क्या आपने कभी लाल, नीले, बैंगनी और गुलाबी रंग के मक्के देखे हैं? बिहार के पटना जिले के मसौढ़ी क्षेत्र के किसानों ने खेती में एक ऐसा प्रयोग किया है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां के किसानों ने सफेद, पीली, हल्की लाल और गहरे लाल रंग की विभिन्न किस्मों के बीजों को मिलाकर क्रॉस-पोलिनेशन किया, जिसके परिणामस्वरूप मल्टी कलर मक्का की एक अनोखी फसल तैयार हुई है।पटना के मसौढ़ी के राजा बीघा गांव के किसान मनोज कुमार ने 6 बीघा जमीन में मल्टी कलर मक्का की खेती की है। यह फसल देखने में जितनी आकर्षक है, बाजार में इसकी कीमत भी उतनी ही अधिक है। सामान्य पीले मक्के की तुलना में रंगीन मक्का प्रीमियम कीमत पर बिक रही है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिल रहा है।कृषि विशेषज्ञ नवीन कुमार सिंह के अनुसार, मक्का में फेनोलिक और एंथोसायनिन तत्व पाए जाते हैं। इन्हीं तत्वों की वजह से मक्का लाल, नीले, बैंगनी और मैजेंटा रंग की दिखाई देती है। यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है और स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है।कृषि वैज्ञानिक मृणाल पांडे का कहना है कि रंगीन मक्का में मौजूद एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड जैसे पोषक तत्व शरीर के लिए लाभदायक होते हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि मंडियों में इसकी कीमत सामान्य मक्का की तुलना में ज्यादा मिल रही है।मनोज कुमार के अनुसार, एक हेक्टेयर में 30 से 35 क्विंटल तक उत्पादन होता है। बाजार में इसकी कीमत 3 से 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रही है। ऐसे में किसान एक हेक्टेयर से सवा लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।मल्टी कलर मक्का केवल खाने के लिए ही नहीं बल्कि पशु आहार, पोल्ट्री फीड और स्टार्च उद्योग में भी उपयोगी है। फसल कटने के बाद इसके डंठल और पत्तियां पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का काम करती हैं।मसौढ़ी कृषि समन्वयक विजय कुमार के अनुसार, इसकी खेती के लिए खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करनी चाहिए। एक एकड़ में लगभग 22 हजार बीज लगाए जाते हैं। बेहतर उत्पादन के लिए गोबर खाद, नाइट्रोजन और जिंक सल्फेट का प्रयोग करना जरूरी है। समय-समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण से अच्छी पैदावार मिलती है।बदलते बाजार और हेल्दी फूड की बढ़ती मांग के बीच रंगीन मक्का किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में मल्टी कलर मक्का की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफे का बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।अगर आपको यह वीडियो पसंद आए तो लाइक, शेयर और चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें।
क्या आपने कभी लाल, नीले, बैंगनी और गुलाबी रंग के मक्के देखे हैं? बिहार के पटना जिले के मसौढ़ी क्षेत्र के किसानों ने खेती में एक ऐसा प्रयोग किया है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां के किसानों ने सफेद, पीली, हल्की लाल और गहरे लाल रंग की विभिन्न किस्मों के बीजों को मिलाकर क्रॉस-पोलिनेशन किया, जिसके परिणामस्वरूप मल्टी कलर मक्का की एक अनोखी फसल तैयार हुई है।
पटना के मसौढ़ी के राजा बीघा गांव के किसान मनोज कुमार ने 6 बीघा जमीन में मल्टी कलर मक्का की खेती की है। यह फसल देखने में जितनी आकर्षक है, बाजार में इसकी कीमत भी उतनी ही अधिक है। सामान्य पीले मक्के की तुलना में रंगीन मक्का प्रीमियम कीमत पर बिक रही है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिल रहा है।
कृषि विशेषज्ञ नवीन कुमार सिंह के अनुसार, मक्का में फेनोलिक और एंथोसायनिन तत्व पाए जाते हैं। इन्हीं तत्वों की वजह से मक्का लाल, नीले, बैंगनी और मैजेंटा रंग की दिखाई देती है। यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है और स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है।
कृषि वैज्ञानिक मृणाल पांडे का कहना है कि रंगीन मक्का में मौजूद एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड जैसे पोषक तत्व शरीर के लिए लाभदायक होते हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि मंडियों में इसकी कीमत सामान्य मक्का की तुलना में ज्यादा मिल रही है।
मनोज कुमार के अनुसार, एक हेक्टेयर में 30 से 35 क्विंटल तक उत्पादन होता है। बाजार में इसकी कीमत 3 से 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रही है। ऐसे में किसान एक हेक्टेयर से सवा लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।
मल्टी कलर मक्का केवल खाने के लिए ही नहीं बल्कि पशु आहार, पोल्ट्री फीड और स्टार्च उद्योग में भी उपयोगी है। फसल कटने के बाद इसके डंठल और पत्तियां पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का काम करती हैं।
मसौढ़ी कृषि समन्वयक विजय कुमार के अनुसार, इसकी खेती के लिए खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करनी चाहिए। एक एकड़ में लगभग 22 हजार बीज लगाए जाते हैं। बेहतर उत्पादन के लिए गोबर खाद, नाइट्रोजन और जिंक सल्फेट का प्रयोग करना जरूरी है। समय-समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण से अच्छी पैदावार मिलती है।
बदलते बाजार और हेल्दी फूड की बढ़ती मांग के बीच रंगीन मक्का किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में मल्टी कलर मक्का की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफे का बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।
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