भिलाई की बेटी सुष्मिता सिंह बनी IFS अफसर: 6 साल की मेहनत लाई रंग, ऑल इंडिया 32वीं रैंक हासिल

भिलाई की सुष्मिता सिंह ने भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया 32वीं रैंक हासिल कर छत्तीसगढ़ का नाम देशभर में रोशन किया है। उनकी सफलता संघर्ष, धैर्य और लगातार प्रयास की प्रेरणादायक कहानी है। छह वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बाद सुष्मिता ने अपने सपने को साकार किया।

सुष्मिता सिंह ने वर्ष 2019 से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी शुरू की थी। इस दौरान उन्होंने कई बार मुख्य परीक्षा (Mains) पास की, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार के सहयोग और अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने छठे प्रयास में यह उपलब्धि हासिल की।

छठे प्रयास में हासिल की शानदार सफलता

सुष्मिता की शुरुआती पढ़ाई राजनांदगांव और बिलासपुर में हुई। इसके बाद उन्होंने डीपीएस भिलाई से स्कूली शिक्षा पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने University of Petroleum and Energy Studies (UPES) से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी शुरू की, लेकिन सिविल सेवा में जाने का सपना इतना मजबूत था कि उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह UPSC की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया।

नौकरी छोड़कर किया UPSC पर फोकस

सुष्मिता के पिता भानु प्रताप सिंह वन विभाग में मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। परिवार में वन सेवा का माहौल होने के कारण सुष्मिता को बचपन से ही प्रकृति, जंगल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति रुचि थी। यही प्रेरणा आगे चलकर उन्हें भारतीय वन सेवा तक ले गई।

पिता ने बताया कि जब सुष्मिता ने नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी करने की इच्छा जताई, तो शुरुआत में चिंता हुई। लेकिन बेटी के आत्मविश्वास को देखकर परिवार ने पूरा समर्थन दिया। कई प्रयासों में सफलता न मिलने पर जब सुष्मिता निराश हुईं, तब पिता ने उन्हें आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी।

माता-पिता और योग-मेडिटेशन को दिया श्रेय

सुष्मिता ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, दोस्तों, योग और मेडिटेशन को दिया है। उनका कहना है कि UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी में सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन बहुत जरूरी है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर लगातार आगे बढ़ना चाहिए।

सुष्मिता की मां हिना सिंह ने बताया कि बेटी को बचपन से ही अनुशासित माहौल में पढ़ाया गया। सुबह पढ़ाई, पेड़ों के बीच स्पेलिंग याद कराना और पढ़ाई को आनंददायक बनाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

अब अगस्त में सुष्मिता मसूरी में प्रशिक्षण के लिए जाएंगी। इसके बाद रैंक के अनुसार कैडर आवंटित किया जाएगा। उनकी इच्छा है कि उन्हें छत्तीसगढ़ में सेवा करने का अवसर मिले, ताकि वे अपने राज्य के जंगलों और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें.

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