Devendra Yadav एक बार फिर भिलाई में जनहित के मुद्दों को लेकर सक्रिय हो गए हैं। भिलाई में वे सिविक सेंटर से सेक्टर-4 तक मौन पदयात्रा निकालने जा रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) द्वारा रिटेंशन धारकों के किराए में की गई वृद्धि और अन्य समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाना है।विधायक ने बताया कि इस पदयात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इससे पहले भी वे इसी मुद्दे को लेकर सिविक सेंटर में एक सप्ताह तक सत्याग्रह कर चुके हैं। अब मौन पदयात्रा के जरिए वे आम जनता को जागरूक करने और बीएसपी प्रबंधन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करेंगे।उन्होंने बताया कि ‘भिलाई बचाओ पदयात्रा’ की रणनीति को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं, हाउस लीज संघर्ष समिति, बीएसपी ट्रेड यूनियनों और स्थानीय लोगों का व्यापक समर्थन मिला है। यह पदयात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण और मौन होगी, ताकि संदेश स्पष्ट रूप से प्रशासन और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचे।इसके अलावा विधायक ने प्रदेश में बढ़ते नशे के मामलों पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, जो कभी ‘धान का कटोरा’ कहलाता था, अब अफीम की खेती और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण बदनाम हो रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रशासन, सरकार और उद्योगपतियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।धर्मांतरण बिल को लेकर भी उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि यह संवैधानिक प्रक्रियाओं के विपरीत है और जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तब इसे विधानसभा में लाना उचित नहीं है।
Devendra Yadav एक बार फिर भिलाई में जनहित के मुद्दों को लेकर सक्रिय हो गए हैं। भिलाई में वे सिविक सेंटर से सेक्टर-4 तक मौन पदयात्रा निकालने जा रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) द्वारा रिटेंशन धारकों के किराए में की गई वृद्धि और अन्य समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाना है।
विधायक ने बताया कि इस पदयात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इससे पहले भी वे इसी मुद्दे को लेकर सिविक सेंटर में एक सप्ताह तक सत्याग्रह कर चुके हैं। अब मौन पदयात्रा के जरिए वे आम जनता को जागरूक करने और बीएसपी प्रबंधन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने बताया कि ‘भिलाई बचाओ पदयात्रा’ की रणनीति को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं, हाउस लीज संघर्ष समिति, बीएसपी ट्रेड यूनियनों और स्थानीय लोगों का व्यापक समर्थन मिला है। यह पदयात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण और मौन होगी, ताकि संदेश स्पष्ट रूप से प्रशासन और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचे।
इसके अलावा विधायक ने प्रदेश में बढ़ते नशे के मामलों पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, जो कभी ‘धान का कटोरा’ कहलाता था, अब अफीम की खेती और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण बदनाम हो रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रशासन, सरकार और उद्योगपतियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
धर्मांतरण बिल को लेकर भी उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि यह संवैधानिक प्रक्रियाओं के विपरीत है और जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तब इसे विधानसभा में लाना उचित नहीं है।
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