AAP में अब तक की सबसे बड़ी टूट: राघव चड्ढा समेत कई नेताओं ने छोड़ा साथ, जानें क्यों अलग हुए योगेंद्र यादव से लेकर प्रशांत भूषण तक

🧩 क्यों छोड़ते गए नेता AAP का साथ?

AAP से नेताओं के अलग होने के पीछे मुख्य कारणों में पार्टी के अंदर लोकतंत्र की कमी, नेतृत्व शैली को लेकर असहमति और कार्यप्रणाली पर सवाल शामिल रहे हैं।

  • प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव
    पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल इन नेताओं ने AAP पर “एक व्यक्ति केंद्रित” होने और आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाया। 2015 के बाद दोनों को पार्टी से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाया।
  • शाजिया इल्मी
    पत्रकार से नेता बनीं इल्मी ने भी पार्टी में लोकतंत्र की कमी का हवाला देते हुए 2015 में इस्तीफा दे दिया और बाद में BJP में शामिल हो गईं।
  • कुमार विश्वास
    AAP के शुरुआती चेहरों में रहे विश्वास धीरे-धीरे पार्टी से दूरी बनाते गए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी की कार्यशैली पर असहमति जताई।
  • कपिल मिश्रा
    उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया। बाद में वे BJP में शामिल हो गए।
  • स्वाति मालीवाल
    हालिया विवादों के चलते उन्होंने भी पार्टी से दूरी बनाई। उन्होंने सीएम आवास से जुड़े एक मामले में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद तनाव बढ़ा।

ताजा घटनाक्रम: 2026 में बड़ा झटका

ताजा घटनाक्रम में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सहनी समेत कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। यह AAP के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

🔍 क्या हैं बड़े कारण?

  • पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी के आरोप
  • नेतृत्व शैली पर असहमति
  • भ्रष्टाचार और पारदर्शिता को लेकर सवाल
  • व्यक्तिगत और राजनीतिक मतभेद
  • बड़े फैसलों में सीमित भागीदारी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे इन इस्तीफों से AAP की संगठनात्मक मजबूती पर असर पड़ सकता है और आने वाले चुनावों में इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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