छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन क्षेत्र से जमीन खरीद-फरोख्त के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति से 11 लाख रुपये लेने के बाद भी आरोपियों ने जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई। लंबे समय तक टालमटोल के बाद मामला कोर्ट पहुंचा, जहां से आदेश मिलने के बाद पुलिस ने 4 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।परिवादी अश्वनी कुमार डडसेना (59), निवासी बालोद जिले के ग्राम अंगारी ने शिकायत में बताया कि उन्होंने ग्राम केसरा, तहसील पाटन स्थित 0.93 हेक्टेयर जमीन खरीदने के लिए आरोपियों से 11 लाख रुपये में सौदा तय किया था। सौदे के तहत उन्होंने अलग-अलग तारीखों में RTGS के माध्यम से पूरी रकम आरोपियों के खातों में ट्रांसफर कर दी—जिसमें गणेश्वर सिन्हा को 5 लाख और नीलमनी व खेमीन सिन्हा को 3-3 लाख रुपये दिए गए।आरोप है कि पूरी राशि मिलने के बावजूद आरोपियों ने रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी नहीं की। 25 अगस्त को दुर्ग रजिस्ट्री कार्यालय में दस्तावेज तैयार होने के बाद भी ‘सर्वर डाउन’ का हवाला देकर रजिस्ट्री टाल दी गई। इसके बाद 29 अगस्त को पाटन कार्यालय में आने का आश्वासन दिया गया, लेकिन आरोपी वहां भी उपस्थित नहीं हुए।पीड़ित ने कई बार संपर्क कर रजिस्ट्री कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर प्रक्रिया को टाला गया। आखिरकार 18 सितंबर 2025 को विधिक नोटिस भेजा गया, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला।मामले में पुलिस स्तर पर कार्रवाई न होने के कारण पीड़ित ने 5 मार्च 2026 को रानीतराई थाने और 9 मार्च को एसपी दुर्ग से भी शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद न्याय की उम्मीद में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पाटन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए FIR दर्ज करने के निर्देश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद रानीतराई पुलिस ने गणेश्वर प्रसाद सिन्हा, नीलमनी सिन्हा, खेमीन सिन्हा और लिकेश्वरी सिन्हा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 और 111 के तहत मामला दर्ज किया है।साथ ही कोर्ट ने पुलिस को 7 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। शुरुआती जांच में मामला आर्थिक धोखाधड़ी का प्रतीत हो रहा है, वहीं पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने पहले भी इस तरह की वारदात को अंजाम दिया है।कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई से पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं यह मामला जमीन सौदों में सावधानी बरतने की भी बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन क्षेत्र से जमीन खरीद-फरोख्त के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति से 11 लाख रुपये लेने के बाद भी आरोपियों ने जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई। लंबे समय तक टालमटोल के बाद मामला कोर्ट पहुंचा, जहां से आदेश मिलने के बाद पुलिस ने 4 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परिवादी अश्वनी कुमार डडसेना (59), निवासी बालोद जिले के ग्राम अंगारी ने शिकायत में बताया कि उन्होंने ग्राम केसरा, तहसील पाटन स्थित 0.93 हेक्टेयर जमीन खरीदने के लिए आरोपियों से 11 लाख रुपये में सौदा तय किया था। सौदे के तहत उन्होंने अलग-अलग तारीखों में RTGS के माध्यम से पूरी रकम आरोपियों के खातों में ट्रांसफर कर दी—जिसमें गणेश्वर सिन्हा को 5 लाख और नीलमनी व खेमीन सिन्हा को 3-3 लाख रुपये दिए गए।
आरोप है कि पूरी राशि मिलने के बावजूद आरोपियों ने रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी नहीं की। 25 अगस्त को दुर्ग रजिस्ट्री कार्यालय में दस्तावेज तैयार होने के बाद भी ‘सर्वर डाउन’ का हवाला देकर रजिस्ट्री टाल दी गई। इसके बाद 29 अगस्त को पाटन कार्यालय में आने का आश्वासन दिया गया, लेकिन आरोपी वहां भी उपस्थित नहीं हुए।
पीड़ित ने कई बार संपर्क कर रजिस्ट्री कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर प्रक्रिया को टाला गया। आखिरकार 18 सितंबर 2025 को विधिक नोटिस भेजा गया, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला।
मामले में पुलिस स्तर पर कार्रवाई न होने के कारण पीड़ित ने 5 मार्च 2026 को रानीतराई थाने और 9 मार्च को एसपी दुर्ग से भी शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद न्याय की उम्मीद में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पाटन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए FIR दर्ज करने के निर्देश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद रानीतराई पुलिस ने गणेश्वर प्रसाद सिन्हा, नीलमनी सिन्हा, खेमीन सिन्हा और लिकेश्वरी सिन्हा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 और 111 के तहत मामला दर्ज किया है।
साथ ही कोर्ट ने पुलिस को 7 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। शुरुआती जांच में मामला आर्थिक धोखाधड़ी का प्रतीत हो रहा है, वहीं पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने पहले भी इस तरह की वारदात को अंजाम दिया है।
कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई से पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं यह मामला जमीन सौदों में सावधानी बरतने की भी बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है।
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