छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे को लेकर बड़ी बात सामने आई है। प्रदेश के डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने दावा किया है कि 31 मार्च तक राज्य में सशस्त्र नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो चुका है। अब सरकार का पूरा फोकस बस्तर के विकास पर रहेगा।रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि राज्य में अब कहीं भी आर्म्ड नक्सल कैडर सक्रिय नहीं है। उन्होंने बताया कि जो कुछ कार्यकर्ता बचे हैं, उनके भी जल्द आत्मसमर्पण करने की उम्मीद है।उन्होंने कहा कि बस्तर, जिसे कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, अब विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। हालांकि, उन्होंने माना कि बस्तर में विकास अब सबसे बड़ी चुनौती है और इसके लिए पर्यावरण संरक्षण, आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और युवाओं को आर्थिक अवसर देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।डिप्टी सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि विकास और उग्रवाद को आपस में जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि विकास एक सतत प्रक्रिया है और इसकी कमी का मतलब यह नहीं कि लोग हथियार उठाएंगे।शर्मा ने सरगुजा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नक्सलवाद खत्म हुए एक दशक से ज्यादा समय हो गया, फिर भी विकास की चुनौतियां बनी हुई हैं।“विकास एक सतत प्रक्रिया है... यह कहीं भी पूरी तरह खत्म नहीं होता। हमें लगातार काम करना होगा।”डिप्टी सीएम ने बस्तर के युवाओं की प्रतिभा पर भरोसा जताते हुए कहा कि आने वाले समय में यहां के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भी बस्तर के खिलाड़ी पदक जीत सकते हैं।साथ ही उन्होंने कहा कि बस्तर की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिए क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी और लघु वनोपज आधारित आर्थिक मॉडल को आगे बढ़ाया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे को लेकर बड़ी बात सामने आई है। प्रदेश के डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने दावा किया है कि 31 मार्च तक राज्य में सशस्त्र नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो चुका है। अब सरकार का पूरा फोकस बस्तर के विकास पर रहेगा।
रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि राज्य में अब कहीं भी आर्म्ड नक्सल कैडर सक्रिय नहीं है। उन्होंने बताया कि जो कुछ कार्यकर्ता बचे हैं, उनके भी जल्द आत्मसमर्पण करने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि बस्तर, जिसे कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, अब विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। हालांकि, उन्होंने माना कि बस्तर में विकास अब सबसे बड़ी चुनौती है और इसके लिए पर्यावरण संरक्षण, आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और युवाओं को आर्थिक अवसर देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
डिप्टी सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि विकास और उग्रवाद को आपस में जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि विकास एक सतत प्रक्रिया है और इसकी कमी का मतलब यह नहीं कि लोग हथियार उठाएंगे।
शर्मा ने सरगुजा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नक्सलवाद खत्म हुए एक दशक से ज्यादा समय हो गया, फिर भी विकास की चुनौतियां बनी हुई हैं।
“विकास एक सतत प्रक्रिया है... यह कहीं भी पूरी तरह खत्म नहीं होता। हमें लगातार काम करना होगा।”
डिप्टी सीएम ने बस्तर के युवाओं की प्रतिभा पर भरोसा जताते हुए कहा कि आने वाले समय में यहां के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भी बस्तर के खिलाड़ी पदक जीत सकते हैं।
साथ ही उन्होंने कहा कि बस्तर की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिए क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी और लघु वनोपज आधारित आर्थिक मॉडल को आगे बढ़ाया जाएगा।
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