छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जमीन बंटवारे के काम के बदले रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित पटवारी को निलंबित कर दिया है। मामला भिलाई-3 के अंतर्गत आने वाली अहिवारा तहसील का है, जहां पदस्थ पटवारी लेकेश्वर सिंह ठाकुर पर जमीन बंटवारे के एवज में 45 हजार रुपए लेने का आरोप लगा है।जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें जमीन बंटवारे के काम के लिए पैसे लेने और बाद में वेतन मिलने पर रकम लौटाने की बात सामने आई। वीडियो के वायरल होते ही दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया और भिलाई-3 के एसडीएम महेश सिंह राजपूत को तत्काल जांच के निर्देश दिए।कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार अहिवारा ने पूरे मामले की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान पक्षकार अमन कुमार टंडन, भूमिस्वामी उत्तम टंडन और संबंधित पटवारी के बयान दर्ज किए गए। पूछताछ में पक्षकारों ने बताया कि जमीन बंटवारे की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पटवारी को 45 हजार रुपए दिए गए थे।जांच के दौरान पटवारी लेकेश्वर सिंह ठाकुर ने भी अपने बयान में पैसे लेने की बात स्वीकार की। उन्होंने बताया कि यह रकम पक्षकार की माता से ली गई थी। वायरल वीडियो में भी यह बात सामने आई कि वेतन मिलने के बाद राशि लौटाने की चर्चा हुई थी। प्रशासन ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए सरकारी कर्मचारी आचरण नियमों का उल्लंघन माना।एसडीएम महेश सिंह राजपूत ने बताया कि किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा शासकीय कार्य के बदले धनराशि लेना नियमों के विरुद्ध है। यह न केवल कर्तव्य के प्रति लापरवाही है, बल्कि सेवा आचरण के खिलाफ भी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।निलंबन अवधि के दौरान लेकेश्वर सिंह ठाकुर का मुख्यालय तहसील कार्यालय अहिवारा निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में पैसों की मांग की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। लोगों ने प्रशासन से ऐसे मामलों में लगातार निगरानी और कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जमीन बंटवारे के काम के बदले रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित पटवारी को निलंबित कर दिया है। मामला भिलाई-3 के अंतर्गत आने वाली अहिवारा तहसील का है, जहां पदस्थ पटवारी लेकेश्वर सिंह ठाकुर पर जमीन बंटवारे के एवज में 45 हजार रुपए लेने का आरोप लगा है।
जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें जमीन बंटवारे के काम के लिए पैसे लेने और बाद में वेतन मिलने पर रकम लौटाने की बात सामने आई। वीडियो के वायरल होते ही दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया और भिलाई-3 के एसडीएम महेश सिंह राजपूत को तत्काल जांच के निर्देश दिए।
कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार अहिवारा ने पूरे मामले की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान पक्षकार अमन कुमार टंडन, भूमिस्वामी उत्तम टंडन और संबंधित पटवारी के बयान दर्ज किए गए। पूछताछ में पक्षकारों ने बताया कि जमीन बंटवारे की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पटवारी को 45 हजार रुपए दिए गए थे।
जांच के दौरान पटवारी लेकेश्वर सिंह ठाकुर ने भी अपने बयान में पैसे लेने की बात स्वीकार की। उन्होंने बताया कि यह रकम पक्षकार की माता से ली गई थी। वायरल वीडियो में भी यह बात सामने आई कि वेतन मिलने के बाद राशि लौटाने की चर्चा हुई थी। प्रशासन ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए सरकारी कर्मचारी आचरण नियमों का उल्लंघन माना।
एसडीएम महेश सिंह राजपूत ने बताया कि किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा शासकीय कार्य के बदले धनराशि लेना नियमों के विरुद्ध है। यह न केवल कर्तव्य के प्रति लापरवाही है, बल्कि सेवा आचरण के खिलाफ भी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
निलंबन अवधि के दौरान लेकेश्वर सिंह ठाकुर का मुख्यालय तहसील कार्यालय अहिवारा निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में पैसों की मांग की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। लोगों ने प्रशासन से ऐसे मामलों में लगातार निगरानी और कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।
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