भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में 250 टन से अधिक लोहा चोरी के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि इस पूरे काले कारोबार को अंजाम देने के लिए एक संगठित सिंडिकेट लंबे समय से सक्रिय था। चोरी को अंजाम देने के लिए बाकायदा ट्रकों, मशीनों और कर्मचारियों का नेटवर्क तैयार किया गया था।जानकारी के अनुसार गिरोह के सरगना संजय सिंह और उसके सहयोगियों को ईएसपी डस्ट और फ्लू डस्ट उठाने का ठेका मिला हुआ था। इसी ठेके की आड़ में प्लांट से लोहे की चोरी की जाती थी। पुलिस के मुताबिक प्रतिदिन लगभग 20 ट्रकों में से 3 ट्रकों के जरिए चोरी का लोहा प्लांट से बाहर निकाला जाता था।जांच में सामने आया है कि ट्रांसपोर्टर के कर्मचारी नियमित रूप से प्लांट के अंदर रैकी करते थे। वे उन स्थानों की पहचान करते थे जहां बड़ी मात्रा में लोहा पड़ा रहता था। बाद में तय समय पर जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से उसे ट्रकों में लोड किया जाता था।सबसे चौंकाने वाला खुलासा नंबर प्लेट और GPS बदलने को लेकर हुआ है। पुलिस के अनुसार एक ट्रक डस्ट लोड करने के लिए प्लांट में प्रवेश करता था। वजन होने के बाद उसके GPS और नंबर प्लेट को निकाल लिया जाता था। इसके बाद उसी पहचान का उपयोग दूसरे ट्रक पर किया जाता था, जिसमें चोरी का लोहा लोड रहता था। लोहे को छिपाने के लिए उसके ऊपर फ्लाई ऐश और डस्ट की मोटी परत बिछाई जाती थी ताकि किसी को शक न हो।गिरोह ने एक ही रंग के कई ट्रकों का इस्तेमाल किया था। इससे सीसीटीवी कैमरों में एक जैसी गाड़ियों की तस्वीर रिकॉर्ड होती थी और पहचान करना मुश्किल हो जाता था। प्लांट से बाहर निकलने के बाद चोरी का लोहा गोदामों में उतारा जाता था और फिर दूसरे वाहनों के जरिए विभिन्न उद्योगों तक पहुंचाया जाता था।पुलिस का कहना है कि पूरे मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा चोरी का लोहा किन उद्योगों तक पहुंचाया गया।250 टन लोहा चोरी का यह मामला भिलाई स्टील प्लांट के इतिहास के सबसे बड़े चोरी कांडों में से एक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में 250 टन से अधिक लोहा चोरी के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि इस पूरे काले कारोबार को अंजाम देने के लिए एक संगठित सिंडिकेट लंबे समय से सक्रिय था। चोरी को अंजाम देने के लिए बाकायदा ट्रकों, मशीनों और कर्मचारियों का नेटवर्क तैयार किया गया था।
जानकारी के अनुसार गिरोह के सरगना संजय सिंह और उसके सहयोगियों को ईएसपी डस्ट और फ्लू डस्ट उठाने का ठेका मिला हुआ था। इसी ठेके की आड़ में प्लांट से लोहे की चोरी की जाती थी। पुलिस के मुताबिक प्रतिदिन लगभग 20 ट्रकों में से 3 ट्रकों के जरिए चोरी का लोहा प्लांट से बाहर निकाला जाता था।
जांच में सामने आया है कि ट्रांसपोर्टर के कर्मचारी नियमित रूप से प्लांट के अंदर रैकी करते थे। वे उन स्थानों की पहचान करते थे जहां बड़ी मात्रा में लोहा पड़ा रहता था। बाद में तय समय पर जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से उसे ट्रकों में लोड किया जाता था।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा नंबर प्लेट और GPS बदलने को लेकर हुआ है। पुलिस के अनुसार एक ट्रक डस्ट लोड करने के लिए प्लांट में प्रवेश करता था। वजन होने के बाद उसके GPS और नंबर प्लेट को निकाल लिया जाता था। इसके बाद उसी पहचान का उपयोग दूसरे ट्रक पर किया जाता था, जिसमें चोरी का लोहा लोड रहता था। लोहे को छिपाने के लिए उसके ऊपर फ्लाई ऐश और डस्ट की मोटी परत बिछाई जाती थी ताकि किसी को शक न हो।
गिरोह ने एक ही रंग के कई ट्रकों का इस्तेमाल किया था। इससे सीसीटीवी कैमरों में एक जैसी गाड़ियों की तस्वीर रिकॉर्ड होती थी और पहचान करना मुश्किल हो जाता था। प्लांट से बाहर निकलने के बाद चोरी का लोहा गोदामों में उतारा जाता था और फिर दूसरे वाहनों के जरिए विभिन्न उद्योगों तक पहुंचाया जाता था।
पुलिस का कहना है कि पूरे मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा चोरी का लोहा किन उद्योगों तक पहुंचाया गया।
250 टन लोहा चोरी का यह मामला भिलाई स्टील प्लांट के इतिहास के सबसे बड़े चोरी कांडों में से एक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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