दुर्ग जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीदी केंद्रों में बड़े पैमाने पर धान की कमी सामने आने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जिले के विभिन्न धान उपार्जन केंद्रों के भौतिक सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर पाया गया है। प्रारंभिक जांच में 27 हजार 900 क्विंटल से अधिक धान की कमी दर्ज की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ढाई करोड़ रुपए बताई जा रही है।मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने संबंधित समितियों और केंद्र प्रभारियों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में चार दिनों के भीतर धान अथवा उसकी कीमत जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।जांच रिपोर्ट के अनुसार जिले के 61 से अधिक धान उपार्जन केंद्रों में धान की कमी सामने आई है। सबसे ज्यादा 4,646 क्विंटल धान की कमी धमधा समिति में दर्ज की गई है। इसके अलावा करेली, बरहापुर, डीडाभाठा और केसरा समितियों में भी बड़ी मात्रा में धान कम पाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक खरीदी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है, लेकिन धान के उठाव, परिवहन, भंडारण और रिकॉर्ड मिलान के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।इस मामले में धमधा और जामगांव आर समिति के प्रभारियों के खिलाफ पहले ही आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। धमधा समिति प्रभारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, जबकि जामगांव आर समिति प्रभारी की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। वहीं ननकट्टी समिति द्वारा कमी की राशि जमा करा दी गई है।जिला सहकारिता बैंक के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर धान शॉर्टेज किया है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कर्मचारी निर्दोष हैं तो वे एफआईआर के डर से लाखों रुपए जमा क्यों कर रहे हैं।धान शॉर्टेज का यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर लगातार जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
दुर्ग जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीदी केंद्रों में बड़े पैमाने पर धान की कमी सामने आने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जिले के विभिन्न धान उपार्जन केंद्रों के भौतिक सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर पाया गया है। प्रारंभिक जांच में 27 हजार 900 क्विंटल से अधिक धान की कमी दर्ज की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ढाई करोड़ रुपए बताई जा रही है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने संबंधित समितियों और केंद्र प्रभारियों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में चार दिनों के भीतर धान अथवा उसकी कीमत जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
जांच रिपोर्ट के अनुसार जिले के 61 से अधिक धान उपार्जन केंद्रों में धान की कमी सामने आई है। सबसे ज्यादा 4,646 क्विंटल धान की कमी धमधा समिति में दर्ज की गई है। इसके अलावा करेली, बरहापुर, डीडाभाठा और केसरा समितियों में भी बड़ी मात्रा में धान कम पाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक खरीदी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है, लेकिन धान के उठाव, परिवहन, भंडारण और रिकॉर्ड मिलान के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
इस मामले में धमधा और जामगांव आर समिति के प्रभारियों के खिलाफ पहले ही आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। धमधा समिति प्रभारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, जबकि जामगांव आर समिति प्रभारी की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। वहीं ननकट्टी समिति द्वारा कमी की राशि जमा करा दी गई है।
जिला सहकारिता बैंक के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर धान शॉर्टेज किया है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कर्मचारी निर्दोष हैं तो वे एफआईआर के डर से लाखों रुपए जमा क्यों कर रहे हैं।
धान शॉर्टेज का यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर लगातार जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
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