बालोद। जिले के गुरूर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम मोहारा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शौचालय निर्माण को लेकर बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। बालिकाओं के लिए बनाए जा रहे इस शौचालय में घटिया सामग्री के उपयोग और निर्माण में अनियमितता के आरोप लगे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल प्रबंधन ने कड़ी आपत्ति जताई है और संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसर में करीब 1 लाख 3 हजार रुपये की लागत से शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं। प्राचार्य जोसेफ चाको ने बताया कि निर्माण में उपयोग की जा रही टाइल्स और अन्य सामग्री बेहद निम्न स्तर की हैं, जो जल्द ही खराब हो सकती हैं।उन्होंने यह भी बताया कि निर्माण स्थल पर कार्य प्रारंभ तिथि और योजना से संबंधित बोर्ड तो लगाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। गुणवत्ता को नजरअंदाज कर जल्दबाजी में काम पूरा करने की कोशिश की जा रही है।मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राचार्य ने जिला पंचायत, जनपद पंचायत के कार्यपालन अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी सहित संबंधित विभागों को लिखित शिकायत भेजी है। इसके बाद अब यह निर्माण कार्य जांच के दायरे में आ गया है।प्राचार्य का कहना है कि बालिकाओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय बनाना सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन इस तरह की लापरवाही न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि छात्राओं की सुविधा और सम्मान के साथ भी समझौता है।वहीं, स्थानीय स्तर पर निर्माण एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रबंधन ने एजेंसी के लाइसेंस को निरस्त करने की अनुशंसा करने की बात कही है।अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या छात्राओं को बेहतर सुविधा मिल पाती है या नहीं।
बालोद। जिले के गुरूर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम मोहारा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शौचालय निर्माण को लेकर बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। बालिकाओं के लिए बनाए जा रहे इस शौचालय में घटिया सामग्री के उपयोग और निर्माण में अनियमितता के आरोप लगे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल प्रबंधन ने कड़ी आपत्ति जताई है और संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसर में करीब 1 लाख 3 हजार रुपये की लागत से शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं। प्राचार्य जोसेफ चाको ने बताया कि निर्माण में उपयोग की जा रही टाइल्स और अन्य सामग्री बेहद निम्न स्तर की हैं, जो जल्द ही खराब हो सकती हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि निर्माण स्थल पर कार्य प्रारंभ तिथि और योजना से संबंधित बोर्ड तो लगाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। गुणवत्ता को नजरअंदाज कर जल्दबाजी में काम पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राचार्य ने जिला पंचायत, जनपद पंचायत के कार्यपालन अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी सहित संबंधित विभागों को लिखित शिकायत भेजी है। इसके बाद अब यह निर्माण कार्य जांच के दायरे में आ गया है।
प्राचार्य का कहना है कि बालिकाओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय बनाना सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन इस तरह की लापरवाही न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि छात्राओं की सुविधा और सम्मान के साथ भी समझौता है।
वहीं, स्थानीय स्तर पर निर्माण एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रबंधन ने एजेंसी के लाइसेंस को निरस्त करने की अनुशंसा करने की बात कही है।
अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या छात्राओं को बेहतर सुविधा मिल पाती है या नहीं।
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