बेंगलुरु में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। एलपीजी गैस की कमी के चलते न सिर्फ घरेलू किचन बल्कि श्राद्ध और अन्य वैदिक अनुष्ठानों पर भी गहरा प्रभाव पड़ रहा है।कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने के कारण ब्राह्मण समुदाय से जुड़ी संस्थाएं भी संकट का सामना कर रही हैं। Vaidika Dharma Sahay Sabha ने एलपीजी की कमी के चलते मृत्युोत्तर संस्कार (श्राद्ध और वैकुंठ कार्यक्रम) आयोजित करने में असमर्थता जताई है। संस्था ने अपने मल्लेश्वरम कार्यालय के बाहर सूचना जारी कर नई बुकिंग लेना भी बंद कर दिया है।संस्था के अनुसार, श्राद्ध और तिथि जैसे अनुष्ठानों में भोजन व्यवस्था के लिए रोजाना 2 से 3 गैस सिलेंडरों की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में सप्ताह में मुश्किल से एक सिलेंडर ही मिल पा रहा है। इसके चलते पहले से बुक किए गए कई कार्यक्रमों को रद्द या सीमित करना पड़ रहा है।इसी तरह JP Nagar स्थित अन्य संस्थाएं भी इस संकट से जूझ रही हैं। हालांकि वे फिलहाल सीमित संसाधनों में कार्यक्रम संचालित कर रही हैं, लेकिन अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें भी आयोजन बंद करने पड़ सकते हैं।इस संकट ने न केवल धार्मिक परंपराओं को प्रभावित किया है, बल्कि आम लोगों के लिए भावनात्मक और सामाजिक चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं, क्योंकि मृत्यु के बाद होने वाले ये अनुष्ठान भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
बेंगलुरु में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। एलपीजी गैस की कमी के चलते न सिर्फ घरेलू किचन बल्कि श्राद्ध और अन्य वैदिक अनुष्ठानों पर भी गहरा प्रभाव पड़ रहा है।
कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने के कारण ब्राह्मण समुदाय से जुड़ी संस्थाएं भी संकट का सामना कर रही हैं। Vaidika Dharma Sahay Sabha ने एलपीजी की कमी के चलते मृत्युोत्तर संस्कार (श्राद्ध और वैकुंठ कार्यक्रम) आयोजित करने में असमर्थता जताई है। संस्था ने अपने मल्लेश्वरम कार्यालय के बाहर सूचना जारी कर नई बुकिंग लेना भी बंद कर दिया है।
संस्था के अनुसार, श्राद्ध और तिथि जैसे अनुष्ठानों में भोजन व्यवस्था के लिए रोजाना 2 से 3 गैस सिलेंडरों की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में सप्ताह में मुश्किल से एक सिलेंडर ही मिल पा रहा है। इसके चलते पहले से बुक किए गए कई कार्यक्रमों को रद्द या सीमित करना पड़ रहा है।
इसी तरह JP Nagar स्थित अन्य संस्थाएं भी इस संकट से जूझ रही हैं। हालांकि वे फिलहाल सीमित संसाधनों में कार्यक्रम संचालित कर रही हैं, लेकिन अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें भी आयोजन बंद करने पड़ सकते हैं।
इस संकट ने न केवल धार्मिक परंपराओं को प्रभावित किया है, बल्कि आम लोगों के लिए भावनात्मक और सामाजिक चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं, क्योंकि मृत्यु के बाद होने वाले ये अनुष्ठान भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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