नई दिल्ली में रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने गुरुवार को बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का डिफेंस एक्सपोर्ट बढ़कर ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 62.66 फीसदी की बड़ी वृद्धि को दर्शाता है।रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह वृद्धि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर वैश्विक भरोसे का प्रमाण है। उन्होंने इसे “भारत की डिफेंस एक्सपोर्ट सफलता की कहानी” बताया।इस उपलब्धि में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर दोनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) का हिस्सा 54.84 फीसदी रहा, जबकि प्राइवेट इंडस्ट्री ने 45.16 फीसदी योगदान दिया। यह एक मजबूत और आत्मनिर्भर डिफेंस इकोसिस्टम की ओर संकेत करता है।रक्षा मंत्री ने बताया कि इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था, जबकि निर्यात करीब ₹24,000 करोड़ के स्तर पर पहुंचा था। सरकार ने 2029-30 तक डिफेंस एक्सपोर्ट को ₹50,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।प्राइवेट सेक्टर की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह सेक्टर डिफेंस प्रोडक्शन में करीब 25 फीसदी योगदान दे रहा है, जिसे भविष्य में 50 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य है।इसके साथ ही उन्होंने बताया कि Indian Navy के लिए बनाए जा रहे सभी वॉरशिप और सबमरीन अब भारत में ही डिजाइन, इंजीनियर और निर्मित किए जा रहे हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
नई दिल्ली में रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने गुरुवार को बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का डिफेंस एक्सपोर्ट बढ़कर ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 62.66 फीसदी की बड़ी वृद्धि को दर्शाता है।
रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह वृद्धि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर वैश्विक भरोसे का प्रमाण है। उन्होंने इसे “भारत की डिफेंस एक्सपोर्ट सफलता की कहानी” बताया।
इस उपलब्धि में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर दोनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) का हिस्सा 54.84 फीसदी रहा, जबकि प्राइवेट इंडस्ट्री ने 45.16 फीसदी योगदान दिया। यह एक मजबूत और आत्मनिर्भर डिफेंस इकोसिस्टम की ओर संकेत करता है।
रक्षा मंत्री ने बताया कि इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था, जबकि निर्यात करीब ₹24,000 करोड़ के स्तर पर पहुंचा था। सरकार ने 2029-30 तक डिफेंस एक्सपोर्ट को ₹50,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
प्राइवेट सेक्टर की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह सेक्टर डिफेंस प्रोडक्शन में करीब 25 फीसदी योगदान दे रहा है, जिसे भविष्य में 50 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि Indian Navy के लिए बनाए जा रहे सभी वॉरशिप और सबमरीन अब भारत में ही डिजाइन, इंजीनियर और निर्मित किए जा रहे हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
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