छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का 6 साल का एक बच्चा इन दिनों अपनी अद्भुत प्रतिभा के चलते सुर्खियों में है। कक्षा पहली में पढ़ने वाले रुद्र शर्मा इतनी कम उम्र में UPSC और PSC स्तर के सवालों के जवाब फर्राटे से दे देते हैं। उनकी तेज याददाश्त, गहरी समझ और व्यापक जनरल नॉलेज ने लोगों को चौंका दिया है। यही वजह है कि अब उन्हें ‘छत्तीसगढ़ का गूगल बॉय’ कहा जाने लगा है।रुद्र की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में राज्यपाल रमेन डेका ने उन्हें राजभवन में आमंत्रित कर सम्मानित किया। इस दौरान रुद्र ने बिना किसी झिझक के पूछे गए हर सवाल का सटीक जवाब दिया, जिससे वहां मौजूद सभी लोग प्रभावित हुए। खास बात यह है कि रुद्र खुद लोगों को चुनौती देते हैं कि वे उनसे कठिन से कठिन सवाल पूछें, ताकि वह और बेहतर सीख सकें।देश-दुनिया से लेकर पौराणिक कथाओं तक पकड़रुद्र की जानकारी किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र से कम नहीं है। उन्हें छत्तीसगढ़ के इतिहास, भारत के प्रमुख घटनाक्रम, पौराणिक कथाओं और देश-दुनिया से जुड़े विषयों की गहरी समझ है। बातचीत के दौरान उन्होंने ‘आरंग’ के नामकरण की कथा बड़े आत्मविश्वास के साथ सुनाई, जिसमें राजा मोरध्वज और भगवान श्रीकृष्ण की कहानी शामिल है।इसके अलावा, उन्होंने भारत के सभी प्रधानमंत्रियों के नाम भी क्रमवार आसानी से गिना दिए। रहस्यमयी मंदिरों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने करणी माता मंदिर, कामाख्या मंदिर और लेपाक्षी मंदिर जैसे कई उदाहरण दिए और उनकी विशेषताएं भी बताईं।खेल-खेल में पढ़ाई, गीतों से याददाश्त मजबूतरुद्र का पढ़ने का तरीका बेहद अनोखा है। वे पढ़ाई को बोझ नहीं मानते, बल्कि उसे खेल की तरह लेते हैं। उन्हें किताबें और अखबार पढ़ने का शौक है और वे नियमित रूप से नई-नई जानकारियां जुटाते रहते हैं। खास बात यह है कि वे कठिन तथ्यों को गीतों के माध्यम से याद करते हैं।उदाहरण के तौर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ के 11 वन्य अभयारण्यों के नाम एक गीत के जरिए याद किए हैं। उनका मानना है कि इस तरीके से पढ़ाई करना न केवल मजेदार बनता है, बल्कि जानकारी लंबे समय तक याद भी रहती है।सवाल-जवाब में गजब की समझरुद्र से जब पूछा गया कि हम किस आकाशगंगा में रहते हैं, तो उन्होंने तुरंत ‘मंदाकिनी’ जवाब दिया। वहीं ‘हिंदुस्तान’ शब्द के उपयोग को लेकर उन्होंने मिन्हाज-ए-सिराज का नाम लिया। राजिम पंचकोशी जैसे धार्मिक विषयों पर भी उनके जवाब बेहद सटीक और आत्मविश्वास से भरे होते हैं।कलेक्टर बनकर देश सेवा का लक्ष्यरुद्र की मां पायल शर्मा बताती हैं कि वह बचपन से ही नई चीजें सीखने में रुचि रखता है और सवाल पूछना उसे बेहद पसंद है। परिवार भी उसे पूरा सहयोग देता है, जिससे उसकी जिज्ञासा लगातार बढ़ रही है।रुद्र का सपना है कि वह आगे चलकर IAS अधिकारी बने और कलेक्टर बनकर देश की सेवा करे। इसके लिए वह अभी से अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रहा है और हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश करता है।