दुर्ग नगर निगम में महापौर अलका बाघमार और सरकारी अधिकारियों के बीच विवाद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। मामला इतना बढ़ गया कि महापौर पर अधिकारियों को अपने कार्यालय में बंधक बनाए रखने के आरोप लगने लगे। हालांकि महापौर अलका बाघमार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पूरे घटनाक्रम के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है और सत्ता पक्ष के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।विवाद की शुरुआत उरला स्थित सरकारी स्कूल में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के भूमिपूजन कार्यक्रम से हुई। इस कार्यक्रम में प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि महापौर अलका बाघमार कार्यक्रम में थोड़ी देर से पहुंचीं, लेकिन मंच पर पहुंचते ही उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी।महापौर ने सार्वजनिक मंच से अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को समय पर जानकारी नहीं दी जाती और अधिकारी केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित हो गए हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि “सरकार फोकट का तनख्वाह नहीं दे रही है।” मंच से दिए गए इस बयान के बाद कार्यक्रम का माहौल अचानक गर्म हो गया और वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।सूत्रों के मुताबिक विवाद की एक बड़ी वजह कार्यक्रम का आमंत्रण पत्र भी बना। भूमिपूजन कार्यक्रम का आयोजन आरईएस विभाग द्वारा कराया गया था। आमंत्रण पत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा मंत्री का नाम और अध्यक्षता में भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक का नाम प्रमुखता से लिखा गया था, जबकि महापौर अलका बाघमार का नाम विशिष्ट अतिथि के तौर पर छापा गया था। इसी बात को लेकर महापौर नाराज बताई जा रही हैं। राजनीतिक हलकों में इसे प्रोटोकॉल और सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।विवाद यहीं नहीं रुका। अगले दिन महापौर ने मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडे, आरईएस के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जे.के. मेश्राम और एसडीओ सी.के. सोने को नगर निगम कार्यालय में बुलाया। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान महापौर ने अधिकारियों से कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगा। इसी दौरान कथित तौर पर यह कहा गया कि जवाब दिए बिना कोई भी कार्यालय से बाहर नहीं जाएगा।सूत्रों के अनुसार कार्यालय के बाहर मौजूद सुरक्षा गार्ड को भी अधिकारियों को बाहर न जाने देने के निर्देश दिए गए थे। इस घटनाक्रम के बाद अधिकारियों ने किसी तरह पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी, सीएसपी और दो थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में अधिकारी कार्यालय से बाहर निकल सके। इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। Game on! Embrace the spirit of sportsmanship Prev Push your limits, redefine what's possible Next Comments (0) Pls Add Data. Leave a Comment Your email address will not be published. Required fields are marked *
दुर्ग नगर निगम में महापौर अलका बाघमार और सरकारी अधिकारियों के बीच विवाद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। मामला इतना बढ़ गया कि महापौर पर अधिकारियों को अपने कार्यालय में बंधक बनाए रखने के आरोप लगने लगे। हालांकि महापौर अलका बाघमार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पूरे घटनाक्रम के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है और सत्ता पक्ष के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
विवाद की शुरुआत उरला स्थित सरकारी स्कूल में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के भूमिपूजन कार्यक्रम से हुई। इस कार्यक्रम में प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि महापौर अलका बाघमार कार्यक्रम में थोड़ी देर से पहुंचीं, लेकिन मंच पर पहुंचते ही उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी।
महापौर ने सार्वजनिक मंच से अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को समय पर जानकारी नहीं दी जाती और अधिकारी केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित हो गए हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि “सरकार फोकट का तनख्वाह नहीं दे रही है।” मंच से दिए गए इस बयान के बाद कार्यक्रम का माहौल अचानक गर्म हो गया और वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।
सूत्रों के मुताबिक विवाद की एक बड़ी वजह कार्यक्रम का आमंत्रण पत्र भी बना। भूमिपूजन कार्यक्रम का आयोजन आरईएस विभाग द्वारा कराया गया था। आमंत्रण पत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा मंत्री का नाम और अध्यक्षता में भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक का नाम प्रमुखता से लिखा गया था, जबकि महापौर अलका बाघमार का नाम विशिष्ट अतिथि के तौर पर छापा गया था। इसी बात को लेकर महापौर नाराज बताई जा रही हैं। राजनीतिक हलकों में इसे प्रोटोकॉल और सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।
विवाद यहीं नहीं रुका। अगले दिन महापौर ने मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडे, आरईएस के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जे.के. मेश्राम और एसडीओ सी.के. सोने को नगर निगम कार्यालय में बुलाया। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान महापौर ने अधिकारियों से कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगा। इसी दौरान कथित तौर पर यह कहा गया कि जवाब दिए बिना कोई भी कार्यालय से बाहर नहीं जाएगा।
सूत्रों के अनुसार कार्यालय के बाहर मौजूद सुरक्षा गार्ड को भी अधिकारियों को बाहर न जाने देने के निर्देश दिए गए थे। इस घटनाक्रम के बाद अधिकारियों ने किसी तरह पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी, सीएसपी और दो थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में अधिकारी कार्यालय से बाहर निकल सके। इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
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