भिलाई के छावनी इलाके में साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े एक बड़े म्यूल अकाउंट नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों को आसान लोन दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते, पासबुक और जरूरी दस्तावेज हासिल करते थे। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और क्रिकेट सट्टे के पैसों के लेनदेन में किया जाता था।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आकाश जायसवाल निवासी शारदा पारा कैंप-02 भिलाई और जावेद अख्तर निवासी मदर टेरेसा नगर कैंप-01 भिलाई के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक दस्तावेज, मोबाइल फोन और कई संदिग्ध रिकॉर्ड जब्त किए हैं। मामले की जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं।जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला थाना छावनी क्षेत्र स्थित बैकुण्ठ धाम आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-25 परिसर का है। यहां आरोपी लंबे समय से आसपास के लोगों को कम दस्तावेजों में जल्दी लोन दिलाने का लालच दे रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोग इनके झांसे में आकर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और आधार-पैन जैसे दस्तावेज सौंप देते थे।पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल “म्यूल अकाउंट” के रूप में किया जा रहा है। साइबर अपराधों में म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिनका उपयोग ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है, ताकि असली आरोपी तक पुलिस आसानी से न पहुंच सके। कई मामलों में इन खातों का उपयोग ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा और हवाला ट्रांजेक्शन में भी किया जाता है।सूचना मिलते ही छावनी पुलिस ने मौके पर दबिश दी और दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों के बैंक खाते जुटाए और किन-किन साइबर अपराधों में उनका इस्तेमाल किया गया।पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, पासबुक, एटीएम कार्ड या ओटीपी संबंधी जानकारी न दें। आसान लोन, सरकारी योजना या नौकरी के नाम पर बैंक दस्तावेज मांगने वालों से सतर्क रहने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही व्यक्ति को कानूनी परेशानी में डाल सकती है, क्योंकि साइबर अपराध में इस्तेमाल हुए खाते के खिलाफ कार्रवाई सीधे खाताधारक पर भी हो सकती है।फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
भिलाई के छावनी इलाके में साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े एक बड़े म्यूल अकाउंट नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों को आसान लोन दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते, पासबुक और जरूरी दस्तावेज हासिल करते थे। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और क्रिकेट सट्टे के पैसों के लेनदेन में किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आकाश जायसवाल निवासी शारदा पारा कैंप-02 भिलाई और जावेद अख्तर निवासी मदर टेरेसा नगर कैंप-01 भिलाई के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक दस्तावेज, मोबाइल फोन और कई संदिग्ध रिकॉर्ड जब्त किए हैं। मामले की जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला थाना छावनी क्षेत्र स्थित बैकुण्ठ धाम आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-25 परिसर का है। यहां आरोपी लंबे समय से आसपास के लोगों को कम दस्तावेजों में जल्दी लोन दिलाने का लालच दे रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोग इनके झांसे में आकर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और आधार-पैन जैसे दस्तावेज सौंप देते थे।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल “म्यूल अकाउंट” के रूप में किया जा रहा है। साइबर अपराधों में म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिनका उपयोग ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है, ताकि असली आरोपी तक पुलिस आसानी से न पहुंच सके। कई मामलों में इन खातों का उपयोग ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा और हवाला ट्रांजेक्शन में भी किया जाता है।
सूचना मिलते ही छावनी पुलिस ने मौके पर दबिश दी और दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों के बैंक खाते जुटाए और किन-किन साइबर अपराधों में उनका इस्तेमाल किया गया।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, पासबुक, एटीएम कार्ड या ओटीपी संबंधी जानकारी न दें। आसान लोन, सरकारी योजना या नौकरी के नाम पर बैंक दस्तावेज मांगने वालों से सतर्क रहने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही व्यक्ति को कानूनी परेशानी में डाल सकती है, क्योंकि साइबर अपराध में इस्तेमाल हुए खाते के खिलाफ कार्रवाई सीधे खाताधारक पर भी हो सकती है।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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