कम उम्र में इतनी बड़ी सोच और असाधारण ज्ञान के कारण रुद्र शर्मा आज न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश में प्रेरणा का स्रोत बनते जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का 6 साल का एक बच्चा इन दिनों अपनी अद्भुत प्रतिभा के चलते सुर्खियों में है। कक्षा पहली में पढ़ने वाले रुद्र शर्मा इतनी कम उम्र में UPSC और PSC स्तर के सवालों के जवाब फर्राटे से दे देते हैं। उनकी तेज याददाश्त, गहरी समझ और व्यापक जनरल नॉलेज ने लोगों को चौंका दिया है। यही वजह है कि अब उन्हें ‘छत्तीसगढ़ का गूगल बॉय’ कहा जाने लगा है।
रुद्र की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में राज्यपाल रमेन डेका ने उन्हें राजभवन में आमंत्रित कर सम्मानित किया। इस दौरान रुद्र ने बिना किसी झिझक के पूछे गए हर सवाल का सटीक जवाब दिया, जिससे वहां मौजूद सभी लोग प्रभावित हुए। खास बात यह है कि रुद्र खुद लोगों को चुनौती देते हैं कि वे उनसे कठिन से कठिन सवाल पूछें, ताकि वह और बेहतर सीख सकें।
रुद्र की जानकारी किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र से कम नहीं है। उन्हें छत्तीसगढ़ के इतिहास, भारत के प्रमुख घटनाक्रम, पौराणिक कथाओं और देश-दुनिया से जुड़े विषयों की गहरी समझ है। बातचीत के दौरान उन्होंने ‘आरंग’ के नामकरण की कथा बड़े आत्मविश्वास के साथ सुनाई, जिसमें राजा मोरध्वज और भगवान श्रीकृष्ण की कहानी शामिल है।
इसके अलावा, उन्होंने भारत के सभी प्रधानमंत्रियों के नाम भी क्रमवार आसानी से गिना दिए। रहस्यमयी मंदिरों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने करणी माता मंदिर, कामाख्या मंदिर और लेपाक्षी मंदिर जैसे कई उदाहरण दिए और उनकी विशेषताएं भी बताईं।
रुद्र का पढ़ने का तरीका बेहद अनोखा है। वे पढ़ाई को बोझ नहीं मानते, बल्कि उसे खेल की तरह लेते हैं। उन्हें किताबें और अखबार पढ़ने का शौक है और वे नियमित रूप से नई-नई जानकारियां जुटाते रहते हैं। खास बात यह है कि वे कठिन तथ्यों को गीतों के माध्यम से याद करते हैं।
उदाहरण के तौर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ के 11 वन्य अभयारण्यों के नाम एक गीत के जरिए याद किए हैं। उनका मानना है कि इस तरीके से पढ़ाई करना न केवल मजेदार बनता है, बल्कि जानकारी लंबे समय तक याद भी रहती है।
रुद्र से जब पूछा गया कि हम किस आकाशगंगा में रहते हैं, तो उन्होंने तुरंत ‘मंदाकिनी’ जवाब दिया। वहीं ‘हिंदुस्तान’ शब्द के उपयोग को लेकर उन्होंने मिन्हाज-ए-सिराज का नाम लिया। राजिम पंचकोशी जैसे धार्मिक विषयों पर भी उनके जवाब बेहद सटीक और आत्मविश्वास से भरे होते हैं।
रुद्र की मां पायल शर्मा बताती हैं कि वह बचपन से ही नई चीजें सीखने में रुचि रखता है और सवाल पूछना उसे बेहद पसंद है। परिवार भी उसे पूरा सहयोग देता है, जिससे उसकी जिज्ञासा लगातार बढ़ रही है।
रुद्र का सपना है कि वह आगे चलकर IAS अधिकारी बने और कलेक्टर बनकर देश की सेवा करे। इसके लिए वह अभी से अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रहा है और हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश करता है।
कम उम्र में इतनी बड़ी सोच और असाधारण ज्ञान के कारण रुद्र शर्मा आज न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश में प्रेरणा का स्रोत बनते जा रहे हैं।
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