दुर्ग जिले में साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग को गैस एजेंसी का फर्जी कस्टमर केयर नंबर देकर करीब 1.95 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी का शिकार बना लिया। ठगों ने इंटरनेट पर फर्जी नंबर डालकर खुद को गैस एजेंसी का कर्मचारी बताया और छोटी रकम ट्रांसफर करवाकर बैंक खाते तक पहुंच बना ली। मामले में नेवई थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।भिलाई नगर सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी के मुताबिक, अवधपुरी रिसाली भिलाई निवासी 65 वर्षीय किशोर कुमार साहू ने 23 मई 2026 को गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं होने पर इंटरनेट पर सेक्टर-10 स्थित जयदीप गैस एजेंसी का कस्टमर केयर नंबर सर्च किया था। सर्च के दौरान उन्हें एक मोबाइल नंबर मिला, जिसे उन्होंने एजेंसी का आधिकारिक नंबर समझकर कॉल कर दिया।फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को गैस एजेंसी का कर्मचारी बताया और समस्या समाधान का भरोसा दिलाया। इसके बाद आरोपी ने पीड़ित को एक व्हाट्सएप नंबर दिया और कहा कि गैस सेवा एक्टिवेशन के लिए 10 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करने होंगे।बुजुर्ग ने भरोसे में आकर फोन-पे के जरिए 10 रुपए भेज दिए। पुलिस के अनुसार, इसी छोटे ट्रांजेक्शन के जरिए साइबर ठगों ने बैंकिंग एक्सेस हासिल कर लिया। करीब आधे घंटे बाद पीड़ित के एसबीआई खाते से 97 हजार रुपए निकाल लिए गए।इसके बाद 26 मई को उनके यूको बैंक खाते से भी 98 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर लिए गए। इस तरह कुल 1 लाख 95 हजार रुपए की ठगी हो गई। खाते से रकम कटने के मैसेज आने के बाद पीड़ित ने तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। बाद में नेवई थाना पहुंचकर लिखित आवेदन भी दिया गया।पुलिस को शिकायत के साथ बैंक खाते की जानकारी, ट्रांजेक्शन डिटेल और साइबर हेल्पलाइन शिकायत की कॉपी भी सौंपी गई है। प्रारंभिक जांच के बाद मोबाइल नंबर धारकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी ने बताया कि साइबर ठग अब गूगल सर्च में फर्जी कस्टमर केयर नंबर डालकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। लोग जब गैस एजेंसी, बैंक, बिजली कंपनी या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का नंबर इंटरनेट पर खोजते हैं, तब ठग खुद को अधिकारी या कर्मचारी बताकर बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं।पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप से ही प्राप्त करें। किसी अनजान नंबर पर कॉल करने, लिंक ओपन करने या छोटी राशि ट्रांसफर करने से पहले पूरी तरह जांच जरूर करें।फिलहाल पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर सेल की मदद से तकनीकी जांच भी शुरू कर दी गई है।
दुर्ग जिले में साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग को गैस एजेंसी का फर्जी कस्टमर केयर नंबर देकर करीब 1.95 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी का शिकार बना लिया। ठगों ने इंटरनेट पर फर्जी नंबर डालकर खुद को गैस एजेंसी का कर्मचारी बताया और छोटी रकम ट्रांसफर करवाकर बैंक खाते तक पहुंच बना ली। मामले में नेवई थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भिलाई नगर सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी के मुताबिक, अवधपुरी रिसाली भिलाई निवासी 65 वर्षीय किशोर कुमार साहू ने 23 मई 2026 को गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं होने पर इंटरनेट पर सेक्टर-10 स्थित जयदीप गैस एजेंसी का कस्टमर केयर नंबर सर्च किया था। सर्च के दौरान उन्हें एक मोबाइल नंबर मिला, जिसे उन्होंने एजेंसी का आधिकारिक नंबर समझकर कॉल कर दिया।
फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को गैस एजेंसी का कर्मचारी बताया और समस्या समाधान का भरोसा दिलाया। इसके बाद आरोपी ने पीड़ित को एक व्हाट्सएप नंबर दिया और कहा कि गैस सेवा एक्टिवेशन के लिए 10 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करने होंगे।
बुजुर्ग ने भरोसे में आकर फोन-पे के जरिए 10 रुपए भेज दिए। पुलिस के अनुसार, इसी छोटे ट्रांजेक्शन के जरिए साइबर ठगों ने बैंकिंग एक्सेस हासिल कर लिया। करीब आधे घंटे बाद पीड़ित के एसबीआई खाते से 97 हजार रुपए निकाल लिए गए।
इसके बाद 26 मई को उनके यूको बैंक खाते से भी 98 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर लिए गए। इस तरह कुल 1 लाख 95 हजार रुपए की ठगी हो गई। खाते से रकम कटने के मैसेज आने के बाद पीड़ित ने तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। बाद में नेवई थाना पहुंचकर लिखित आवेदन भी दिया गया।
पुलिस को शिकायत के साथ बैंक खाते की जानकारी, ट्रांजेक्शन डिटेल और साइबर हेल्पलाइन शिकायत की कॉपी भी सौंपी गई है। प्रारंभिक जांच के बाद मोबाइल नंबर धारकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी ने बताया कि साइबर ठग अब गूगल सर्च में फर्जी कस्टमर केयर नंबर डालकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। लोग जब गैस एजेंसी, बैंक, बिजली कंपनी या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का नंबर इंटरनेट पर खोजते हैं, तब ठग खुद को अधिकारी या कर्मचारी बताकर बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप से ही प्राप्त करें। किसी अनजान नंबर पर कॉल करने, लिंक ओपन करने या छोटी राशि ट्रांसफर करने से पहले पूरी तरह जांच जरूर करें।
फिलहाल पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर सेल की मदद से तकनीकी जांच भी शुरू कर दी गई है।
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