छत्तीसगढ़ के गांधी कहे जाने वाले पंडित सुंदरलाल शर्मा केवल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ही नहीं, बल्कि एक महान साहित्यकार और समाज सुधारक भी थे। अंग्रेजी शासन काल में रायपुर जेल में रहते हुए उन्होंने “श्री कृष्ण जन्म स्थान समाचार पत्र” नामक हस्तलिखित द्विमासिक पत्रिका निकाली थी। इस पत्रिका के कुल 6 अंक प्रकाशित हुए थे, जिनमें से छठवां अंक आज भी इतिहासकार डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र के पास सुरक्षित है।इतिहासकारों के अनुसार पंडित सुंदरलाल शर्मा ने जेल के बैरक को “आश्रम” का नाम दिया था। उन्होंने पत्रिका का नाम “श्री कृष्ण जन्म स्थान” इसलिए रखा क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी जेल में हुआ था। इस पत्रिका में साहित्य, राजनीति, राष्ट्रीय आंदोलन, जेल जीवन और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े समसामयिक विषयों पर लेख लिखे जाते थे।13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने पंडित सुंदरलाल शर्मा को अंदर तक झकझोर दिया था। जेल में रहते हुए उन्होंने इस घटना को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया। बताया जाता है कि उन्होंने अंग्रेज जेलर और अधीक्षक को शाम के समय बैरक में न आने की चेतावनी दी थी। बावजूद इसके जब अधिकारी वहां पहुंचे तो किसी भी क्रांतिकारी ने उनका अभिवादन नहीं किया। बाद में सभी स्वतंत्रता सेनानियों ने खिचड़ी खाकर जलियांवाला बाग कांड पर शोक व्यक्त किया।पंडित सुंदरलाल शर्मा ने छत्तीसगढ़ में सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक कार्य किए। उन्होंने छुआछूत के खिलाफ अभियान चलाया और समाज में समानता का संदेश दिया। उनके आंदोलन और सामाजिक कार्यों के कारण लोग उन्हें “छत्तीसगढ़ का गांधी” कहने लगे।सन 1919 के कंडेल नहर सत्याग्रह आंदोलन के दौरान पंडित सुंदरलाल शर्मा ने महात्मा गांधी को छत्तीसगढ़ आने का निमंत्रण दिया था। इसके बाद गांधी जी का छत्तीसगढ़ आगमन हुआ और यहां राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा मिली।आज भी पंडित सुंदरलाल शर्मा का नाम छत्तीसगढ़ के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उनके नाम पर विश्वविद्यालय, पुस्तकालय और शोधपीठ स्थापित किए गए हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश, समाज और संस्कृति के लिए समर्पित कर दिया।
छत्तीसगढ़ के गांधी कहे जाने वाले पंडित सुंदरलाल शर्मा केवल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ही नहीं, बल्कि एक महान साहित्यकार और समाज सुधारक भी थे। अंग्रेजी शासन काल में रायपुर जेल में रहते हुए उन्होंने “श्री कृष्ण जन्म स्थान समाचार पत्र” नामक हस्तलिखित द्विमासिक पत्रिका निकाली थी। इस पत्रिका के कुल 6 अंक प्रकाशित हुए थे, जिनमें से छठवां अंक आज भी इतिहासकार डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र के पास सुरक्षित है।
इतिहासकारों के अनुसार पंडित सुंदरलाल शर्मा ने जेल के बैरक को “आश्रम” का नाम दिया था। उन्होंने पत्रिका का नाम “श्री कृष्ण जन्म स्थान” इसलिए रखा क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी जेल में हुआ था। इस पत्रिका में साहित्य, राजनीति, राष्ट्रीय आंदोलन, जेल जीवन और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े समसामयिक विषयों पर लेख लिखे जाते थे।
13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने पंडित सुंदरलाल शर्मा को अंदर तक झकझोर दिया था। जेल में रहते हुए उन्होंने इस घटना को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया। बताया जाता है कि उन्होंने अंग्रेज जेलर और अधीक्षक को शाम के समय बैरक में न आने की चेतावनी दी थी। बावजूद इसके जब अधिकारी वहां पहुंचे तो किसी भी क्रांतिकारी ने उनका अभिवादन नहीं किया। बाद में सभी स्वतंत्रता सेनानियों ने खिचड़ी खाकर जलियांवाला बाग कांड पर शोक व्यक्त किया।
पंडित सुंदरलाल शर्मा ने छत्तीसगढ़ में सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक कार्य किए। उन्होंने छुआछूत के खिलाफ अभियान चलाया और समाज में समानता का संदेश दिया। उनके आंदोलन और सामाजिक कार्यों के कारण लोग उन्हें “छत्तीसगढ़ का गांधी” कहने लगे।
सन 1919 के कंडेल नहर सत्याग्रह आंदोलन के दौरान पंडित सुंदरलाल शर्मा ने महात्मा गांधी को छत्तीसगढ़ आने का निमंत्रण दिया था। इसके बाद गांधी जी का छत्तीसगढ़ आगमन हुआ और यहां राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा मिली।
आज भी पंडित सुंदरलाल शर्मा का नाम छत्तीसगढ़ के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उनके नाम पर विश्वविद्यालय, पुस्तकालय और शोधपीठ स्थापित किए गए हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश, समाज और संस्कृति के लिए समर्पित कर दिया।
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