छत्तीसगढ़ में पहली बार अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) का बड़ा प्रकोप सामने आया है, जिसने प्रशासन और पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक स्थित मुड़पार क्षेत्र में इस घातक वायरस के चलते 300 से अधिक सुअरों की मौत हो चुकी है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभावित क्षेत्र के 1 किलोमीटर दायरे को “इन्फेक्टेड जोन” और 1 से 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र को “सर्विलांस जोन” घोषित कर दिया है। इस दायरे में आने वाले 21 गांवों और 5 शहरी वार्डों में सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं।कलेक्टर अभिजीत सिंह के अनुसार, इन्फेक्टेड जोन से सुअरों और उनसे जुड़े उत्पादों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। वहीं सर्विलांस जोन में सुअर बाजार, मांस की दुकानें और डोर-टू-डोर सप्लाई सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं।प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता और पशु रोग नियंत्रण अधिनियम 2009 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।संक्रमण को रोकने के लिए वैज्ञानिकों की टीम सक्रिय हो गई है और वायरस के स्रोत का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच और सर्वे किया जा रहा है। कुछ संक्रमित सुअरों को संक्रमण फैलने से रोकने के लिए नियंत्रित तरीके से नष्ट भी किया गया है।यह घटना राज्य के लिए चेतावनी है, क्योंकि अफ्रीकी स्वाइन फीवर तेजी से फैलने वाला और अत्यधिक घातक वायरस है, जिसका असर सीधे पशुपालन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
छत्तीसगढ़ में पहली बार अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) का बड़ा प्रकोप सामने आया है, जिसने प्रशासन और पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक स्थित मुड़पार क्षेत्र में इस घातक वायरस के चलते 300 से अधिक सुअरों की मौत हो चुकी है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभावित क्षेत्र के 1 किलोमीटर दायरे को “इन्फेक्टेड जोन” और 1 से 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र को “सर्विलांस जोन” घोषित कर दिया है। इस दायरे में आने वाले 21 गांवों और 5 शहरी वार्डों में सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं।
कलेक्टर अभिजीत सिंह के अनुसार, इन्फेक्टेड जोन से सुअरों और उनसे जुड़े उत्पादों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। वहीं सर्विलांस जोन में सुअर बाजार, मांस की दुकानें और डोर-टू-डोर सप्लाई सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं।
प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता और पशु रोग नियंत्रण अधिनियम 2009 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
संक्रमण को रोकने के लिए वैज्ञानिकों की टीम सक्रिय हो गई है और वायरस के स्रोत का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच और सर्वे किया जा रहा है। कुछ संक्रमित सुअरों को संक्रमण फैलने से रोकने के लिए नियंत्रित तरीके से नष्ट भी किया गया है।
यह घटना राज्य के लिए चेतावनी है, क्योंकि अफ्रीकी स्वाइन फीवर तेजी से फैलने वाला और अत्यधिक घातक वायरस है, जिसका असर सीधे पशुपालन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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