2 महीने में जर्जर हुई 78 लाख की सड़क, मेयर ने उठाए निर्माण गुणवत्ता पर सवालदुर्ग जिले के कुरूद क्षेत्र में करीब 78 लाख रुपए की लागत से बनी सड़क दो महीने के भीतर ही जर्जर होने का मामला सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भिलाई महापौर नीरज पाल ने सड़क निर्माण में भारी लापरवाही और गुणवत्ताहीन कार्य का आरोप लगाते हुए संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग करते हुए दुर्ग कलेक्टर को पत्र सौंपा है।महापौर नीरज पाल के अनुसार, लगभग 78 लाख 30 हजार रुपए की लागत से सड़क निर्माण का कार्य मेसर्स शशांक जैन को दिया गया था। लेकिन सड़क बनने के कुछ ही समय बाद उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। उनका कहना है कि सड़क का निर्माण पूरा हुए अभी दो महीने भी नहीं बीते और सड़क जगह-जगह से उखड़ने लगी है। सड़क की खराब हालत को देखकर उन्होंने इसे सीधे तौर पर घटिया निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया।जोन आयुक्त ने पहले ही कार्रवाई की सिफारिश की थीमहापौर ने दावा किया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समय सीमा को लेकर पहले से शिकायतें सामने आ रही थीं। इसे देखते हुए जोन-2 आयुक्त एशा लहरे ने 11 जून 2025 को निगम आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई और ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा की थी। पत्र में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाने के साथ काम में देरी का भी उल्लेख किया गया था।हालांकि, महापौर का आरोप है कि इस सिफारिश के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि बाद में ठेकेदार ने 23 जून 2025 को लोक निर्माण विभाग (PWD) दुर्ग से गुणवत्ता रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी, जिसके आधार पर उसे राहत मिल गई। इसके बाद ठेकेदार का पहला रनिंग बिल लगभग 15 लाख 43 हजार रुपए पास कर दिया गया, जबकि सड़क निर्माण कार्य की अंतिम समय सीमा 28 अक्टूबर 2025 तय की गई थी।काम अधूरा, फिर भी करोड़ों का भुगतान?महापौर नीरज पाल ने आरोप लगाया कि सड़क की स्थिति खराब होने और निर्माण अधूरा रहने के बावजूद ठेकेदार को दूसरा रनिंग बिल भी जारी कर दिया गया। उनके मुताबिक करीब 35 लाख 25 हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया, जिससे कुल भुगतान लगभग 50 लाख रुपए तक पहुंच गया।उन्होंने सवाल उठाया कि जब निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर आपत्तियां थीं और सड़क समय से पहले खराब हो गई थी, तब इतनी बड़ी राशि का भुगतान किस आधार पर किया गया। उन्होंने इसे वित्तीय अनियमितता और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका से भी जोड़कर देखा।0.5 प्रतिशत पेनाल्टी पर मेयर ने जताई आपत्तिमहापौर ने निगम आयुक्त राजीव पाण्डेय पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कार्य पूरा करने की समय सीमा चार महीने बढ़ाकर 28 फरवरी 2026 तक कर दी गई, जबकि नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए थी। इसके साथ ही केवल 0.5 प्रतिशत का अर्थदंड लगाया गया, जबकि सामान्य परिस्थितियों में करीब 6 प्रतिशत तक पेनाल्टी लगाई जा सकती थी।नीरज पाल ने कहा कि यदि कोई अन्य आयुक्त होता तो नियमानुसार अधिक दंड लगाया जाता, लेकिन इस मामले में ठेकेदार को राहत देने जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर खराब सड़क निर्माण और समय सीमा के उल्लंघन के बावजूद इतनी नरमी क्यों बरती गई।कलेक्टर से स्वतंत्र जांच और कार्रवाई की मांगमहापौर ने दुर्ग कलेक्टर को दस्तावेजों
दुर्ग जिले के कुरूद क्षेत्र में करीब 78 लाख रुपए की लागत से बनी सड़क दो महीने के भीतर ही जर्जर होने का मामला सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भिलाई महापौर नीरज पाल ने सड़क निर्माण में भारी लापरवाही और गुणवत्ताहीन कार्य का आरोप लगाते हुए संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग करते हुए दुर्ग कलेक्टर को पत्र सौंपा है।
महापौर नीरज पाल के अनुसार, लगभग 78 लाख 30 हजार रुपए की लागत से सड़क निर्माण का कार्य मेसर्स शशांक जैन को दिया गया था। लेकिन सड़क बनने के कुछ ही समय बाद उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। उनका कहना है कि सड़क का निर्माण पूरा हुए अभी दो महीने भी नहीं बीते और सड़क जगह-जगह से उखड़ने लगी है। सड़क की खराब हालत को देखकर उन्होंने इसे सीधे तौर पर घटिया निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया।
महापौर ने दावा किया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समय सीमा को लेकर पहले से शिकायतें सामने आ रही थीं। इसे देखते हुए जोन-2 आयुक्त एशा लहरे ने 11 जून 2025 को निगम आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई और ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा की थी। पत्र में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाने के साथ काम में देरी का भी उल्लेख किया गया था।
हालांकि, महापौर का आरोप है कि इस सिफारिश के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि बाद में ठेकेदार ने 23 जून 2025 को लोक निर्माण विभाग (PWD) दुर्ग से गुणवत्ता रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी, जिसके आधार पर उसे राहत मिल गई। इसके बाद ठेकेदार का पहला रनिंग बिल लगभग 15 लाख 43 हजार रुपए पास कर दिया गया, जबकि सड़क निर्माण कार्य की अंतिम समय सीमा 28 अक्टूबर 2025 तय की गई थी।
महापौर नीरज पाल ने आरोप लगाया कि सड़क की स्थिति खराब होने और निर्माण अधूरा रहने के बावजूद ठेकेदार को दूसरा रनिंग बिल भी जारी कर दिया गया। उनके मुताबिक करीब 35 लाख 25 हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया, जिससे कुल भुगतान लगभग 50 लाख रुपए तक पहुंच गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर आपत्तियां थीं और सड़क समय से पहले खराब हो गई थी, तब इतनी बड़ी राशि का भुगतान किस आधार पर किया गया। उन्होंने इसे वित्तीय अनियमितता और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका से भी जोड़कर देखा।
महापौर ने निगम आयुक्त राजीव पाण्डेय पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कार्य पूरा करने की समय सीमा चार महीने बढ़ाकर 28 फरवरी 2026 तक कर दी गई, जबकि नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए थी। इसके साथ ही केवल 0.5 प्रतिशत का अर्थदंड लगाया गया, जबकि सामान्य परिस्थितियों में करीब 6 प्रतिशत तक पेनाल्टी लगाई जा सकती थी।
नीरज पाल ने कहा कि यदि कोई अन्य आयुक्त होता तो नियमानुसार अधिक दंड लगाया जाता, लेकिन इस मामले में ठेकेदार को राहत देने जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर खराब सड़क निर्माण और समय सीमा के उल्लंघन के बावजूद इतनी नरमी क्यों बरती गई।
महापौर ने दुर्ग कलेक्टर को दस्तावेजों
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