दुर्ग जिले में डिजिटल और ऑनलाइन पेमेंट के बढ़ते चलन का असर अब स्थानीय बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। फुटकर सब्जी विक्रेताओं और छोटे व्यापारियों को छोटे नोट और सिक्कों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर व्यापारियों ने जनदर्शन में कलेक्टर से शिकायत दर्ज कराई है और चिल्लर नोट उपलब्ध कराने की मांग की है।थोक फल एवं सब्जी मंडी दुर्ग के कार्यकारी अध्यक्ष नासिर खोखर के नेतृत्व में व्यापारियों ने बताया कि बैंक उन्हें पर्याप्त मात्रा में छोटे नोट और सिक्के उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। बाजार में बड़ी संख्या में ग्राहक अब भी नकद भुगतान करते हैं और कई बार बड़े नोट देकर खरीदारी करते हैं। ऐसे में चिल्लर नहीं होने से व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।व्यापारियों का कहना है कि चैंबर को तो बैंक से चिल्लर मिल जाती है, लेकिन छोटे विक्रेताओं तक यह सुविधा नहीं पहुंच पाती। उन्होंने मांग की है कि बैंकों के माध्यम से हर महीने फुटकर व्यापारियों को छोटे नोट और सिक्के उपलब्ध कराए जाएं ताकि बाजार में लेनदेन सुचारू रूप से चलता रहे।डिजिटल इंडिया के दौर में जहां ऑनलाइन भुगतान बढ़ रहा है, वहीं नकद लेनदेन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में छोटे व्यापारियों की यह समस्या प्रशासन और बैंकिंग व्यवस्था के सामने एक नई चुनौती बनकर उभरी है।
दुर्ग जिले में डिजिटल और ऑनलाइन पेमेंट के बढ़ते चलन का असर अब स्थानीय बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। फुटकर सब्जी विक्रेताओं और छोटे व्यापारियों को छोटे नोट और सिक्कों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर व्यापारियों ने जनदर्शन में कलेक्टर से शिकायत दर्ज कराई है और चिल्लर नोट उपलब्ध कराने की मांग की है।
थोक फल एवं सब्जी मंडी दुर्ग के कार्यकारी अध्यक्ष नासिर खोखर के नेतृत्व में व्यापारियों ने बताया कि बैंक उन्हें पर्याप्त मात्रा में छोटे नोट और सिक्के उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। बाजार में बड़ी संख्या में ग्राहक अब भी नकद भुगतान करते हैं और कई बार बड़े नोट देकर खरीदारी करते हैं। ऐसे में चिल्लर नहीं होने से व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
व्यापारियों का कहना है कि चैंबर को तो बैंक से चिल्लर मिल जाती है, लेकिन छोटे विक्रेताओं तक यह सुविधा नहीं पहुंच पाती। उन्होंने मांग की है कि बैंकों के माध्यम से हर महीने फुटकर व्यापारियों को छोटे नोट और सिक्के उपलब्ध कराए जाएं ताकि बाजार में लेनदेन सुचारू रूप से चलता रहे।
डिजिटल इंडिया के दौर में जहां ऑनलाइन भुगतान बढ़ रहा है, वहीं नकद लेनदेन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में छोटे व्यापारियों की यह समस्या प्रशासन और बैंकिंग व्यवस्था के सामने एक नई चुनौती बनकर उभरी है।
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