एमसीबी जिले के कोयलांचल क्षेत्र चिरमिरी स्थित कुरासिया अंडरग्राउंड माइंस में जल संकट को लेकर श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। एसईसीएल कॉलोनी में कई दिनों से पानी की सप्लाई बाधित होने के कारण कर्मचारियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। हालात इतने बिगड़ गए कि कई घरों में हफ्तों तक पानी नहीं पहुंच सका, जिससे नाराज श्रमिकों ने खदान के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।धरने के चलते खदान का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया और कोयला उत्पादन प्रभावित होने लगा। कर्मचारियों का कहना था कि वे देश को ऊर्जा देने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन उनके अपने घरों में पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुरासिया अंडरग्राउंड माइंस के उप क्षेत्रीय प्रबंधक अरुण सिंह चौहान मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों से बातचीत की। प्रबंधन ने तत्काल टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति शुरू करने और दो दिनों के भीतर नियमित जल सप्लाई बहाल करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने धरना समाप्त कर काम पर लौटना शुरू किया, जिससे उत्पादन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा।प्रबंधन के अनुसार, कॉलोनी में पानी की कमी नहीं है, बल्कि तकनीकी समस्या के कारण ऊपरी मंजिलों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा था। पाइपलाइन में प्रेशर कम होने से सप्लाई बाधित हो रही थी। इस समस्या के समाधान के लिए नई बाईपास लाइन डाली जा रही है, जिससे सीधे और पर्याप्त दबाव के साथ पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी।वहीं कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन केवल आश्वासन ही मिलता रहा है। उनका कहना है कि बच्चों की परीक्षाओं के बीच पानी की कमी ने परिवारों को बेहद परेशान कर दिया है। यूनियन नेताओं ने भी प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्रमिकों से अधिक उत्पादन लिया जाता है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं कराई जा रही हैं।
एमसीबी जिले के कोयलांचल क्षेत्र चिरमिरी स्थित कुरासिया अंडरग्राउंड माइंस में जल संकट को लेकर श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। एसईसीएल कॉलोनी में कई दिनों से पानी की सप्लाई बाधित होने के कारण कर्मचारियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। हालात इतने बिगड़ गए कि कई घरों में हफ्तों तक पानी नहीं पहुंच सका, जिससे नाराज श्रमिकों ने खदान के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
धरने के चलते खदान का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया और कोयला उत्पादन प्रभावित होने लगा। कर्मचारियों का कहना था कि वे देश को ऊर्जा देने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन उनके अपने घरों में पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुरासिया अंडरग्राउंड माइंस के उप क्षेत्रीय प्रबंधक अरुण सिंह चौहान मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों से बातचीत की। प्रबंधन ने तत्काल टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति शुरू करने और दो दिनों के भीतर नियमित जल सप्लाई बहाल करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने धरना समाप्त कर काम पर लौटना शुरू किया, जिससे उत्पादन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा।
प्रबंधन के अनुसार, कॉलोनी में पानी की कमी नहीं है, बल्कि तकनीकी समस्या के कारण ऊपरी मंजिलों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा था। पाइपलाइन में प्रेशर कम होने से सप्लाई बाधित हो रही थी। इस समस्या के समाधान के लिए नई बाईपास लाइन डाली जा रही है, जिससे सीधे और पर्याप्त दबाव के साथ पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन केवल आश्वासन ही मिलता रहा है। उनका कहना है कि बच्चों की परीक्षाओं के बीच पानी की कमी ने परिवारों को बेहद परेशान कर दिया है। यूनियन नेताओं ने भी प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्रमिकों से अधिक उत्पादन लिया जाता है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं कराई जा रही हैं।
Your email address will not be published. Required fields are marked *