दुर्ग। भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) की ओर से कोरोना काल में मरीजों के बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए दिए गए सीएसआर फंड के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला अस्पताल, दुर्ग को 5 अप्रैल 2023 को 2 करोड़ रुपए की राशि दी गई थी, लेकिन तीन साल बाद भी इस राशि का पूरा हिसाब सामने नहीं आ सका है।जांच में सामने आया है कि इस फंड में से सीधे मिले 40 लाख रुपए से स्वास्थ्य विभाग ने एयर कंडिशनर (एसी) खरीद लिए। ये एसी मरीजों के वार्ड या वेटिंग एरिया में लगाने के बजाय अधिकारियों और डॉक्टरों के कमरों में स्थापित कर दिए गए। जिला अस्पताल के न्यू ओपीडी ब्लॉक में अधिकांश डॉक्टर कक्षों में एक या दो एसी लगे मिले, वहीं सीएस, आरएमओ और अन्य प्रशासनिक कमरों में भी नए एसी लगाए गए हैं।हैरानी की बात यह है कि जहां मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से यह राशि दी गई थी, वहीं वार्डों में इसकी कमी साफ नजर आई। केवल बर्न वार्ड में कुछ पुराने एसी लगाए गए हैं, जिन्हें अधिकारियों के कमरों से हटाकर वहां शिफ्ट किया गया।बीएसपी ने ऑडिट के दौरान खर्च का पूरा विवरण मांगा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग केवल 16.49 लाख रुपए का ही ब्योरा दे सका। इसमें भी महज 8.24 लाख रुपए का उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया। इसके बाद 2023 से 2026 तक लगातार पत्राचार किया गया और 8 जनवरी 2026 को 11वां पत्र भेजकर खर्च, फोटो, वीडियो और बिल की जानकारी मांगी गई, लेकिन अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला।सिविल सर्जन डॉ. आशीषन कुमार मिंज ने स्वीकार किया कि 40 लाख रुपए से एसी खरीदे गए थे, जबकि शेष राशि अलग-अलग विभागों द्वारा खर्च किए जाने की बात कही जा रही है।पारदर्शिता की स्थिति यह है कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी का भी 30 दिन बाद तक कोई जवाब नहीं दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मरीजों के नाम पर मिला सीएसआर फंड कहां और कैसे खर्च हुआ? यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और सिस्टम की निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
दुर्ग। भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) की ओर से कोरोना काल में मरीजों के बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए दिए गए सीएसआर फंड के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला अस्पताल, दुर्ग को 5 अप्रैल 2023 को 2 करोड़ रुपए की राशि दी गई थी, लेकिन तीन साल बाद भी इस राशि का पूरा हिसाब सामने नहीं आ सका है।
जांच में सामने आया है कि इस फंड में से सीधे मिले 40 लाख रुपए से स्वास्थ्य विभाग ने एयर कंडिशनर (एसी) खरीद लिए। ये एसी मरीजों के वार्ड या वेटिंग एरिया में लगाने के बजाय अधिकारियों और डॉक्टरों के कमरों में स्थापित कर दिए गए। जिला अस्पताल के न्यू ओपीडी ब्लॉक में अधिकांश डॉक्टर कक्षों में एक या दो एसी लगे मिले, वहीं सीएस, आरएमओ और अन्य प्रशासनिक कमरों में भी नए एसी लगाए गए हैं।
हैरानी की बात यह है कि जहां मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से यह राशि दी गई थी, वहीं वार्डों में इसकी कमी साफ नजर आई। केवल बर्न वार्ड में कुछ पुराने एसी लगाए गए हैं, जिन्हें अधिकारियों के कमरों से हटाकर वहां शिफ्ट किया गया।
बीएसपी ने ऑडिट के दौरान खर्च का पूरा विवरण मांगा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग केवल 16.49 लाख रुपए का ही ब्योरा दे सका। इसमें भी महज 8.24 लाख रुपए का उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया। इसके बाद 2023 से 2026 तक लगातार पत्राचार किया गया और 8 जनवरी 2026 को 11वां पत्र भेजकर खर्च, फोटो, वीडियो और बिल की जानकारी मांगी गई, लेकिन अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
सिविल सर्जन डॉ. आशीषन कुमार मिंज ने स्वीकार किया कि 40 लाख रुपए से एसी खरीदे गए थे, जबकि शेष राशि अलग-अलग विभागों द्वारा खर्च किए जाने की बात कही जा रही है।
पारदर्शिता की स्थिति यह है कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी का भी 30 दिन बाद तक कोई जवाब नहीं दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मरीजों के नाम पर मिला सीएसआर फंड कहां और कैसे खर्च हुआ? यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और सिस्टम की निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
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