छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने प्रशासनिक कार्यालयों में संलग्न या प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से उनकी मूल शालाओं में वापस भेजने के निर्देश जारी किए हैं।यह आदेश स्कूल शिक्षा मंत्री की 23 जून 2026 को हुई समीक्षा बैठक के बाद जारी किया गया है। संचालनालय ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों, जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO), खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) और बीआरसी कार्यालयों को निर्देश दिया है कि कार्यालयों में पदस्थ शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त कर मूल विद्यालय में भेजा जाए।सभी शिक्षकीय पदों पर लागू होगा आदेशआदेश के अनुसार सहायक शिक्षक, शिक्षक, प्रधानाध्यापक और व्याख्याता सहित सभी शिक्षकीय संवर्ग के कर्मचारी, जो वर्तमान में किसी प्रशासनिक कार्यालय में संलग्न या प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, उन्हें उनके मूल पदस्थापना स्थल पर लौटना होगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक का प्राथमिक दायित्व विद्यालय में अध्यापन कार्य करना है और छात्रहित सर्वोपरि है।अधिकारियों से मांगी गई रिपोर्टसंचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संयुक्त संचालकों को निर्देश दिए हैं कि कार्यमुक्त किए गए शिक्षकों की नामवार सूची, पदनाम, कार्यमुक्ति आदेश क्रमांक और तिथि सहित विस्तृत जानकारी तत्काल संचालनालय को भेजी जाए। आदेश के पालन में लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।छात्रों को मिलेगा सीधा लाभसरकार का मानना है कि इस फैसले से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर होगी और विद्यार्थियों को नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। लंबे समय से प्रशासनिक कार्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की स्कूलों में वापसी से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने प्रशासनिक कार्यालयों में संलग्न या प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से उनकी मूल शालाओं में वापस भेजने के निर्देश जारी किए हैं।
यह आदेश स्कूल शिक्षा मंत्री की 23 जून 2026 को हुई समीक्षा बैठक के बाद जारी किया गया है। संचालनालय ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों, जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO), खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) और बीआरसी कार्यालयों को निर्देश दिया है कि कार्यालयों में पदस्थ शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त कर मूल विद्यालय में भेजा जाए।
आदेश के अनुसार सहायक शिक्षक, शिक्षक, प्रधानाध्यापक और व्याख्याता सहित सभी शिक्षकीय संवर्ग के कर्मचारी, जो वर्तमान में किसी प्रशासनिक कार्यालय में संलग्न या प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, उन्हें उनके मूल पदस्थापना स्थल पर लौटना होगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक का प्राथमिक दायित्व विद्यालय में अध्यापन कार्य करना है और छात्रहित सर्वोपरि है।
संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संयुक्त संचालकों को निर्देश दिए हैं कि कार्यमुक्त किए गए शिक्षकों की नामवार सूची, पदनाम, कार्यमुक्ति आदेश क्रमांक और तिथि सहित विस्तृत जानकारी तत्काल संचालनालय को भेजी जाए। आदेश के पालन में लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर होगी और विद्यार्थियों को नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। लंबे समय से प्रशासनिक कार्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की स्कूलों में वापसी से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
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