नई दिल्ली में आगामी संसद के विशेष सत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। इस व्हिप के तहत 16 से 18 अप्रैल 2026 तक चलने वाले विशेष सत्र के दौरान सभी सांसदों की सदन में अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी ने साफ कर दिया है कि इन तीनों दिनों के दौरान किसी भी सांसद को छुट्टी नहीं दी जाएगी।यह विशेष सत्र खासतौर पर महिला आरक्षण से जुड़े अहम संशोधनों पर केंद्रित होगा। सरकार की ओर से 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव की तैयारी है, जिसमें महिला आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने की व्यवस्था में संशोधन प्रस्तावित है। जनगणना में देरी को देखते हुए सरकार अब 2011 के आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ने का विचार कर रही है।इसी बीच विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस विशेष सत्र पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को विश्वास में लिए बिना सत्र बुलाया गया है और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।खड़गे ने सुझाव दिया कि मौजूदा राज्य चुनावों के बाद 29 अप्रैल के पश्चात एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि सभी राजनीतिक दलों की सहमति से इस ऐतिहासिक कानून पर सार्थक चर्चा हो सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में आगे बढ़ा रही है।
नई दिल्ली में आगामी संसद के विशेष सत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। इस व्हिप के तहत 16 से 18 अप्रैल 2026 तक चलने वाले विशेष सत्र के दौरान सभी सांसदों की सदन में अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी ने साफ कर दिया है कि इन तीनों दिनों के दौरान किसी भी सांसद को छुट्टी नहीं दी जाएगी।
यह विशेष सत्र खासतौर पर महिला आरक्षण से जुड़े अहम संशोधनों पर केंद्रित होगा। सरकार की ओर से 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव की तैयारी है, जिसमें महिला आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने की व्यवस्था में संशोधन प्रस्तावित है। जनगणना में देरी को देखते हुए सरकार अब 2011 के आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ने का विचार कर रही है।
इसी बीच विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस विशेष सत्र पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को विश्वास में लिए बिना सत्र बुलाया गया है और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
खड़गे ने सुझाव दिया कि मौजूदा राज्य चुनावों के बाद 29 अप्रैल के पश्चात एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि सभी राजनीतिक दलों की सहमति से इस ऐतिहासिक कानून पर सार्थक चर्चा हो सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में आगे बढ़ा रही है।
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