छत्तीसगढ़ के जगदलपुर सहित पूरे बस्तर अंचल से एक मानवीय और सकारात्मक बदलाव की खबर सामने आई है। कभी जंगलों में संघर्ष और असुरक्षा के बीच जीवन बिताने वाले माओवादी, जो संगठन के नियमों के कारण संतान सुख से वंचित थे, अब मुख्यधारा में लौटकर परिवार और बच्चों के साथ नई जिंदगी शुरू कर रहे हैं।दरअसल, माओवादी संगठन में शादी की अनुमति तो होती थी, लेकिन संतान पैदा करने पर रोक थी। इसी कारण कई पुरुष माओवादियों की जबरन नसबंदी कर दी जाती थी। अब सरेंडर और पुनर्वास के बाद शासन द्वारा इन पूर्व माओवादियों की रिवर्स नसबंदी (Vasectomy Reversal) कराई जा रही है।बस्तर आईजी सुंदरराज पी के अनुसार अब तक 56 पूर्व माओवादियों की नसबंदी खुलवाई जा चुकी है, जिनमें से 27 को संतान सुख भी प्राप्त हो चुका है। ये सभी अब सामान्य पारिवारिक जीवन जी रहे हैं। वहीं कई अन्य पुनर्वासित माओवादियों ने भी रिवर्स नसबंदी कराने की इच्छा जताई है, जिस पर प्रशासन आवश्यक कार्रवाई कर रहा है।आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि शासन का उद्देश्य है कि सभी पूर्व माओवादी मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जिएं और अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिता सकें।माओवादियों के पूर्व डॉक्टर डॉ. सुखलाल जुर्री ने खुलासा किया कि संगठन में पुरुष माओवादियों की ही नसबंदी की जाती थी, ताकि वे नक्सल गतिविधियों में बिना किसी पारिवारिक बाधा के शामिल रह सकें। उन्होंने बताया कि अपने 19-20 साल के कार्यकाल में उन्होंने 10 से 15 माओवादियों की नसबंदी खुद की थी।पुनर्वासित माओवादियों की भावनाएं भी इस बदलाव को दर्शाती हैं। एक पूर्व माओवादी ने बताया कि दूसरों के बच्चों को देखकर उन्हें बेहद दुख होता था, लेकिन अब संतान प्राप्ति के बाद उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे उन्हें नई जिंदगी मिल गई हो।वहीं हाल ही में सरेंडर करने वाले DVCM सोमडु पोड़ियाम ने भी रिवर्स नसबंदी की इच्छा जताई है, ताकि वे भी सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकें।यह पहल न केवल पुनर्वास नीति की सफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे एक समय हिंसा के रास्ते पर चलने वाले लोग अब समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक नई शुरुआत कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर सहित पूरे बस्तर अंचल से एक मानवीय और सकारात्मक बदलाव की खबर सामने आई है। कभी जंगलों में संघर्ष और असुरक्षा के बीच जीवन बिताने वाले माओवादी, जो संगठन के नियमों के कारण संतान सुख से वंचित थे, अब मुख्यधारा में लौटकर परिवार और बच्चों के साथ नई जिंदगी शुरू कर रहे हैं।
दरअसल, माओवादी संगठन में शादी की अनुमति तो होती थी, लेकिन संतान पैदा करने पर रोक थी। इसी कारण कई पुरुष माओवादियों की जबरन नसबंदी कर दी जाती थी। अब सरेंडर और पुनर्वास के बाद शासन द्वारा इन पूर्व माओवादियों की रिवर्स नसबंदी (Vasectomy Reversal) कराई जा रही है।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी के अनुसार अब तक 56 पूर्व माओवादियों की नसबंदी खुलवाई जा चुकी है, जिनमें से 27 को संतान सुख भी प्राप्त हो चुका है। ये सभी अब सामान्य पारिवारिक जीवन जी रहे हैं। वहीं कई अन्य पुनर्वासित माओवादियों ने भी रिवर्स नसबंदी कराने की इच्छा जताई है, जिस पर प्रशासन आवश्यक कार्रवाई कर रहा है।
आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि शासन का उद्देश्य है कि सभी पूर्व माओवादी मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जिएं और अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिता सकें।
माओवादियों के पूर्व डॉक्टर डॉ. सुखलाल जुर्री ने खुलासा किया कि संगठन में पुरुष माओवादियों की ही नसबंदी की जाती थी, ताकि वे नक्सल गतिविधियों में बिना किसी पारिवारिक बाधा के शामिल रह सकें। उन्होंने बताया कि अपने 19-20 साल के कार्यकाल में उन्होंने 10 से 15 माओवादियों की नसबंदी खुद की थी।
पुनर्वासित माओवादियों की भावनाएं भी इस बदलाव को दर्शाती हैं। एक पूर्व माओवादी ने बताया कि दूसरों के बच्चों को देखकर उन्हें बेहद दुख होता था, लेकिन अब संतान प्राप्ति के बाद उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे उन्हें नई जिंदगी मिल गई हो।
वहीं हाल ही में सरेंडर करने वाले DVCM सोमडु पोड़ियाम ने भी रिवर्स नसबंदी की इच्छा जताई है, ताकि वे भी सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकें।
यह पहल न केवल पुनर्वास नीति की सफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे एक समय हिंसा के रास्ते पर चलने वाले लोग अब समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक नई शुरुआत कर रहे हैं।
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