झीरम कांड का सियासी मर्म: ये तेरा सच, ये मेरा सच… असली सच अब भी गुम झीरम का दर्द और सियासत: सच कई, लेकिन सच आज भी अधूरा

झीरम कांड के दर्द का सियासी मर्म : ये तेरा सच, ये मेरा सच, पर सच बड़ा अजीब है क्योंकि सियासत के ये "दाग अच्छे नहीं" रायपुर : 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद की समाप्ति को लेकर के चल रही तैयारी अब बयानों में चुप हो गई है. हकीकत में कहां है, ये तो नक्सल अभियान चलाने वाले पदाधिकारी जाने या फिर पदाधिकारियों की रिपोर्ट पर इसकी मॉनिटरिंग करने वाले लोग जो सत्ता के शिखर में हैं, सरकार में है या इस व्यवस्था के हिस्सेदार हैं. 31 मार्च 2026 के लिए जो तैयारी छत्तीसगढ़ ने कर रखी थी उसमें यह माना जा रहा था कि एक विधिवत ऐलान इस बात का कर दिया जाएगा कि नक्सल छत्तीसगढ़ से खत्म हो गया. लेकिन 31 मार्च 2026 के पहले 30 मार्च 2026 को देश के संसद में जो हुआ उसमें नक्सलवाद पर बहुत कुछ बोलने का मुद्दा तो बंद हो गया, लेकिन झीरम कांड पर बात उठी तो सियासत में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया. संसद में शाह ने कहा चेहरे हो जाएंगे बेनकाब नक्सल खत्म हुआ इस पर कोई बड़ा उत्तर नहीं है. लेकिन सियासत बड़ी शुरू हो गई. यह हर स्तर पर दिखने लगा है. 30 मार्च 2026 को संसद में अपने बयान के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि झीरम में जो कुछ हुआ अगर उसकी बात में सामने रख दूं तो बहुत सारे चेहरे बेनकाब हो जाएंगे. 2019 के बाद कांग्रेस की जो सरकार छत्तीसगढ़ में रही उसने नक्सल अभियान को कोई जगह ही नहीं दी. जो सहयोग मिलना था वह सहयोग नहीं मिला.अमित शाह ने कहा कि इसके कारण नक्सली समाप्ति को लेकर हमें काफी मेहनत करनी पड़ी. कांग्रेस के लोगों द्वारा सदन में विरोध किए जाने के बाद गृहमंत्री ने यहां तक कह दिया आप भूपेश बघेल से पूछ लों कि क्या कुछ हुआ. अगर मैं इस जगह पर नाम और मुद्दे खोल दूंगा तो कई चेहरे पर नकाब हो जाएंगे. संसद से बात निकली तो इसकी सियासत शुरू हो गई. गृहमंत्री अमित शाह के बयान के कुछ घंटे बाद ही छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ऐलान कर दिया कि मैं गृहमंत्री को चुनौती देता हूं कोई इस बात को साबित करें कि छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे नक्सल अभियान में ऐसी कौन सी बातें थी जो केंद्र सरकार ने हमें करने के लिए कही थी और हमने नहीं किया. केंद्र ने कभी नहीं जताई आपत्ति' भूपेश बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक या नक्सल प्रभावित इलाके की समन्वय समिति की होने वाली बैठक में राज्य के डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी भी शामिल रहते थे. जो भी बैठकें हुई हैं उसमें एक भी ऐसी बात नहीं कही गई है जो छत्तीसगढ़ में चल रही सरकार के विपक्ष में हो.भूपेश बघेल ने कहा कि कभी भी यह नहीं कहा गया कि सहयोग नहीं हो रहा है. इसके लिए कोई पत्र भेजा गया हो जिसमें लिखा गया हो कि आप सहयोग नहीं दे रहे हैं. कोई भी आपत्ति पत्र भेजा गया हो. केन्द्र सरकार के तरफ से ऐसा कुछ आया ही नहीं था. सीएम साय ने पूछा कहां है जेब वाला वो सबूत छ्त्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि आज नक्सलवाद पर हमने विजय पाया है. नक्सलवाद समाप्त हो रहा है. जहां तक जनता से श्रेय लेने की बात है जनता इस बात को जानती है कि श्रेय किसे देना है. सीएम साय ने कहा कि जब हम लोगों की सरकार थी डॉ. रमन सिंह जी के नेतृत्व में, उस समय भूपेश बघेल नेता प्रतिपक्ष थे. सीएम ने कहा कि वे बराबर कहते थे कि झीरम घाटी का सबूत हमारी जेब में है. उसके बाद उनको जनता ने जनादेश दिया, सरकार में बैठाया और पांच साल उनकी सरकार चली. लेकिन सरकार में ना वो झीरम घाटी की जांच करा पाएं, और ना उनकी जेब वाला वो सबूत निकला. सीएम साय ने भी उस बात का जिक्र किया जिसे सदन में अमित शाह ने कहा था. राहुल गांधी के नक्सल संबंध को लेकर सदन में अमित शाह ने कहा था. हालांकि ये बयान छ्त्तीसगढ़ तक पहुंचा और झीरम घांटी के मुद्दे पर इंडिया गेट पर हुए जश्न की राजनीति से बयान को मजबूत किया गया. सीएम साय ने कहा कि “राहुल गांधी जी ने जो देश जोड़ो यात्रा निकाली थी, उस दरमियान उन्होंने अनेकों जगह जो नक्सली थे उनके साथ उनकी मुलाकात हुई. कई जगह नक्सलियों ने उनके साथ मंच साझा किया. हिड़मा जैसा दुर्दांत नक्सली न्यूट्रीलाइज़ हुआ. इसने सैंकड़ों लोगों को जिसमें हमारे जवान भी थे, उनको मारा और जब वो स्वयं न्यूट्रीलाइज़ हुआ तो कांग्रेस के बड़े नेता ने समर्थन में ट्वीट किया. छ्त्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया टिप्पणी की. उन्होंने केपीएस गिल के एक बयान का पेपर कटिंग शेयर किया है. एक अखबार की कतरन है जिसमें केपीएस गिल ने कहा कि रमन सिंह ने मुझे कहा था कि वेतन लो और मौज करो. इससे ज्यादा

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