1. सुबह 6 बजे ED की दबिश, दस्तावेज और डिजिटल डेटा खंगालाछत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अमर इंफ्रा ग्रुप के संचालक और बिल्डर चतुर्भुज राठी के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार सुबह करीब 6 बजे ईडी की टीम दो गाड़ियों में महेश कॉलोनी स्थित उनके निवास पहुंची और घेराबंदी कर तलाशी शुरू की।इसके साथ ही राठी के ऑफिस में भी एक साथ जांच जारी है। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खंगालना शुरू किया। टीम वित्तीय लेन-देन, निवेश और प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।सूत्रों के अनुसार अमर इंफ्रा ग्रुप के तहत 6 से अधिक फर्म संचालित होती हैं। ईडी इन सभी कंपनियों के ट्रांजेक्शन, बैंकिंग रिकॉर्ड और संदिग्ध निवेश की जांच कर रही है। हालांकि अब तक ईडी की ओर से इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।🟨 2. भारतमाला प्रोजेक्ट मुआवजा घोटाले से जुड़ रहे तारप्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई भारतमाला प्रोजेक्ट में हुए कथित मुआवजा घोटाले से जुड़ी हुई है। जांच में सामने आया है कि जिन इलाकों से यह प्रोजेक्ट गुजर रहा था, वहां कई प्रभावशाली नेताओं ने अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों के नाम पर पहले से जमीन खरीद ली थी।बाद में उन्हीं जमीनों को सरकारी अधिग्रहण के दौरान भारी मुआवजा दिलवाया गया। इस पूरे खेल में प्रॉपर्टी डीलर, बिचौलिए और कुछ राजस्व अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।ईडी को हाल ही में हुई छापेमारी में कुछ अहम दस्तावेज मिले हैं, जिनसे राजनीतिक कनेक्शन के संकेत मिले हैं। इनमें भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। चतुर्भुज राठी का नाम भी इसी नेटवर्क से जुड़ने के कारण जांच के दायरे में आया है।🟨 3. कलेक्टर से लेकर पटवारी तक जांच के घेरे मेंइस पूरे मामले में सिर्फ बिल्डर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। बताया जा रहा है कि 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टरों की भूमिका की जांच की जा रही है, जिनमें से 6 अधिकारियों पर संलिप्तता का शक जताया गया है। रायपुर, दुर्ग, कोरबा, धमतरी और बिलासपुर जैसे जिलों के नाम सामने आए हैं।आरोप है कि इन अधिकारियों ने मुआवजा प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की और बदले में मोटा कमीशन लिया। वहीं पटवारी और राजस्व निरीक्षकों ने फर्जी या संदिग्ध प्रकरण तैयार कर कलेक्टर कार्यालय को भेजे, जिन पर हस्ताक्षर के बाद मुआवजा जारी किया गया।आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) पहले ही इस मामले में FIR दर्ज कर चुकी है और तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब ईडी इस केस में मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच कर रही है और बड़े अधिकारियों व नेताओं की भूमिका खंगाल रही है।रायपुर के बाद कोरबा जिले में सबसे ज्यादा अनियमितताएं सामने आई हैं। यहां मुआवजे के वितरण में बड़े स्तर पर हेरफेर के आरोप हैं। ईडी पूर्व मंत्रियों, विधायकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ-साथ उनके करीबी रिश्तेदारों की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है।इस कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल मचा दी है, आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अमर इंफ्रा ग्रुप के संचालक और बिल्डर चतुर्भुज राठी के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार सुबह करीब 6 बजे ईडी की टीम दो गाड़ियों में महेश कॉलोनी स्थित उनके निवास पहुंची और घेराबंदी कर तलाशी शुरू की।
इसके साथ ही राठी के ऑफिस में भी एक साथ जांच जारी है। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खंगालना शुरू किया। टीम वित्तीय लेन-देन, निवेश और प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार अमर इंफ्रा ग्रुप के तहत 6 से अधिक फर्म संचालित होती हैं। ईडी इन सभी कंपनियों के ट्रांजेक्शन, बैंकिंग रिकॉर्ड और संदिग्ध निवेश की जांच कर रही है। हालांकि अब तक ईडी की ओर से इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई भारतमाला प्रोजेक्ट में हुए कथित मुआवजा घोटाले से जुड़ी हुई है। जांच में सामने आया है कि जिन इलाकों से यह प्रोजेक्ट गुजर रहा था, वहां कई प्रभावशाली नेताओं ने अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों के नाम पर पहले से जमीन खरीद ली थी।
बाद में उन्हीं जमीनों को सरकारी अधिग्रहण के दौरान भारी मुआवजा दिलवाया गया। इस पूरे खेल में प्रॉपर्टी डीलर, बिचौलिए और कुछ राजस्व अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
ईडी को हाल ही में हुई छापेमारी में कुछ अहम दस्तावेज मिले हैं, जिनसे राजनीतिक कनेक्शन के संकेत मिले हैं। इनमें भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। चतुर्भुज राठी का नाम भी इसी नेटवर्क से जुड़ने के कारण जांच के दायरे में आया है।
इस पूरे मामले में सिर्फ बिल्डर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। बताया जा रहा है कि 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टरों की भूमिका की जांच की जा रही है, जिनमें से 6 अधिकारियों पर संलिप्तता का शक जताया गया है। रायपुर, दुर्ग, कोरबा, धमतरी और बिलासपुर जैसे जिलों के नाम सामने आए हैं।
आरोप है कि इन अधिकारियों ने मुआवजा प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की और बदले में मोटा कमीशन लिया। वहीं पटवारी और राजस्व निरीक्षकों ने फर्जी या संदिग्ध प्रकरण तैयार कर कलेक्टर कार्यालय को भेजे, जिन पर हस्ताक्षर के बाद मुआवजा जारी किया गया।
आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) पहले ही इस मामले में FIR दर्ज कर चुकी है और तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब ईडी इस केस में मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच कर रही है और बड़े अधिकारियों व नेताओं की भूमिका खंगाल रही है।
रायपुर के बाद कोरबा जिले में सबसे ज्यादा अनियमितताएं सामने आई हैं। यहां मुआवजे के वितरण में बड़े स्तर पर हेरफेर के आरोप हैं। ईडी पूर्व मंत्रियों, विधायकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ-साथ उनके करीबी रिश्तेदारों की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है।
इस कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल मचा दी है, आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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