कुम्हारी अग्निकांड जांच पर सवाल: “बयान बदला तो थप्पड़ मारूंगी”, पीड़ित परिवार ने लगाए धमकाने के आरोप

दुर्ग जिले के कुम्हारी इलाके में 12 मई को हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब जांच प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई है। इस हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। मृतकों में अनिल उर्फ होमदास वैष्णव, उनकी दो बेटियां लक्ष्मी और चांदनी तथा डेढ़ साल की नातिन गोपिका शामिल थीं। घटना के बाद प्रशासन ने 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी, लेकिन अब पीड़ित परिवार ने जांच टीम पर दबाव और धमकाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

हादसे में परिवार के सिर्फ दो सदस्य बचे हैं—गौतम वैष्णव और उनके बुजुर्ग दादा राधेश्याम वैष्णव। जली हुई झोपड़ी के बाहर बैठे राधेश्याम की आंखों में अब भी हादसे का दर्द साफ दिखाई देता है। वहीं गौतम का आरोप है कि जांच के दौरान उनसे बिना पूरी जानकारी दिए दस्तखत करवाए गए। गौतम ने दावा किया कि एक महिला अधिकारी ने उनसे कहा—“अगर बयान बदला तो थप्पड़ मारूंगी।”

गौतम के मुताबिक जांच टीम लगातार इस बात पर जोर दे रही थी कि आग शॉर्ट सर्किट से नहीं लगी। जबकि परिवार का कहना है कि घर के बिजली मीटर के पास से चिंगारी निकली थी, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। कुछ अधिकारियों द्वारा आत्महत्या की आशंका जताने पर भी परिवार ने नाराजगी जाहिर की है।

घटनास्थल पर आज भी तबाही के निशान साफ दिखाई देते हैं। बांस, तिरपाल और खपरैल से बनी झोपड़ी पूरी तरह राख में बदल चुकी है। दीवारें काली पड़ गई हैं, बर्तन और घरेलू सामान जल चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला।

पड़ोस में रहने वाली बैदू सिन्हा ने बताया कि आग बुझाने की कोशिश के दौरान सिलेंडर ब्लास्ट हो गया था। धमाका इतना तेज था कि मोहल्ले में भगदड़ मच गई। इस दौरान वे गिर गईं और उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया।

वहीं, मृत बच्ची गोपिका के पिता नंदकिशोर वैष्णव ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इलाके में लंबे समय से बिजली व्यवस्था खराब है और शॉर्ट सर्किट की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। उन्होंने दावा किया कि हादसे के बाद लगाया गया अस्थायी मीटर भी करंट छोड़ रहा है, जिससे लोगों में डर बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि महामाया पारा इलाके में बिजली के झूलते तार और स्पार्किंग की शिकायतें पहले भी कई बार की गई थीं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तहसीलदार रवि विश्वकर्मा के नेतृत्व में कमेटी बनाई है, जिसे 16 मई तक रिपोर्ट सौंपनी है।

हालांकि तहसीलदार रवि विश्वकर्मा ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पंचनामा और पूछताछ पूरी प्रक्रिया के तहत की गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी पर धमकाने का आरोप है तो नाम बताए जाने पर जांच कराई जाएगी।

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