छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से न्यायपालिका को चुनौती देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां गुंडरदेही में पदस्थ प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार देवांगन को एक गुमनाम पत्र के जरिए जान से मारने की धमकी दी गई है। इस धमकी में न सिर्फ मजिस्ट्रेट बल्कि उनके पूरे परिवार को निशाना बनाया गया है, जिससे प्रशासनिक और न्यायिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।जानकारी के अनुसार, मजिस्ट्रेट को एक बंद लिफाफा मिला, जिसे खोलने पर उसमें धमकी भरा पत्र मिला। पत्र में साफ तौर पर लिखा गया था कि यदि 3 करोड़ रुपये की फिरौती नहीं दी गई, तो उनके परिवार समेत हत्या कर दी जाएगी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पत्र भेजने वाले ने खुद को नक्सली संगठन से जुड़ा बताया है।हालांकि, पुलिस इस दावे को लेकर सतर्कता बरत रही है और हर एंगल से जांच कर रही है। पुलिस का मानना है कि यह किसी शरारती तत्व की साजिश भी हो सकती है, जो नक्सलियों के नाम का इस्तेमाल कर दहशत फैलाना चाहता है।मजिस्ट्रेट की शिकायत के बाद गुंडरदेही थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच के लिए साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई है, जो पत्र के स्रोत, हैंडराइटिंग और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है।सुरक्षा के मद्देनजर न्यायिक अधिकारी के निवास और कार्यस्थल पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। साथ ही आसपास के सीसीटीवी फुटेज और डाक व्यवस्था की भी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया जा सके।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से न्यायपालिका को चुनौती देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां गुंडरदेही में पदस्थ प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार देवांगन को एक गुमनाम पत्र के जरिए जान से मारने की धमकी दी गई है। इस धमकी में न सिर्फ मजिस्ट्रेट बल्कि उनके पूरे परिवार को निशाना बनाया गया है, जिससे प्रशासनिक और न्यायिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, मजिस्ट्रेट को एक बंद लिफाफा मिला, जिसे खोलने पर उसमें धमकी भरा पत्र मिला। पत्र में साफ तौर पर लिखा गया था कि यदि 3 करोड़ रुपये की फिरौती नहीं दी गई, तो उनके परिवार समेत हत्या कर दी जाएगी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पत्र भेजने वाले ने खुद को नक्सली संगठन से जुड़ा बताया है।
हालांकि, पुलिस इस दावे को लेकर सतर्कता बरत रही है और हर एंगल से जांच कर रही है। पुलिस का मानना है कि यह किसी शरारती तत्व की साजिश भी हो सकती है, जो नक्सलियों के नाम का इस्तेमाल कर दहशत फैलाना चाहता है।
मजिस्ट्रेट की शिकायत के बाद गुंडरदेही थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच के लिए साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई है, जो पत्र के स्रोत, हैंडराइटिंग और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है।
सुरक्षा के मद्देनजर न्यायिक अधिकारी के निवास और कार्यस्थल पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। साथ ही आसपास के सीसीटीवी फुटेज और डाक व्यवस्था की भी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया जा सके।
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