया।
इसके बाद दोनों आरोपियों ने पिछले दो वर्षों में की गई कई वाहन चोरियों का खुलासा किया। आरोपियों ने जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच अलग-अलग स्थानों से एक्टिवा, स्प्लेंडर और यामाहा बाइक चोरी करना स्वीकार किया। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर कुल पांच चोरी के वाहन बरामद किए। पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी चोरी की गाड़ियों को महज दो हजार से दस हजार रुपए तक में बेच देते थे और उससे मिलने वाली रकम अपने शौक पूरे करने में खर्च करते थे।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी आदतन वाहन चोर हैं। अब चोरी की बाइक खरीदने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि 'सशक्त' ऐप के माध्यम से चोरी के वाहनों और अन्य अपराधों की पहचान तेजी से हो रही है, जिससे अपराधियों तक पहुंचना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है।
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