नेपाल सरकार द्वारा लागू किए गए नए ‘भंसार टैक्स’ (कस्टम ड्यूटी) ने बिहार, खासकर उत्तर बिहार के सीमावर्ती व्यापार को गहरे संकट में डाल दिया है। मुजफ्फरपुर की ऐतिहासिक सूतापट्टी मंडी, जो कपड़ा और ज्वेलरी कारोबार का बड़ा केंद्र मानी जाती है, इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होती नजर आ रही है। व्यापारियों के अनुसार, अगर यह स्थिति बनी रही तो इस साल करीब 300 करोड़ रुपए तक का नुकसान हो सकता है।दरअसल, अप्रैल से जून तक का समय शादी-विवाह का पीक सीजन होता है, जब कपड़ा और ज्वेलरी की बिक्री अपने चरम पर रहती है। सूतापट्टी मंडी में इस दौरान हर साल करीब 400 से 500 करोड़ रुपए का कारोबार होता है, जिसमें नेपाल से आने वाले ग्राहकों की बड़ी भूमिका रहती है। लेकिन इस बार नेपाल सरकार के नए टैक्स नियम ने इस पूरे समीकरण को बदल दिया है।क्या है ‘भंसार टैक्स’ और कैसे पड़ा असरनेपाल सरकार के नए नियम के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति भारत से 100 नेपाली रुपये से अधिक का सामान नेपाल ले जाता है, तो उस पर कस्टम ड्यूटी देना अनिवार्य होगा। पहले इस सीमा तक छूट मिलती थी, जिससे सीमा पार खरीदारी आसान और सस्ती रहती थी।अब नए नियम के तहत 100 नेपाली रुपये के सामान पर पहले लगभग 15% कस्टम ड्यूटी लगती है, यानी 15 रुपये। इसके बाद कुल राशि (115 रुपये) पर 13% वैट भी लागू होता है, जो करीब 14.95 रुपये होता है। इस तरह 100 रुपये का सामान नेपाल पहुंचते-पहुंचते करीब 129.95 रुपये का हो जाता है। यानी कीमत में लगभग 30% तक की बढ़ोतरी हो जाती है।यही कारण है कि नेपाली ग्राहक अब भारत आकर खरीदारी करने से बच रहे हैं और अपने देश में ही सामान खरीदना ज्यादा उचित समझ रहे हैं। इसका सीधा असर बिहार के व्यापार पर पड़ रहा है।सूतापट्टी मंडी पर गहराया संकटमुजफ्फरपुर की सूतापट्टी मंडी करीब 100 साल पुरानी है और उत्तर बिहार की सबसे बड़ी कपड़ा मंडी मानी जाती है। महाराजा अग्रसेन मार्ग पर स्थित इस बाजार की स्थापना लगभग 1915 के आसपास हुई थी, जब यहां सिर्फ 15 दुकानें थीं। आज यह मंडी 750 से अधिक कपड़ा दुकानों और सैकड़ों ज्वेलरी शोरूम्स के साथ एक विशाल व्यापारिक हब बन चुकी है।इतिहास में यह मंडी देश के टॉप-3 कपड़ा बाजारों में शामिल रही है। राजस्थान से आए मारवाड़ी व्यापारियों ने इसकी नींव रखी थी और समय के साथ यह बाजार नेपाल तक व्यापार का प्रमुख केंद्र बन गया। आज भी सूतापट्टी से 40-50% कारोबार नेपाल से जुड़ा हुआ है।लेकिन ‘भंसार टैक्स’ लागू होने के बाद यहां के व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि नेपाल के ग्राहक अब पहले की तरह बड़ी मात्रा में खरीदारी करने नहीं आ रहे हैं, जिससे बिक्री में गिरावट साफ दिखाई दे रही है।किन-किन वस्तुओं पर कितना टैक्सनए नियम के तहत अलग-अलग श्रेणियों में अलग-अलग टैक्स लगाए गए हैं। राशन जैसे जरूरी सामान पर 5-10% तक शुल्क है, जबकि कपड़ों पर 20-30% और इलेक्ट्रॉनिक्स पर 15-20% तक टैक्स लगाया गया है। वहीं, लक्जरी आइटम और कॉस्मेटिक्स पर 30% से अधिक शुल्क वसूला जा रहा है।इसके अलावा कुल कीमत पर वैट भी अलग से लगाया जाता है, जिससे वस्तुओं की अंतिम कीमत काफी बढ़ जाती है। यही कारण है कि भारतीय बाजार में सस्ता मिलने वाला सामान अब नेपाल पहुंचते-पहुंचते महंगा हो जाता है।व्यापारियों की चिंता और मांगसूतापट्टी के व्यापारी इस फैसले से खासे चिंतित हैं। उनका कहना है कि नेपाल के ग्राहक सस्ते दाम के लिए भारत आते थे, लेकिन अब टैक्स बढ़ने से उनका रुझान कम हो गया है।मारूति क्रिएशन के व्यापारी छोटू सिंह के मुताबिक, “नेपाल के लोग चाहते हैं कि उन्हें सस्ता सामान मिले, लेकिन अब उ
