Raipur में छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राज्यपाल द्वारा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष Deepak Baij ने कहा कि राज्यपाल ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस कानून का दुरुपयोग निर्दोष लोगों के खिलाफ न हो।दीपक बैज ने राज्यपाल से यह भी मांग की कि छत्तीसगढ़ में पिछले साढ़े तीन साल से लंबित आरक्षण संशोधन विधेयक पर भी जल्द फैसला लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में आदिवासी, अनुसूचित जाति और ओबीसी वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए कानून बनाया गया था, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा लाए गए विधेयकों पर त्वरित कार्रवाई होती है, जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के विधेयक को लंबे समय से लंबित रखा गया है। बैज ने “डबल इंजन” सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब राज्य और केंद्र दोनों जगह एक ही दल की सरकार है और राज्यपाल की नियुक्ति भी केंद्र द्वारा की जाती है, तो ऐसे में इस तरह का “दोहरा मापदंड” क्यों अपनाया जा रहा है।उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की और कहा कि जनता के हित से जुड़े मामलों में देरी स्वीकार्य नहीं है।
Raipur में छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राज्यपाल द्वारा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष Deepak Baij ने कहा कि राज्यपाल ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस कानून का दुरुपयोग निर्दोष लोगों के खिलाफ न हो।
दीपक बैज ने राज्यपाल से यह भी मांग की कि छत्तीसगढ़ में पिछले साढ़े तीन साल से लंबित आरक्षण संशोधन विधेयक पर भी जल्द फैसला लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में आदिवासी, अनुसूचित जाति और ओबीसी वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए कानून बनाया गया था, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा लाए गए विधेयकों पर त्वरित कार्रवाई होती है, जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के विधेयक को लंबे समय से लंबित रखा गया है। बैज ने “डबल इंजन” सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब राज्य और केंद्र दोनों जगह एक ही दल की सरकार है और राज्यपाल की नियुक्ति भी केंद्र द्वारा की जाती है, तो ऐसे में इस तरह का “दोहरा मापदंड” क्यों अपनाया जा रहा है।
उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की और कहा कि जनता के हित से जुड़े मामलों में देरी स्वीकार्य नहीं है।
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