कोरिया फॉर्च्यूनर कांड: समझौते के लिए बुलाकर भाजपा नेता समेत 3 लोगों को जिंदा जलाने का आरोप, भाई बोले- पहले से थी हमले की तैयारीछत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के नागोई गांव में 16 जून की रात हुई सनसनीखेज घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। भाजपा नेता भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह समेत तीन लोगों की फॉर्च्यूनर वाहन में जलकर मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतक के भाई राजेंद्र सिंह का आरोप है कि समझौते के बहाने उनके परिवार को गांव बुलाया गया और पहले से तैयार साजिश के तहत हमला कर घटना को अंजाम दिया गया।राजेंद्र सिंह के मुताबिक सिंह और त्रिपाठी परिवार के बीच पीढ़ियों पुराने पारिवारिक और धार्मिक संबंध थे। विवाद तब शुरू हुआ, जब चिरमी रेत खदान का वैध लाइसेंस उनके परिवार को मिला। आरोप है कि त्रिपाठी पक्ष बिना भुगतान के रेत उठाता था और दूसरे लोगों को भी पैसा नहीं देने के लिए उकसाता था। इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता गया।विवाद के बाद समझौते की पहल हुई और नागोई गांव में बैठक तय की गई। परिवार का आरोप है कि मौके पर पहले से जेसीबी, हाईवा और टिप्पर लगाकर रास्ता रोक दिया गया था। फॉर्च्यूनर वाहन को घेरकर उसके शीशे तोड़े गए और पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। इस हमले में भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह, नागेंद्र सिंह और विरेन्द्र सिंह की मौत हो गई, जबकि मयंक सिंह समेत दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं।पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना को हादसा साबित करने की कोशिश की गई। आरोप है कि वाहन को बिजली के खंभे की ओर धकेलकर ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे यह लगे कि आग बिजली के तार गिरने से लगी है। परिवार ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।पुलिस ने हत्या, आगजनी और साजिश समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी भी शामिल है। घटना के बाद नागोई गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार करोड़ों के रेत कारोबार और वर्चस्व की लड़ाई ने वर्षों पुराने रिश्तों को खूनी संघर्ष में बदल दिया।
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के नागोई गांव में 16 जून की रात हुई सनसनीखेज घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। भाजपा नेता भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह समेत तीन लोगों की फॉर्च्यूनर वाहन में जलकर मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतक के भाई राजेंद्र सिंह का आरोप है कि समझौते के बहाने उनके परिवार को गांव बुलाया गया और पहले से तैयार साजिश के तहत हमला कर घटना को अंजाम दिया गया।
राजेंद्र सिंह के मुताबिक सिंह और त्रिपाठी परिवार के बीच पीढ़ियों पुराने पारिवारिक और धार्मिक संबंध थे। विवाद तब शुरू हुआ, जब चिरमी रेत खदान का वैध लाइसेंस उनके परिवार को मिला। आरोप है कि त्रिपाठी पक्ष बिना भुगतान के रेत उठाता था और दूसरे लोगों को भी पैसा नहीं देने के लिए उकसाता था। इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता गया।
विवाद के बाद समझौते की पहल हुई और नागोई गांव में बैठक तय की गई। परिवार का आरोप है कि मौके पर पहले से जेसीबी, हाईवा और टिप्पर लगाकर रास्ता रोक दिया गया था। फॉर्च्यूनर वाहन को घेरकर उसके शीशे तोड़े गए और पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। इस हमले में भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह, नागेंद्र सिंह और विरेन्द्र सिंह की मौत हो गई, जबकि मयंक सिंह समेत दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना को हादसा साबित करने की कोशिश की गई। आरोप है कि वाहन को बिजली के खंभे की ओर धकेलकर ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे यह लगे कि आग बिजली के तार गिरने से लगी है। परिवार ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
पुलिस ने हत्या, आगजनी और साजिश समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी भी शामिल है। घटना के बाद नागोई गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार करोड़ों के रेत कारोबार और वर्चस्व की लड़ाई ने वर्षों पुराने रिश्तों को खूनी संघर्ष में बदल दिया।
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