मनेंद्रगढ़ में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। चतुर्थी के दिन आयोजित भव्य चुनरी यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने पूरे शहर को भक्तिमय रंग में रंग दिया। हर साल की तरह इस बार भी यात्रा ने भव्यता के नए आयाम स्थापित किए।इस वर्ष चुनरी यात्रा की सबसे खास बात इसकी लंबाई रही, जो बढ़कर 801 मीटर तक पहुंच गई। आयोजकों के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 2019 में मात्र 51 मीटर की चुनरी से हुई थी, लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था और सहभागिता ने इसे आज एक विशाल धार्मिक आयोजन में बदल दिया है।यात्रा की शुरुआत शहर के प्राचीन काली मंदिर से विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। मां दुर्गा की आराधना के बाद चुनरी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं और बच्चियों ने “जय माता दी” के जयकारों से माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।यात्रा काली मंदिर से निकलकर बस स्टैंड, पीडब्ल्यूडी चौक, बाईपास मार्ग, खेड़िया तिराहा, विवेकानंद चौक होते हुए शीतला माता मंदिर पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद राम मंदिर से होते हुए यात्रा पुनः काली मंदिर पहुंचकर विधिवत संपन्न हुई।पूरे मार्ग में जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए थे, जहां श्रद्धालुओं के लिए शीतल जल, शरबत और प्रसाद की व्यवस्था की गई। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भक्ति गीतों और आकर्षक झांकियों ने इस यात्रा को एक भव्य आध्यात्मिक उत्सव का रूप दे दिया।आयोजकों का कहना है कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और एकता का प्रतीक बन चुकी है। वहीं, पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
मनेंद्रगढ़ में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। चतुर्थी के दिन आयोजित भव्य चुनरी यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने पूरे शहर को भक्तिमय रंग में रंग दिया। हर साल की तरह इस बार भी यात्रा ने भव्यता के नए आयाम स्थापित किए।
इस वर्ष चुनरी यात्रा की सबसे खास बात इसकी लंबाई रही, जो बढ़कर 801 मीटर तक पहुंच गई। आयोजकों के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 2019 में मात्र 51 मीटर की चुनरी से हुई थी, लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था और सहभागिता ने इसे आज एक विशाल धार्मिक आयोजन में बदल दिया है।
यात्रा की शुरुआत शहर के प्राचीन काली मंदिर से विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। मां दुर्गा की आराधना के बाद चुनरी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं और बच्चियों ने “जय माता दी” के जयकारों से माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
यात्रा काली मंदिर से निकलकर बस स्टैंड, पीडब्ल्यूडी चौक, बाईपास मार्ग, खेड़िया तिराहा, विवेकानंद चौक होते हुए शीतला माता मंदिर पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद राम मंदिर से होते हुए यात्रा पुनः काली मंदिर पहुंचकर विधिवत संपन्न हुई।
पूरे मार्ग में जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए थे, जहां श्रद्धालुओं के लिए शीतल जल, शरबत और प्रसाद की व्यवस्था की गई। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भक्ति गीतों और आकर्षक झांकियों ने इस यात्रा को एक भव्य आध्यात्मिक उत्सव का रूप दे दिया।
आयोजकों का कहना है कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और एकता का प्रतीक बन चुकी है। वहीं, पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
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