रेत के लिए उजाड़ दिया श्मशान: 10 कंकाल मिलने के बाद भी नहीं रुका खनन, ग्रामीण बोले- अब मौत के बाद भी नहीं मिलेगा चैन

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के खरेंगा गांव में अवैध रेत खनन ने इंसानियत की सारी हदें पार कर दी हैं। महानदी किनारे स्थित गांव के श्मशान घाट को रेत माफियाओं ने इस तरह खोद डाला कि वहां दफनाए गए लोगों के कंकाल तक बाहर आ गए। गुरुवार को अवैध खनन के दौरान करीब 10 मानव कंकाल बाहर निकलने के बाद पूरे गांव में आक्रोश फैल गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उसी रात फिर से रेत की खुदाई शुरू हो गई।

गांव के लोग अब अपने दफनाए गए परिजनों की जगह तलाश रहे हैं। प्रशासन ने सभी कंकालों को दोबारा दफना तो दिया, लेकिन किसी को यह नहीं पता कि किसका कंकाल कहां दफनाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें मौत से ज्यादा डर इस बात का लगने लगा है कि मरने के बाद उनकी कब्र भी सुरक्षित नहीं रहेगी।

श्मशान घाट पहुंचने पर दूर-दूर तक रेत के ऊंचे ढेर और गहरे गड्ढे दिखाई देते हैं। कई गड्ढे इतने बड़े हैं कि उनमें ट्रैक्टर आसानी से उतर सकता है। इन्हीं गड्ढों के बीच गांव के लोग वर्षों से अपने परिजनों को दफनाते आए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक मनरेगा कार्य के दौरान सबसे पहले कुछ लोगों ने जमीन से बाहर निकली हड्डियां देखीं। शुरुआत में लगा कि यह जानवरों के अवशेष होंगे, लेकिन पास जाकर देखने पर मामला बेहद गंभीर निकला।

श्मशान के पास बैठीं बुजुर्ग देवला बाई साहू की आंखों में गुस्सा और दर्द साफ दिखाई देता है। वे कहती हैं, “हमने अपने बुजुर्गों को पूरे सम्मान के साथ यहां दफनाया था, लेकिन रेत के लालच में उनकी कब्रें तक खोद दी गईं। अब तो मरने से भी डर लगता है।”

गांव की पंच लोकेश्वरी साहू ने बताया कि उनकी सास का निधन इसी साल मार्च में हुआ था। जब वे मौके पर पहुंचीं तो एक कंकाल के पास पीली साड़ी का कपड़ा दिखाई दिया। उसी कपड़े से उन्होंने अपनी सास के शव की पहचान की। यह दृश्य देखकर पूरा परिवार फूट-फूटकर रो पड़ा।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से अवैध खनन चल रहा है और इसकी जानकारी प्रशासन व नेताओं को भी है। कई बार शिकायतें की गईं, पंचायत में बैठकें हुईं और मुनादी तक कराई गई, लेकिन खनन नहीं रुका। यहां तक कि सूचना देने वाले को 2 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा भी की गई थी।

ग्राम व्यवस्था समिति के सचिव तामेश्वर साहू का कहना है कि रेत माफिया गांव के ही युवाओं को मजदूरी पर लगाते हैं और उन्हीं से ट्रैक्टर चलवाते हैं। इससे गांव वाले खुलकर विरोध भी नहीं कर पाते। कई ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट के रात में रेत परिवहन करते हैं।

ग्राम समिति के प्रमुख सुहास साहू ने बताया कि महानदी का करीब 50 से 60 एकड़ क्षेत्र गांव के पास है, लेकिन सिर्फ 5 एकड़ जमीन श्मशान के लिए सुरक्षित है। इसके बावजूद खनन उसी जगह किया गया जहां लोगों के पूर्वज दफन हैं। उनका कहना है कि बिना संरक्षण के यह संभव नहीं है।

मामले में धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि 5 ट्रैक्टर जब्त किए गए हैं और संबंधित माइनिंग इंस्पेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिस स्थान पर रेत भंडारण की अनुमति दी गई थी, उसे भी निरस्त कर दिया गया है। प्रशासन ने दोबारा सीमांकन और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

हालांकि गांव वालों का दर्द सिर्फ इतना नहीं है कि श्मशान खोद दिया गया। सबसे बड़ा दुख यह है कि अब वे अपने माता-पिता, दादा-दादी और रिश्तेदारों की कब्रों की पहचान तक नहीं कर पा रहे हैं। महानदी किनारे खड़े एक ग्रामीण ने कहा, “रेत तो फिर आ जाएगी, लेकिन जिन लोगों की याद में हम यहां आते थे, उनकी जगह अब कैसे पहचानेंगे?”

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