नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा नक्सलवाद खत्म करने के लिए तय की गई समयसीमा अब नजदीक है, ऐसे में देशभर में सुरक्षा एजेंसियों ने अपने अभियान तेज कर दिए हैं। CRPF, BSF और राज्य पुलिस बल मिलकर नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और आंध्र प्रदेश के जंगलों में सक्रिय शीर्ष माओवादी नेताओं को पकड़ने या खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यदि शीर्ष नेतृत्व को पकड़ लिया जाता है, तो बाकी कैडर स्वतः आत्मसमर्पण कर सकते हैं।ओडिशा के कंधमाल जिले में हाल ही में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली, जहां जंगलों में छिपे माओवादी ठिकाने को ध्वस्त किया गया और दो सक्रिय बारूदी सुरंगें बरामद की गईं। यह ऑपरेशन CRPF, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और जिला पुलिस के संयुक्त प्रयास से चलाया गया, जिसमें ड्रोन की मदद से निगरानी भी की जा रही है।वहीं, तेलंगाना में माओवादी नेता थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी सहित कई उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया। बस्तर में 11 मार्च को 108 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया, जिन पर कुल 3.95 करोड़ रुपये का इनाम था। इनके पास से AK-47, INSAS, SLR और अन्य आधुनिक हथियार भी बरामद हुए।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में सैकड़ों माओवादी मारे गए, हजारों गिरफ्तार हुए और बड़ी संख्या में उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया। पहले जहां 21 केंद्रीय समिति सदस्य सक्रिय थे, अब केवल तीन ही वांछित रह गए हैं।सुरक्षा विशेषज्ञ प्रकाश सिंह के अनुसार, सरकार 31 मार्च की डेडलाइन तक काफी हद तक नक्सलवाद पर नियंत्रण पा सकती है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि दूरदराज के आदिवासी इलाकों में विकास कार्यों की निरंतरता और निगरानी बेहद जरूरी है, अन्यथा असंतोष फिर से बढ़ सकता है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा नक्सलवाद खत्म करने के लिए तय की गई समयसीमा अब नजदीक है, ऐसे में देशभर में सुरक्षा एजेंसियों ने अपने अभियान तेज कर दिए हैं। CRPF, BSF और राज्य पुलिस बल मिलकर नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और आंध्र प्रदेश के जंगलों में सक्रिय शीर्ष माओवादी नेताओं को पकड़ने या खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यदि शीर्ष नेतृत्व को पकड़ लिया जाता है, तो बाकी कैडर स्वतः आत्मसमर्पण कर सकते हैं।
ओडिशा के कंधमाल जिले में हाल ही में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली, जहां जंगलों में छिपे माओवादी ठिकाने को ध्वस्त किया गया और दो सक्रिय बारूदी सुरंगें बरामद की गईं। यह ऑपरेशन CRPF, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और जिला पुलिस के संयुक्त प्रयास से चलाया गया, जिसमें ड्रोन की मदद से निगरानी भी की जा रही है।
वहीं, तेलंगाना में माओवादी नेता थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी सहित कई उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया। बस्तर में 11 मार्च को 108 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया, जिन पर कुल 3.95 करोड़ रुपये का इनाम था। इनके पास से AK-47, INSAS, SLR और अन्य आधुनिक हथियार भी बरामद हुए।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में सैकड़ों माओवादी मारे गए, हजारों गिरफ्तार हुए और बड़ी संख्या में उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया। पहले जहां 21 केंद्रीय समिति सदस्य सक्रिय थे, अब केवल तीन ही वांछित रह गए हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञ प्रकाश सिंह के अनुसार, सरकार 31 मार्च की डेडलाइन तक काफी हद तक नक्सलवाद पर नियंत्रण पा सकती है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि दूरदराज के आदिवासी इलाकों में विकास कार्यों की निरंतरता और निगरानी बेहद जरूरी है, अन्यथा असंतोष फिर से बढ़ सकता है।
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