बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल विकासखंड के ग्राम खर्वे में पिछले तीन महीनों के दौरान हुई 8 रहस्यमयी मौतों ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। लगातार हो रही मौतों के बाद गांव में तंत्र-मंत्र, गड़ा धन और नरबलि जैसी चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीणों की मांग पर पुलिस ने अब तक 7 शवों को कब्र से निकलवाकर पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है। पूरे मामले की जांच जारी है और सभी की निगाहें रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।जानकारी के अनुसार, गांव में मौतों का सिलसिला 6 फरवरी 2026 को बद्री पटेल की मौत से शुरू हुआ। इसके बाद 20 फरवरी को बुढालू साहू, 12 मार्च को बुधराम जायसवाल, 20 मार्च को छत्तूराम साहू, 31 मार्च को विनोद साहू, 28 अप्रैल को गजानंद मांझी, 29 अप्रैल को चैतूराम साहू और 14 मई को महेतरू साहू की मौत हो गई। महज तीन महीनों के भीतर एक ही गांव में 8 लोगों की मौत से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया।ग्रामीणों का कहना है कि जब लगातार चार लोगों की मौत हुई तो गांव में देवी-देवताओं के नाराज होने की आशंका जताई गई। इसके बाद पूरे गांव ने मिलकर शांति पूजा का आयोजन कराया। पूजा में तीन बकरों, एक सुअर और कई मुर्गों की बलि दी गई। हालांकि इसके बाद भी मौतों का सिलसिला नहीं रुका। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शांति पूजा कराने वाले बैगा गजानंद मांझी की भी बाद में मौत हो गई।गांव के कई लोगों ने दावा किया है कि इन मौतों के पीछे गड़ा धन और 21 नरबलि की तैयारी जैसी बातें चर्चा में थीं। हालांकि इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि जिन लोगों की मौत हुई, उनमें से कई को अलग-अलग समय पर शराब पिलाई गई थी। आरोपों के केंद्र में रामसहाय जायसवाल का नाम सामने आया है।ग्रामीणों के अनुसार, कई मृतकों और बीमार हुए लोगों ने शराब पीने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने की शिकायत की थी। कार्तिक कुम्हार नामक युवक, जो संदिग्ध परिस्थितियों में बीमार होने के बावजूद बच गया था, उसके बयान के बाद ग्रामीणों का संदेह और गहरा गया। कार्तिक ने बताया कि शराब पीते ही उसे उसका स्वाद असामान्य रूप से कड़वा लगा, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई थी।वहीं रामसहाय जायसवाल के बेटे रुद्रेश्वर का कहना है कि उनके पिता ने किसी भी तरह के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस उनका बयान दर्ज कर चुकी है और मोबाइल भी जब्त किया गया है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, वही स्वीकार किए जाएंगे।क्योंकि गांव के अधिकांश लोग कबीर पंथ को मानते हैं, इसलिए मृतकों का दाह संस्कार नहीं बल्कि दफन संस्कार किया गया था। पुलिस ने जांच के लिए कब्र से शव निकलवाकर पोस्टमॉर्टम कराया है। कसडोल एसडीओपी के.के. वासनिक ने बताया कि सभी नमूनों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।फिलहाल पूरा गांव पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिससे इन रहस्यमयी मौतों के पीछे का सच सामने आ सके।
बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल विकासखंड के ग्राम खर्वे में पिछले तीन महीनों के दौरान हुई 8 रहस्यमयी मौतों ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। लगातार हो रही मौतों के बाद गांव में तंत्र-मंत्र, गड़ा धन और नरबलि जैसी चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीणों की मांग पर पुलिस ने अब तक 7 शवों को कब्र से निकलवाकर पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है। पूरे मामले की जांच जारी है और सभी की निगाहें रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
जानकारी के अनुसार, गांव में मौतों का सिलसिला 6 फरवरी 2026 को बद्री पटेल की मौत से शुरू हुआ। इसके बाद 20 फरवरी को बुढालू साहू, 12 मार्च को बुधराम जायसवाल, 20 मार्च को छत्तूराम साहू, 31 मार्च को विनोद साहू, 28 अप्रैल को गजानंद मांझी, 29 अप्रैल को चैतूराम साहू और 14 मई को महेतरू साहू की मौत हो गई। महज तीन महीनों के भीतर एक ही गांव में 8 लोगों की मौत से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया।
ग्रामीणों का कहना है कि जब लगातार चार लोगों की मौत हुई तो गांव में देवी-देवताओं के नाराज होने की आशंका जताई गई। इसके बाद पूरे गांव ने मिलकर शांति पूजा का आयोजन कराया। पूजा में तीन बकरों, एक सुअर और कई मुर्गों की बलि दी गई। हालांकि इसके बाद भी मौतों का सिलसिला नहीं रुका। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शांति पूजा कराने वाले बैगा गजानंद मांझी की भी बाद में मौत हो गई।
गांव के कई लोगों ने दावा किया है कि इन मौतों के पीछे गड़ा धन और 21 नरबलि की तैयारी जैसी बातें चर्चा में थीं। हालांकि इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि जिन लोगों की मौत हुई, उनमें से कई को अलग-अलग समय पर शराब पिलाई गई थी। आरोपों के केंद्र में रामसहाय जायसवाल का नाम सामने आया है।
ग्रामीणों के अनुसार, कई मृतकों और बीमार हुए लोगों ने शराब पीने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने की शिकायत की थी। कार्तिक कुम्हार नामक युवक, जो संदिग्ध परिस्थितियों में बीमार होने के बावजूद बच गया था, उसके बयान के बाद ग्रामीणों का संदेह और गहरा गया। कार्तिक ने बताया कि शराब पीते ही उसे उसका स्वाद असामान्य रूप से कड़वा लगा, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई थी।
वहीं रामसहाय जायसवाल के बेटे रुद्रेश्वर का कहना है कि उनके पिता ने किसी भी तरह के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस उनका बयान दर्ज कर चुकी है और मोबाइल भी जब्त किया गया है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, वही स्वीकार किए जाएंगे।
क्योंकि गांव के अधिकांश लोग कबीर पंथ को मानते हैं, इसलिए मृतकों का दाह संस्कार नहीं बल्कि दफन संस्कार किया गया था। पुलिस ने जांच के लिए कब्र से शव निकलवाकर पोस्टमॉर्टम कराया है। कसडोल एसडीओपी के.के. वासनिक ने बताया कि सभी नमूनों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल पूरा गांव पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिससे इन रहस्यमयी मौतों के पीछे का सच सामने आ सके।
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