पूर्वोत्तर में विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी चिंता का कारण', एक्सपर्ट ने दी चेतावनी नई दिल्ली : म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों (ईएजी) को प्रशिक्षण देने में कथित संलिप्तता के आरोप में छह यूक्रेनियन और एक अमेरिकी सहित सात विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद, भारत के सुरक्षा और रक्षा प्रतिष्ठानों के विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी निहित स्वार्थ हमेशा पूर्वोत्तर में अशांति पैदा करने का प्रयास करते हैं. जाने-माने सुरक्षा विशेषज्ञ और नागालैंड पुलिस के पूर्व महानिदेशक, तालियाकुम जॉन लोंगकुमेर ने ईटीवी भारत को बताया, "पूर्वोत्तर हमेशा से निहित स्वार्थों के निशाने पर रहा है. इन सात विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर किया है." एनआईए ने सोमवार को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता हवाई अड्डों सहित विभिन्न स्थानों से छह यूक्रेनियन और एक अमेरिकी को भारत से भागने की कोशिश करते समय गिरफ्तार किया. इसके बाद, पटियाला हाउस कोर्ट स्थित एक विशेष एनआईए अदालत ने सभी सात विदेशियों को 11 दिनों की एनआईए हिरासत में भेज दिया. आरोप है कि वे वीजा पर भारत आए और फिर मिजोरम में दाखिल हुए. इसके बाद, वे म्यांमार में दाखिल हुए और जातीय युद्ध समूहों से संपर्क किया. लोंगकुमेर ने कहा, "उनकी गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता है. अगर जातीय विद्रोही समूहों को प्रशिक्षण देने में उनकी संलिप्तता के बारे में एनआईए द्वारा किया गया दावा सच साबित होता है, तो भारत के लिए इसका व्यापक महत्व होगा." लोंगकुमेर के अनुसार, "पूर्वोत्तर हमेशा से विदेशी स्वार्थों के हस्तक्षेप का केंद्र रहा है. वे हमेशा इस क्षेत्र में अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं. पूर्वोत्तर में सुरक्षा की गंभीर चुनौती है. जब भी इस क्षेत्र में कोई घटना घटती है, हमें इसकी जानकारी नहीं होती. उनकी पूछताछ के बाद और अधिक जानकारी सामने आ सकती है." अदालत में अपने निवेदन में, एनआईए ने बताया कि साजिश के सभी तथ्यों और इसे अंजाम देने में शामिल सभी व्यक्तियों का पता लगाने के लिए, एनआईए ने विभिन्न स्थानों से आरोपियों को गिरफ्तार किया है ताकि उनकी भूमिका और वर्तमान मामले तथा अन्य आरोपियों से संबंधित उनके पास मौजूद जानकारी की आगे जांच की जा सके. एनआईए ने अदालत को बताया, "आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान सभी संवैधानिक और वैधानिक आवश्यकताओं का पालन किया गया, गिरफ्तारी के कारणों की लिखित सूचना उन्हें अंग्रेजी और उनकी स्थानीय भाषा में दी गई, और इसकी पावती प्राप्त हुई." एनआईए पूरी साजिश, अवैध प्रवेश, प्रशिक्षण शिविरों, वित्तपोषण और भारतीय विद्रोही समूहों से संबंधों की जांच कर रही है. ईटीवी भारत से बात करते हुए, जाने-माने सुरक्षा विशेषज्ञ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व महानिदेशक एसपी वैद ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की गहन जांच करनी चाहिए कि क्या किसी संगठन या व्यक्ति ने उन्हें यहां भेजा था. वैद ने कहा, "यह पता लगाना आवश्यक है कि वे व्यक्तिगत रूप से आए थे या किसी एजेंसी ने उन्हें भेजा था. हमें यह जानना चाहिए कि क्या किसी संगठन या किसी देश ने उन्हें भेजा था." वैद के अनुसार, पूर्वोत्तर हमेशा से एक संवेदनशील क्षेत्र रहा है और विदेशियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए. उन्होंने कहा, "पर्यटन या अन्य उद्देश्यों से आने वाले किसी भी विदेशी को विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (एफआरआरओ) को रिपोर्ट करना होगा और सभी विवरण प्रदान करने होंगे." बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बयानों का जिक्र करते हुए वैद ने कहा, "यदि आप बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के उस बयान पर गौर करें, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका अपने ‘डीप स्टेट’ की मिलीभगत से बांग्लादेश और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्से के बीच एक ईसाई गलियारा बनाना चाहता है, तो अमेरिकी सहित इन विदेशी नागरिकों की हालिया गिरफ्तारी का महत्व और भी बढ़ जाता है." गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक एक वृत्तचित्र फिल्म निर्माता और "सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल" (SOLI) के संस्थापक हैं. यह फर्म आतंकवादियों के खिलाफ "कमजोर" आबादी को सलाह और प्रशिक्षण देने का दावा करती है. वैनडाइक कम से कम दो फिल्मों में दिखाई दिए हैं, जिनमें से एक में गद्दाफी के खिलाफ लीबियाई विद्रोहियों के साथ उनकी लड़ाकू भूमिका को दर्शाया गया है और दूसरी में उनकी सुरक्षा फर्म के संचालन को दिखाया गया है. वैनडाइक सीरिया में भी लड़ चुके हैं और 2022 से रूस के खिलाफ यूक्रेनी सेना में शामिल रहे है
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