नेपाल सरकार द्वारा लागू किए गए नए ‘भंसार टैक्स’ (कस्टम ड्यूटी) ने बिहार, खासकर उत्तर बिहार के सीमावर्ती व्यापार को गहरे संकट में डाल दिया है। मुजफ्फरपुर की ऐतिहासिक सूतापट्टी मंडी, जो कपड़ा और ज्वेलरी कारोबार का बड़ा केंद्र मानी जाती है, इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होती नजर आ रही है। व्यापारियों के अनुसार, अगर यह स्थिति बनी रही तो इस साल करीब 300 करोड़ रुपए तक का नुकसान हो सकता है।
दरअसल, अप्रैल से जून तक का समय शादी-विवाह का पीक सीजन होता है, जब कपड़ा और ज्वेलरी की बिक्री अपने चरम पर रहती है। सूतापट्टी मंडी में इस दौरान हर साल करीब 400 से 500 करोड़ रुपए का कारोबार होता है, जिसमें नेपाल से आने वाले ग्राहकों की बड़ी भूमिका रहती है। लेकिन इस बार नेपाल सरकार के नए टैक्स नियम ने इस पूरे समीकरण को बदल दिया है।
नेपाल सरकार के नए नियम के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति भारत से 100 नेपाली रुपये से अधिक का सामान नेपाल ले जाता है, तो उस पर कस्टम ड्यूटी देना अनिवार्य होगा। पहले इस सीमा तक छूट मिलती थी, जिससे सीमा पार खरीदारी आसान और सस्ती रहती थी।
अब नए नियम के तहत 100 नेपाली रुपये के सामान पर पहले लगभग 15% कस्टम ड्यूटी लगती है, यानी 15 रुपये। इसके बाद कुल राशि (115 रुपये) पर 13% वैट भी लागू होता है, जो करीब 14.95 रुपये होता है। इस तरह 100 रुपये का सामान नेपाल पहुंचते-पहुंचते करीब 129.95 रुपये का हो जाता है। यानी कीमत में लगभग 30% तक की बढ़ोतरी हो जाती है।
यही कारण है कि नेपाली ग्राहक अब भारत आकर खरीदारी करने से बच रहे हैं और अपने देश में ही सामान खरीदना ज्यादा उचित समझ रहे हैं। इसका सीधा असर बिहार के व्यापार पर पड़ रहा है।
मुजफ्फरपुर की सूतापट्टी मंडी करीब 100 साल पुरानी है और उत्तर बिहार की सबसे बड़ी कपड़ा मंडी मानी जाती है। महाराजा अग्रसेन मार्ग पर स्थित इस बाजार की स्थापना लगभग 1915 के आसपास हुई थी, जब यहां सिर्फ 15 दुकानें थीं। आज यह मंडी 750 से अधिक कपड़ा दुकानों और सैकड़ों ज्वेलरी शोरूम्स के साथ एक विशाल व्यापारिक हब बन चुकी है।
इतिहास में यह मंडी देश के टॉप-3 कपड़ा बाजारों में शामिल रही है। राजस्थान से आए मारवाड़ी व्यापारियों ने इसकी नींव रखी थी और समय के साथ यह बाजार नेपाल तक व्यापार का प्रमुख केंद्र बन गया। आज भी सूतापट्टी से 40-50% कारोबार नेपाल से जुड़ा हुआ है।
लेकिन ‘भंसार टैक्स’ लागू होने के बाद यहां के व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि नेपाल के ग्राहक अब पहले की तरह बड़ी मात्रा में खरीदारी करने नहीं आ रहे हैं, जिससे बिक्री में गिरावट साफ दिखाई दे रही है।
नए नियम के तहत अलग-अलग श्रेणियों में अलग-अलग टैक्स लगाए गए हैं। राशन जैसे जरूरी सामान पर 5-10% तक शुल्क है, जबकि कपड़ों पर 20-30% और इलेक्ट्रॉनिक्स पर 15-20% तक टैक्स लगाया गया है। वहीं, लक्जरी आइटम और कॉस्मेटिक्स पर 30% से अधिक शुल्क वसूला जा रहा है।
इसके अलावा कुल कीमत पर वैट भी अलग से लगाया जाता है, जिससे वस्तुओं की अंतिम कीमत काफी बढ़ जाती है। यही कारण है कि भारतीय बाजार में सस्ता मिलने वाला सामान अब नेपाल पहुंचते-पहुंचते महंगा हो जाता है।
सूतापट्टी के व्यापारी इस फैसले से खासे चिंतित हैं। उनका कहना है कि नेपाल के ग्राहक सस्ते दाम के लिए भारत आते थे, लेकिन अब टैक्स बढ़ने से उनका रुझान कम हो गया है।
मारूति क्रिएशन के व्यापारी छोटू सिंह के मुताबिक, “नेपाल के लोग चाहते हैं कि उन्हें सस्ता सामान मिले, लेकिन अब उ
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