दुर्ग जिले के समोदा गांव में अफीम की खेती का खुलासा करने वाले सरपंच अरुण गौतम को अब उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है। एसडीएम (राजस्व) कोर्ट ने चुनावी हलफनामे में गंभीर आपराधिक मामला छिपाने का दोषी पाते हुए उनका चुनाव निरस्त कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद अब समोदा गांव में सरपंच पद के लिए दोबारा उपचुनाव कराया जाएगा।दरअसल, समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम ने करीब दो महीने पहले बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार के खेत में अफीम की खेती होने की शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विनायक ताम्रकार को गिरफ्तार किया था। अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद पूरे जिले में यह मुद्दा काफी चर्चा में रहा। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है।बताया जा रहा है कि अरुण गौतम और विनायक ताम्रकार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। अफीम खेती मामले में शिकायत के बाद यह विवाद और ज्यादा बढ़ गया। इसी बीच विनायक ताम्रकार की ओर से भी अरुण गौतम के खिलाफ चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामला छिपाने की शिकायत की गई थी।जानकारी के मुताबिक, अरुण गौतम ने साल 2025 के पंचायत चुनाव में सरपंच पद का चुनाव जीता था। लेकिन चुनाव के दौरान उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज हत्या के प्रयास यानी धारा 307 समेत अन्य मामलों की जानकारी चुनावी हलफनामे में नहीं दी थी। इस मुद्दे को लेकर चुनाव में दूसरे स्थान पर रहीं प्रत्याशी भुवनेश्वरी देशमुख ने आपत्ति जताई थी।भुवनेश्वरी देशमुख ने आरोप लगाया था कि अरुण गौतम ने मतदाताओं से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाकर चुनाव लड़ा। शुरुआत में उनकी आपत्ति रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए इसे दोबारा एसडीएम कोर्ट भेज दिया।एसडीएम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि अरुण गौतम के खिलाफ दुर्ग कोर्ट में पहले से गंभीर आपराधिक मामला लंबित था। इसके बावजूद उन्होंने चुनावी हलफनामे में इस जानकारी का खुलासा नहीं किया। कोर्ट ने इसे चुनाव नियमों का उल्लंघन माना।सुनवाई के बाद एसडीएम कोर्ट ने अरुण गौतम का चुनाव शून्य घोषित करते हुए उन्हें सरपंच पद से हटा दिया। साथ ही समोदा गांव का सरपंच पद रिक्त घोषित कर दिया गया है। कोर्ट ने दुर्ग जनपद पंचायत के सीईओ को राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि गांव में जल्द उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा सके।वहीं, याचिकाकर्ता भुवनेश्वरी देशमुख ने मांग की थी कि उन्हें सीधे सरपंच घोषित किया जाए, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि चुनाव में अरुण गौतम को 869 वोट मिले थे, जबकि भुवनेश्वरी देशमुख को 741 वोट प्राप्त हुए थे। इतने बड़े वोट अंतर के बाद दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को सीधे विजयी घोषित करना उचित नहीं माना जा सकता।इसी आधार पर कोर्ट ने समोदा गांव में दोबारा चुनाव कराने का फैसला सुनाया है।
दुर्ग जिले के समोदा गांव में अफीम की खेती का खुलासा करने वाले सरपंच अरुण गौतम को अब उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है। एसडीएम (राजस्व) कोर्ट ने चुनावी हलफनामे में गंभीर आपराधिक मामला छिपाने का दोषी पाते हुए उनका चुनाव निरस्त कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद अब समोदा गांव में सरपंच पद के लिए दोबारा उपचुनाव कराया जाएगा।
दरअसल, समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम ने करीब दो महीने पहले बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार के खेत में अफीम की खेती होने की शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विनायक ताम्रकार को गिरफ्तार किया था। अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद पूरे जिले में यह मुद्दा काफी चर्चा में रहा। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है।
बताया जा रहा है कि अरुण गौतम और विनायक ताम्रकार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। अफीम खेती मामले में शिकायत के बाद यह विवाद और ज्यादा बढ़ गया। इसी बीच विनायक ताम्रकार की ओर से भी अरुण गौतम के खिलाफ चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामला छिपाने की शिकायत की गई थी।
जानकारी के मुताबिक, अरुण गौतम ने साल 2025 के पंचायत चुनाव में सरपंच पद का चुनाव जीता था। लेकिन चुनाव के दौरान उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज हत्या के प्रयास यानी धारा 307 समेत अन्य मामलों की जानकारी चुनावी हलफनामे में नहीं दी थी। इस मुद्दे को लेकर चुनाव में दूसरे स्थान पर रहीं प्रत्याशी भुवनेश्वरी देशमुख ने आपत्ति जताई थी।
भुवनेश्वरी देशमुख ने आरोप लगाया था कि अरुण गौतम ने मतदाताओं से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाकर चुनाव लड़ा। शुरुआत में उनकी आपत्ति रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए इसे दोबारा एसडीएम कोर्ट भेज दिया।
एसडीएम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि अरुण गौतम के खिलाफ दुर्ग कोर्ट में पहले से गंभीर आपराधिक मामला लंबित था। इसके बावजूद उन्होंने चुनावी हलफनामे में इस जानकारी का खुलासा नहीं किया। कोर्ट ने इसे चुनाव नियमों का उल्लंघन माना।
सुनवाई के बाद एसडीएम कोर्ट ने अरुण गौतम का चुनाव शून्य घोषित करते हुए उन्हें सरपंच पद से हटा दिया। साथ ही समोदा गांव का सरपंच पद रिक्त घोषित कर दिया गया है। कोर्ट ने दुर्ग जनपद पंचायत के सीईओ को राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि गांव में जल्द उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
वहीं, याचिकाकर्ता भुवनेश्वरी देशमुख ने मांग की थी कि उन्हें सीधे सरपंच घोषित किया जाए, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि चुनाव में अरुण गौतम को 869 वोट मिले थे, जबकि भुवनेश्वरी देशमुख को 741 वोट प्राप्त हुए थे। इतने बड़े वोट अंतर के बाद दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को सीधे विजयी घोषित करना उचित नहीं माना जा सकता।
इसी आधार पर कोर्ट ने समोदा गांव में दोबारा चुनाव कराने का फैसला सुनाया है।
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