पुडुचेरी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और DMK के बीच गठबंधन को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। नामांकन प्रक्रिया 23 मार्च को समाप्त होने वाली है, लेकिन उससे ठीक पहले भी दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन सकी है, जिससे राजनीतिक हलकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।हालांकि, तमिलनाडु में कांग्रेस और DMK के बीच 4 मार्च को गठबंधन तय हो चुका है। इस समझौते के तहत कांग्रेस को 234 सीटों में से 28 सीटें मिली हैं, जबकि उसने शुरू में 39 सीटों की मांग की थी। पार्टी ने गठबंधन बनाए रखने के लिए समझौता किया, क्योंकि तमिलनाडु में DMK प्रमुख सहयोगी की भूमिका में है।वहीं पुडुचेरी में सीट बंटवारे को लेकर मतभेद बना हुआ है। DMK ने प्रस्ताव दिया है कि दोनों पार्टियाँ 14-14 सीटों पर चुनाव लड़ें और 2 सीटें अन्य सहयोगियों के लिए छोड़ी जाएं, लेकिन कांग्रेस इस फॉर्मूले से सहमत नहीं है। कांग्रेस 2021 के विधानसभा चुनाव के पुराने फॉर्मूले को ही बनाए रखना चाहती है, जिसमें उसे ज्यादा सीटें मिली थीं।तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए एआईसीसी प्रभारी गिरीश चोडनकर ने बताया कि बातचीत जारी है और जल्द ही समाधान निकलने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि समझौते का भविष्य बातचीत की दिशा पर निर्भर करेगा।इसी बीच कांग्रेस ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने पुडुचेरी की सभी 30 सीटों पर उम्मीदवारों की पहचान कर ली है और जरूरत पड़ने पर अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प भी खुला रखा है। कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति, जिसकी अध्यक्षता मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी कर रहे हैं, ने इन नामों की समीक्षा भी कर ली है।पुडुचेरी के पूर्व मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने उम्मीद जताई है कि गठबंधन जल्द तय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस की स्थिति मजबूत है और नामांकन वापसी के बाद पार्टी जोर-शोर से चुनाव प्रचार शुरू करेगी।बता दें कि पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु की 234 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी। ऐसे में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि डेडलाइन से पहले कांग्रेस और DMK के बीच गठबंधन पर अंतिम मुहर लगती है या नहीं।
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और DMK के बीच गठबंधन को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। नामांकन प्रक्रिया 23 मार्च को समाप्त होने वाली है, लेकिन उससे ठीक पहले भी दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन सकी है, जिससे राजनीतिक हलकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
हालांकि, तमिलनाडु में कांग्रेस और DMK के बीच 4 मार्च को गठबंधन तय हो चुका है। इस समझौते के तहत कांग्रेस को 234 सीटों में से 28 सीटें मिली हैं, जबकि उसने शुरू में 39 सीटों की मांग की थी। पार्टी ने गठबंधन बनाए रखने के लिए समझौता किया, क्योंकि तमिलनाडु में DMK प्रमुख सहयोगी की भूमिका में है।
वहीं पुडुचेरी में सीट बंटवारे को लेकर मतभेद बना हुआ है। DMK ने प्रस्ताव दिया है कि दोनों पार्टियाँ 14-14 सीटों पर चुनाव लड़ें और 2 सीटें अन्य सहयोगियों के लिए छोड़ी जाएं, लेकिन कांग्रेस इस फॉर्मूले से सहमत नहीं है। कांग्रेस 2021 के विधानसभा चुनाव के पुराने फॉर्मूले को ही बनाए रखना चाहती है, जिसमें उसे ज्यादा सीटें मिली थीं।
तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए एआईसीसी प्रभारी गिरीश चोडनकर ने बताया कि बातचीत जारी है और जल्द ही समाधान निकलने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि समझौते का भविष्य बातचीत की दिशा पर निर्भर करेगा।
इसी बीच कांग्रेस ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने पुडुचेरी की सभी 30 सीटों पर उम्मीदवारों की पहचान कर ली है और जरूरत पड़ने पर अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प भी खुला रखा है। कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति, जिसकी अध्यक्षता मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी कर रहे हैं, ने इन नामों की समीक्षा भी कर ली है।
पुडुचेरी के पूर्व मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने उम्मीद जताई है कि गठबंधन जल्द तय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस की स्थिति मजबूत है और नामांकन वापसी के बाद पार्टी जोर-शोर से चुनाव प्रचार शुरू करेगी।
बता दें कि पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु की 234 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी। ऐसे में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि डेडलाइन से पहले कांग्रेस और DMK के बीच गठबंधन पर अंतिम मुहर लगती है या नहीं।
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