संसद में गूंजा पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी की चेतावनी—‘जंग लंबी चली तो गंभीर दुष्परिणाम’, सर्वदलीय बैठक आज

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर संसद में मंगलवार को तीखी चर्चा देखने को मिली। राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहा, तो इसके गंभीर वैश्विक और आर्थिक दुष्परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने बताया कि इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने सात नए समूहों का गठन किया है, जो ऊर्जा, एलपीजी, महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला जैसे अहम क्षेत्रों पर नजर रखेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध के कारण भारत के व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति पर असर पड़ा है। साथ ही, खाड़ी देशों में रह रहे लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक करीब 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित वापस लौट चुके हैं।

सरकार ने इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा के लिए बुधवार शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें सभी दलों के नेताओं के साथ वर्तमान स्थिति और भारत की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

इस बीच, संसद में कई सांसदों ने भी अपने विचार रखे। बारामूला से निर्दलीय सांसद अब्दुल रशीद शेख ने ईरान में हमले में मारी गई बच्चियों के लिए अपने एक महीने का वेतन दान करने की घोषणा की और सरकार से ईरान का समर्थन करने की मांग की। वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट रुख अपनाने की जरूरत बताई।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ट्रांसजेंडर विधेयक को लेकर सरकार पर हमला बोला और इसे संवैधानिक अधिकारों पर आघात बताया। वहीं अन्य सांसदों ने शिक्षा, किसानों, महिलाओं और आर्थिक मुद्दों को भी जोरशोर से उठाया।

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का यह संकट न केवल वैश्विक राजनीति बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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