दुर्ग जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उतई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी से जुड़े म्यूल अकाउंट नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो अपने बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से आए पैसों के लेन-देन के लिए दूसरों को करने देते थे। आरोपियों के खातों में लाखों रुपए का संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आया है।पुलिस को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से इनपुट प्राप्त हुआ था। इसके बाद उतई क्षेत्र में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के कुछ खातों की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान कई ऐसे बैंक खाते सामने आए, जिनमें बड़ी मात्रा में संदिग्ध रकम जमा की गई थी। पुलिस के अनुसार इन खातों में जमा रकम साइबर ठगी से संबंधित थी, जिसे बाद में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था या नकद निकाल लिया जाता था।जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों के माध्यम से लगातार संदिग्ध लेन-देन किया गया। पुलिस ने इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में चिह्नित किया। बैंक रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज और ट्रांजेक्शन डिटेल्स की जांच के बाद छह खाताधारकों की पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और सिम कार्ड दूसरे लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दिए थे। इसके बदले उन्हें आर्थिक लाभ मिलता था। इन्हीं खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।गिरफ्तार आरोपियों में भूपेन्द्र हिरवानी (23), नवलेश्वर पाटले (35), पवन सिंह (32), आकाश चंद्राकर (37), अर्पण शुक्ला (23) और मुकेश सिंह (23) निवासी सेक्टर-7 भिलाई शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं।गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया। पुलिस ने इस मामले में कुल 30 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है और उनसे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है।
दुर्ग जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उतई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी से जुड़े म्यूल अकाउंट नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो अपने बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से आए पैसों के लेन-देन के लिए दूसरों को करने देते थे। आरोपियों के खातों में लाखों रुपए का संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आया है।
पुलिस को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से इनपुट प्राप्त हुआ था। इसके बाद उतई क्षेत्र में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के कुछ खातों की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान कई ऐसे बैंक खाते सामने आए, जिनमें बड़ी मात्रा में संदिग्ध रकम जमा की गई थी। पुलिस के अनुसार इन खातों में जमा रकम साइबर ठगी से संबंधित थी, जिसे बाद में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था या नकद निकाल लिया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों के माध्यम से लगातार संदिग्ध लेन-देन किया गया। पुलिस ने इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में चिह्नित किया। बैंक रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज और ट्रांजेक्शन डिटेल्स की जांच के बाद छह खाताधारकों की पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और सिम कार्ड दूसरे लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दिए थे। इसके बदले उन्हें आर्थिक लाभ मिलता था। इन्हीं खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों में भूपेन्द्र हिरवानी (23), नवलेश्वर पाटले (35), पवन सिंह (32), आकाश चंद्राकर (37), अर्पण शुक्ला (23) और मुकेश सिंह (23) निवासी सेक्टर-7 भिलाई शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं।
गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया। पुलिस ने इस मामले में कुल 30 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है और उनसे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है।
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