राजधानी की हवा में जहर घोलने वाले औद्योगिक इकाइयों पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने अब नोटिस के बजाय सीधे कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार अब तक उरला, सिलतरा और सरोरा इलाके के 30 उद्योगों को उत्पादन बंद कराने के साथ बिजली कनेक्शन काट दिए गए हैं। हाल ही में कई औद्योगिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कार्रवाई की मांग उठी थी। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की जांच में यह सामने आया है कि कई उद्योग भारी मशीनों के कारण इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को रात के अंधेरे में बंद कर देते थे, जिससे वायु गुणवत्ता खराब होती है।कार्रवाई की रिपोर्ट कार्ड30 उद्योग पूरी तरह बंद, बिजली काटी गई23 इकाइयों पर करीब 1 करोड़ का जुर्माना13 उद्योगों पर 28.92 लाख रुपए जुर्माना10 और मामलों में 2.5 लाख से 3 लाख रुपए तक जुर्मानाबीमारियां: अस्थमा, त्वचा रोग और आंखों में जलन की समस्या बढ़ी। छोटे बच्चों में अधिक असर देखा गया है।उरला-सिलतरा रोड पर, बड़े नामों पर भी गिरी गाजकार्रवाई की जद में कई बड़ी कंपनियां भी आई हैं। जांच में सामने आया कि कई कंपनियां रात में प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम बंद रखती थीं। इसके चलते आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण स्तर बढ़ गया था।5 लाख से 50 लाख तक का जुर्मानाबिना अनुमति किसी भी निजी या सरकारी जमीन पर राख (ऐश) फेंकने पर 5 लाख से 50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उद्योगों को नोटिस और सुनवाई के बाद ही यह कार्रवाई की जा रही है।सुधार होने तक फैक्ट्री रहेगी बंदपर्यावरण मंडल ने स्पष्ट किया है कि पहले सुधार, बाद में उत्पादन की नीति अपनाई जाएगी। जब तक उद्योग सभी मानकों का पालन नहीं करेंगे, तब तक उन्हें दोबारा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
राजधानी की हवा में जहर घोलने वाले औद्योगिक इकाइयों पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने अब नोटिस के बजाय सीधे कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार अब तक उरला, सिलतरा और सरोरा इलाके के 30 उद्योगों को उत्पादन बंद कराने के साथ बिजली कनेक्शन काट दिए गए हैं। हाल ही में कई औद्योगिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कार्रवाई की मांग उठी थी। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की जांच में यह सामने आया है कि कई उद्योग भारी मशीनों के कारण इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को रात के अंधेरे में बंद कर देते थे, जिससे वायु गुणवत्ता खराब होती है।
बीमारियां: अस्थमा, त्वचा रोग और आंखों में जलन की समस्या बढ़ी। छोटे बच्चों में अधिक असर देखा गया है।
कार्रवाई की जद में कई बड़ी कंपनियां भी आई हैं। जांच में सामने आया कि कई कंपनियां रात में प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम बंद रखती थीं। इसके चलते आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण स्तर बढ़ गया था।
बिना अनुमति किसी भी निजी या सरकारी जमीन पर राख (ऐश) फेंकने पर 5 लाख से 50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उद्योगों को नोटिस और सुनवाई के बाद ही यह कार्रवाई की जा रही है।
पर्यावरण मंडल ने स्पष्ट किया है कि पहले सुधार, बाद में उत्पादन की नीति अपनाई जाएगी। जब तक उद्योग सभी मानकों का पालन नहीं करेंगे, तब तक उन्हें दोबारा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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