मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बड़ा झटका सामने आया है। देश की प्रमुख प्राइवेट फ्यूल रिटेलर नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में ₹5 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बाद कंपनी ने बढ़ी हुई लागत का कुछ बोझ उपभोक्ताओं पर डालने का फैसला किया है।सूत्रों के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमले के बाद वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियां अब तक पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे हुए हैं, जिससे उन पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।नायरा एनर्जी, जो देशभर में लगभग 6,967 पेट्रोल पंप संचालित करती है, ने लगातार बढ़ते नुकसान को देखते हुए यह कदम उठाया है। हालांकि, इस बढ़ोतरी का वास्तविक असर अलग-अलग राज्यों में वैट और अन्य स्थानीय करों के कारण भिन्न हो सकता है, जहां कुछ स्थानों पर पेट्रोल की कीमत में ₹5.30 प्रति लीटर तक की वृद्धि देखी जा रही है।दूसरी ओर, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और बीपी के संयुक्त उपक्रम जियो-बीपी ने अभी तक कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, जबकि नुकसान झेलने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल—भी फिलहाल कीमतों को स्थिर बनाए हुए हैं।बताया जा रहा है कि अप्रैल 2022 से पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ था, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बढ़ती लागत के कारण प्राइवेट कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। हाल ही में सरकारी कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल में ₹2 प्रति लीटर और औद्योगिक उपयोग के लिए बल्क डीजल में लगभग ₹22 प्रति लीटर की वृद्धि की थी।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं पर इसका और असर पड़ सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बड़ा झटका सामने आया है। देश की प्रमुख प्राइवेट फ्यूल रिटेलर नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में ₹5 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बाद कंपनी ने बढ़ी हुई लागत का कुछ बोझ उपभोक्ताओं पर डालने का फैसला किया है।
सूत्रों के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमले के बाद वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियां अब तक पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे हुए हैं, जिससे उन पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
नायरा एनर्जी, जो देशभर में लगभग 6,967 पेट्रोल पंप संचालित करती है, ने लगातार बढ़ते नुकसान को देखते हुए यह कदम उठाया है। हालांकि, इस बढ़ोतरी का वास्तविक असर अलग-अलग राज्यों में वैट और अन्य स्थानीय करों के कारण भिन्न हो सकता है, जहां कुछ स्थानों पर पेट्रोल की कीमत में ₹5.30 प्रति लीटर तक की वृद्धि देखी जा रही है।
दूसरी ओर, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और बीपी के संयुक्त उपक्रम जियो-बीपी ने अभी तक कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, जबकि नुकसान झेलने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल—भी फिलहाल कीमतों को स्थिर बनाए हुए हैं।
बताया जा रहा है कि अप्रैल 2022 से पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ था, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बढ़ती लागत के कारण प्राइवेट कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। हाल ही में सरकारी कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल में ₹2 प्रति लीटर और औद्योगिक उपयोग के लिए बल्क डीजल में लगभग ₹22 प्रति लीटर की वृद्धि की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं पर इसका और असर पड़ सकता है।
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