छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 36 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। हादसा इतना भयावह था कि मजदूर 500 से 600 डिग्री सेल्सियस तक गर्म स्टीम की चपेट में आ गए, जिससे उनके शरीर बुरी तरह झुलस गए।मृतकों में कई ऐसे चेहरे हैं जिनकी जिंदगी अभी शुरू ही हुई थी। झारखंड के रहने वाले अब्दुल करीम की शादी महज 20 दिन पहले ही हुई थी। उनके हाथों की मेहंदी का रंग भी फीका नहीं पड़ा था कि इस हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली। वहीं बिहार के आकिब खान 13 अप्रैल को ही छुट्टी के बाद काम पर लौटे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह उनका आखिरी दिन साबित होगा।हादसे के बाद घायलों को रायगढ़ और रायपुर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। रायपुर के कालड़ा अस्पताल में भर्ती दो मजदूरों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, दोनों 90 प्रतिशत तक जल चुके हैं और अगले 48 घंटे उनके लिए बेहद अहम हैं।इस बीच एक बड़ा खुलासा भी सामने आया है। घटना से पहले प्लांट प्रशासन द्वारा 27 मार्च से एक सप्ताह के लिए यूनिट शटडाउन करने का नोटिस जारी किया गया था। साथ ही सेफ्टी ट्रेनिंग देने की बात भी कही गई थी, जिसमें हाल ही में हुए दो हादसों का जिक्र किया गया था। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वे कौन से हादसे थे, लेकिन मजदूरों का दावा है कि पिछले महीने भी प्लांट में दो घटनाएं हो चुकी थीं।अब सवाल उठ रहे हैं कि जब पहले से हादसों के संकेत मिल चुके थे, तो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर कदम क्यों नहीं उठाए गए? क्या यह हादसा लापरवाही का नतीजा है या सिस्टम की बड़ी विफलता?फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं, जबकि मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है और घायलों की जिंदगी के लिए अस्पतालों में जंग जारी है।
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 36 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। हादसा इतना भयावह था कि मजदूर 500 से 600 डिग्री सेल्सियस तक गर्म स्टीम की चपेट में आ गए, जिससे उनके शरीर बुरी तरह झुलस गए।
मृतकों में कई ऐसे चेहरे हैं जिनकी जिंदगी अभी शुरू ही हुई थी। झारखंड के रहने वाले अब्दुल करीम की शादी महज 20 दिन पहले ही हुई थी। उनके हाथों की मेहंदी का रंग भी फीका नहीं पड़ा था कि इस हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली। वहीं बिहार के आकिब खान 13 अप्रैल को ही छुट्टी के बाद काम पर लौटे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह उनका आखिरी दिन साबित होगा।
हादसे के बाद घायलों को रायगढ़ और रायपुर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। रायपुर के कालड़ा अस्पताल में भर्ती दो मजदूरों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, दोनों 90 प्रतिशत तक जल चुके हैं और अगले 48 घंटे उनके लिए बेहद अहम हैं।
इस बीच एक बड़ा खुलासा भी सामने आया है। घटना से पहले प्लांट प्रशासन द्वारा 27 मार्च से एक सप्ताह के लिए यूनिट शटडाउन करने का नोटिस जारी किया गया था। साथ ही सेफ्टी ट्रेनिंग देने की बात भी कही गई थी, जिसमें हाल ही में हुए दो हादसों का जिक्र किया गया था। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वे कौन से हादसे थे, लेकिन मजदूरों का दावा है कि पिछले महीने भी प्लांट में दो घटनाएं हो चुकी थीं।
अब सवाल उठ रहे हैं कि जब पहले से हादसों के संकेत मिल चुके थे, तो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर कदम क्यों नहीं उठाए गए? क्या यह हादसा लापरवाही का नतीजा है या सिस्टम की बड़ी विफलता?
फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं, जबकि मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है और घायलों की जिंदगी के लिए अस्पतालों में जंग जारी है।
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